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कैमिकल रिपोर्ट आने से शराब तस्करी के केस अटके, तस्कर जमानत के बाद एक्टिव

खरड़ लैब में ढाई साल तक के केस हैं पेंडिंग, समय पर चालान पेश होने से 200 से ज्यादा केस आउटडेटिड।

Danik Bhaskar | Dec 21, 2017, 04:03 AM IST

बठिंडा. हरियाणा से पंजाब में शराब तस्करी पर पुलिस नकेल नहीं कस पा रही। बड़ा कारण, तस्करी के केसों में पुलिस एफआईआर तो दर्ज कर रही है, लेकिन कैमिकल जांच रिपोर्ट खरड़ लैब से समय पर आने से कोर्ट में चालान पेश नहीं हो पा रहे। पंजाब के 5 हजार से ज्यादा शराब तस्करी के केसों में यही हाल है। इनमें मालवा के ही छह जिलों के 2033 केस हैं। यही नहीं करीब 200 केस ऐसे हैं जिनमें चालान पेश करने में करीब एक साल की देरी से ये आउटडेट हो चुके हैं। अब इन केसों मे चालान पेश करने से पहले गृह विभाग से मंजूरी लेनी होगी।

- पुलिस ने भी गृह विभाग के पास केस भेजने शुरू किए है लेकिन वहां भी अधिकांश केस एक महीने से लंबित हैं। नतीजा ये है कि एफआईआर के बाद जमानत लेकर तस्कर फिर से एक्टिव हो रहे हैं। अकेले बठिंडा में ही अप्रैल से अगस्त तक 5 महीनों में तस्करी के 599 केस दर्ज हो चुके हैं, जिसमें 34,181 बोतल देसी शराब पकड़ी गई है।

- अधिकांश शराब हरियाणा से तस्करी कर लाई गई है। वहीं रिपोर्ट समय पर आने से शराब को संभालना भी पुलिस मालखानों थानों के लिए मुश्किल हो रहा है। इसी तरह पोस्टमार्टम के बाद भेजे गए विसरा की कैमिकल रिपोर्ट आने से हत्या, दुर्घटना और शवों की जांच के करीब 5 हजार केस अटके हुए हैं।

रेड के दौरान हुई थी नेता की मौत
- 11 अप्रैल 2017 को मुक्तसर की चौकी भाई का केरा के एएसआई गुरदीप सिंह ने गांव तरमाला में अकाली नेता गुरदेव सिंह के घर पर अवैध शराब के शक में रेड की थी। हाथापाई में गुरदेव सिंह की मौत हो गई। शिअद के धरना देने पर एएसआई गुरदीप सिंह पर हत्या का केस दर्ज हो गया।

- शव का पोस्टमार्टम किया गया तो विसरा खरड़ लैब भेजा गया। फरीदकोट मेडिकल जांच में हार्ट की जांच करने पर ब्लॉकेज सामने आई। मौत का कारण मेडिकल ग्राउंड पर होने से एएसआई को जमानत तो मिल गई मगर केस खारिज नहीं हो पाया, क्योंकि विसरा रिपोर्ट नहीं आई थी। एसएसपी मुक्तसर ने खुद 3 बार डीओ लेटर लिखे, तब जाकर अक्टूबर में 6 महीने बाद रिपोर्ट आई। जबकि हत्या के केस में 90 दिन में चालान पेश करना होता है।

समस्या गंभीर, ध्यान दे रहे हैं : आईजी

बठिंडा जोन के आईजी मुखविंदर सिंह छीना ने कहा कि कैमिकल इग्जामिन रिपोर्ट में देरी का मामला मेरे ध्यान में है। विसरा रिपोर्ट भी आने से केसों की जांच में काफी समस्या रही है। मुक्तसर के एक हत्या के अहम केस में भी 6 महीने बाद रिपोर्ट आई। इसके लिए भी एसएसपी मुक्तसर ने खुद 3 बार डीओ लेटर लिखा था। यह मामला गंभीर है। इसे उच्चाधिकारियों के ध्यान में लाया जाएगा। ताकि केसों की उचित पैरवी हो सके।



कैमिकल एनॉलिस्ट के 14 में से 6 पद खाली
- पंजाब में शराब और पोस्टमार्टम में विसरा रिपोर्ट की जांच के लिए केस खरड़ लैब भेजे जाते हैं। मगर यहां करीब 20 पद खाली हैं। जिन एनॉलिस्ट ने सैंपल जांचने हैं उनके 14 में से 6 पद खाली हंै। लैब के चीफ कैमिकल एग्जामिनर अफसर डाॅ. राकेश गुप्ता ने बताया, 3 नवंबर 2017 को एडीशनल चीफ सेक्रेटरी की मीटिंग में पद खाली होने का मामला उठाया था। उम्मीद है जल्द हल होगा।
- हरियाणा से सटे बठिंडा जिले के 7 थानों में 353 शराब तस्करी के केस एक साल से लेकर ढाई साल से लंबित हैं। इनमें 140 केस आउटडेटिड हो चुके हैं। थाना कैनाल में 45 लंबित केसों में से 12 एक साल से भी ज्यादा पुराने हैं, जिनके लिए गृह विभाग को मंजूरी के लिए लिखा गया है, मगर एक महीने से वहां भी फाइल अटकी पड़ी है। गांव नंदगढ़ में लंबित 28 केसों में 8 आउटडेटिड हो चुके हैं।

- मौड़ थाने में लंबित 60 केसों में से 25 केस 2016 के होने के कारण आउटडेटिड हो चुके हैं। तलवंडी साबो थाने में तो 2014 से 35 केस लंबित हैं। थाना रामा में 58, थाना सदर में 67 और थाना संगत में 2015 के 60 केस लंबित हैं।

- मुक्तसर में एक्साइज एक्ट के 263 और नशा तस्करी के 91 केस। संगरूर में शराब के 1050 और नशा तस्करी के 180 केस। बरनाला में एक्साइज के 36 और मोगा में नशा तस्करी के 272 केसों में चालान नहीं हो पाया। फिरोजपुर में 79 केसों में से सिर्फ 20 की रिपोर्ट आई।