अमृतसर

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सीबीएसई देगा टीचर्स को ट्रेनिंग, 4 महीने में क्लासरूम मैनेजमेंट पर होगा फोकस

सीबीएसई से एफिलिएटिड स्कूलों के टीचर्स को सीबीएसई किस-किस तरह के सब्जेक्ट्स पर ट्रेनिंग देगा।

Danik Bhaskar

Dec 31, 2017, 06:17 AM IST

पटियाला. सेंटर बोर्ड ऑफ सेकंडरी एजुकेशन (सीबीएसई) ने देशभर में 7 सेंटर फॉर एक्सीलेंस की शुरुआत की है। इसमें टीचर्स को एक्सपर्ट्स से मिलने और नई चीजें सीखने का मौका मिलेगा। हाल ही में सीबीएसई ने दिसंबर 2017 से मार्च 2018 तक का ट्रेनिंग शेड्यूल भी जारी किया है, जिसमें बताया है कि इन चार महीनों में सीबीएसई से एफिलिएटिड स्कूलों के टीचर्स को सीबीएसई किस-किस तरह के सब्जेक्ट्स पर ट्रेनिंग देगा।


हिंदी, अंग्रेजी और मैथमेटिक्स जैसे बेसिक सब्जेक्ट्स के अलावा इस ट्रेनिंग शेड्यूल में लाइफ स्किल्स, स्ट्रेस मैनेजमेंट, क्लास रूम मैनेजमेंट, रीमॉडल्ड स्ट्रक्चर ऑफ एसेसमेंट, इन्क्लूजन एंड इनक्लूजिव स्ट्रेटेजी, कॅरियर गाइडेंस, जेंडर सेंस्टेविटी और आईटी जैसे विषय भी शामिल किए हैं। चार महीनों के दौरान सबसे ज्यादा ट्रेनिंग शेड्यूल्ड क्लासरूम मैनेजमेंट के रखे गए हैं, ऐसे में यह कहना गलत नहीं कि क्लासरूम मैनेजमेंट में टीचर्स को सबसे ज्यादा प्रॉब्लम फेस करनी पड़ती है। सीनियर क्लासेस में बच्चों पर कोचिंग और कॉम्पीटिटिव एग्जाम्स का प्रेशर होता है। सेशन के अंत में तो बच्चे कोचिंग के टेस्ट्स में बेहद व्यस्त रहते हैं। ऐसे में कंटेंट बच्चों से शेयर करने की परफेक्ट प्लानिंग करनी होती है, जिससे क्लासरूम में ही रिवीजन भी प्लान किया जा सके। इससे नॉन-कोचिंग वाले बच्चों को हेल्प होती है। लर्निंग स्पीड अलग 30 बच्चों की क्लास में कुछ बच्चे जल्दी विषय को समझ जाते हैं और कुछ देर से। ऐसे में टीचर्स को दोनों तरह के बच्चों का क्लासरूम में इंट्रेस्ट बनाए रखते हुए विषय को सभी को समझाना एक चैलेंज होता है।

इश्यूज को डील करने शुरू किए सेंटर

नॉलेज अपडेट... कई बार बच्चे सब्जेक्ट के बारे में इंटरनेट या कोचिंग में पहले ही पढ़ चुके होते हैं। ऐसे में टीचर के पास सब्जेक्ट को समझाने की ऐसी टेक्निक होनी चाहिए कि टॉपिक पढ़ चुके बच्चे भी इसे नए सिरे से समझ सकें। किसी भी आउट ऑफ सिलेबस सवाल का टीचर के पास भी जवाब हो।

डिसिप्लिन... हर क्लास में कुछ बच्चे बेहद शरारती होते हैं और कुछ बेहद शांत। शरारतों के बीच भी सभी बच्चों का ध्यान सब्जेक्ट पर रखना टीचर्स के लिए चैलेंजिंग होता है। बिना सख्त हुए क्लास का एनालिसिस करना होता है कि शरारती बच्चों का मन कहां लग रहा है और वे किस तरह से सब्जेक्ट पर फोकस कर पाएंगे।

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