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इस डॉक्टर ने किए थे आंख के सवा लाख ऑपरेशन, किया था देश का पहला लैंस इंप्लांट

83 की उम्र में भी हफ्ते में एक दिन मेडिकल कॉलेज में लेक्चर देने जाते, पढ़ाते ऐसे जैसे प्रैक्टिकल हो।

Anuj Sharma/Anil Sharma | Last Modified - Dec 28, 2017, 06:53 AM IST

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    आई सर्जन पदमश्री डॉ. दलजीत सिंह

    अमृतसर.विश्व विख्यात आई सर्जन पद्मश्री डॉ. दलजीत सिंह का बुधवार सुबह बीमारी के कारण देहांत हो गया। उनके निधन से शहर और मेडिकल जगत को भारी नुकसान पहुंचा है। इसके साथ ही उनकी शिक्षाओं की बदाैलत मेडिकल क्षेत्र में नाम कमा रहे उनके स्टूडेंट्स और उनकी संगत में रह चुकी शख्सियतों को इससे गहरा आघात लगा है। डॉ. दलजीत के अपने प्रोफेशन के प्रति समर्पण के बारे में अमृतसर के सरकारी आई हॉस्पिटल के हैड डॉ. करणजीत सिंह बताते हैं कि डॉक्टर साहब सन् 1985 में रिटायर हो गए थे, इसके बावजूद वह आज तक हफ्ते में एक दिन लेक्चर देने मेडिकल कॉलेज जरूर आते थे। काम के प्रति समर्पण उनमें रिटायरमेंट के 32 साल बाद भी बरकरार था।

    पूर्व राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह का भी ऑपरेशन किया, उन्होंने ही पद्मश्री से सम्मािनत किया

    डाॅ. सिंह ने पूर्व राष्ट्रपति स्व. ज्ञानी जैल सिंह की आंखों का आॅपरेशन भी किया था। उस समय ज्ञानी जैल सिंह देश के राष्ट्रपति थे और उन्हें आंखों की सर्जरी के लिए अमेरिका जाने की सलाह दी गई थी, लेकिन उन्होंने अमृतसर में डॉ. दलजीत के पास आकर सर्जरी करवाने को तरजीह दी।

    एक दिन में 8 से 10 ऑपरेशन करते थे

    एक इंटरव्यू के दौरान दैनिक भास्कर के इस संवाददाता ने जब डा. दलजीत सिंह से सवा लाख का आंकड़ा छूने के बारे में पूछा था तो वह बोले, ‘मैं तो बस अपना काम करता गया। पता ही नहीं चला कब ये नंबर सवा लाख तक पहुंच गया। डाॅक्टर सिंह एक दिन में 8 से 10 ऑपरेशन करते थे।

    अमेरिका में आई सर्जरी तकनीकें आज भी उनके नाम से पेटेंट

    आई सर्जन डॉ. दलजीत सिंह का जन्म अमृतसर में 11 अक्टूबर 1934 में ज्ञानी साहिब सिंह के घर में हुआ था। अमृतसर मेडिकल कॉलेज में 1956 में उन्होंने अपनी एमबीबीएस की शिक्षा हासिल की। इसके बाद डीओ करने के लिए वह लंदन चले गए, लेकिन वहां से लौटने के बाद उन्होंने मेडिकल कॉलेज ज्वाइन किया। यहां वह 1984 से 1985 तक आई विभाग के मुखी भी रहे। उन्हें पंजाब सरकार ने गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज की लाइफ टाइम मैंबरशिप दे रखी थी और सप्ताह में एक दिन वह विद्यार्थियों को आकर लैक्चर भी देते। डॉ. दलजीत सिंह की आई सर्जरी में देन कभी न भूलने वाली है।

    उनके जाने से ऑप्थेलमोलॉजिस्ट सोसायटी को बढ़ा नुकसान पहुंचा है। उन्होंने मेडिकल जनरल के लिए 300 से अधिक आर्टिकल लिखे। उन्हें लिखने पढ़ने का काफी शौक था। साहित्य में रुचि के चलते उन्होंने पंजाबी में चार किताबें लिखीं। 174 इंस्ट्रूमेंट्स को डॉ. दलजीत सिंह ने मोडिफाई किया या नए रूप से तैयार किया। हॉलैंड से प्रोफेसर डॉ. जॉन रिस्ट और डॉ. दलजीत सिंह ने मिलकर एक लैंस काे इजाद किया था। इसका नाम सिंह-रस्ट लैंस रखा गया, जो आज भी मार्केट में उपलब्ध है और सफेद मोतिया के ऑपरेशन में इसका प्रयोग होता है।

    डॉक्टर साहब साइकिल पर आते थे मेडिकल कॉलेज: सिविल सर्जन

    सिविल सर्जन डॉ. नरिंदर कौर ने बताया डॉ. दलजीत सिंह साधारण व्यक्ति थे। मेडिकल कॉलेज में डॉ. दलजीत सिंह से पढ़ चुकी सिविल सर्जन डॉ. नरिंदर कौर ने बताया कि उन्हें डॉ. दलजीत सिंह की छात्रा होने पर गर्व है। उन्हें आज भी याद है कि डॉ. दलजीत सिंह साइकिल पर मेडिकल कॉलेज आते थे, जबकि बाकी डॉक्टर कारों या स्कूटरों में मेडिकल कॉलेज पहुंचते। उनकी सादगी को देखकर हर कोई प्रभावित था। उनके पढ़ाने का तरीका बिल्कुल अलग था। उन्होंने हमें कभी डांटा नहीं। जब वह पढ़ाते थे तो ऐसा लगता था जैसे प्रेक्टिकल प्रेक्टिस करवा रहे हों।

    यही कारण था कि उन्होंने और उनके बैचमेट्स ने कभी उनकी क्लास मिस नहीं की। डॉ. नरिंदर ने बताया कि वह पढ़ाने के साथ-साथ पढ़ते भी बहुत थे। मेडिकल जर्नल्स से हर नवीनतम जानकारी उनके पास उपलब्ध होती थी। विदेशों में चल रही सर्जरियों के बारे में जानने की वह कोशिश में रहते।

    इच्छा अनुसार जगह पर किया अंतिम संस्कार

    डॉ. दलजीत सिंह की इच्छा अनुसार फतेहगढ़ चूड़ियां रोड स्थित फार्म हाउस में उनका अंतिम संस्कार किया गया। 10 साल पहले उनकी पत्नी स्वर्ण कौर का अंतिम संस्कार भी यही किया गया था। 26 दिसंबर 2010 को उनकी पत्नी का निधन हुआ था, वहीं 27 दिसंबर डॉ. दलजीत सिंह दुनिया से विदा हो गए। उनके बेटों डाॅ. रविजीत सिंह और किरनजीत सिंह ने अपने पिता को मुखाग्नि दी। इस मौके पर शहर के प्रतिष्ठित लोगों ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी। शहर के फतेहगढ़ चूड़ियां रोड स्थित उनके फार्म हाउस पर डाॅ. दलजीत सिंह के अंतिम संस्कार के समय शहर के गणमान्य लोग मौजूद थे।

    इनमें आईजी कुंवर विजय प्रताप सिंह, डाॅ. एएल अदलखा, डाॅ. अशोक उप्पल, डाॅ. जीएस गिरगिला, डाॅ. नरिंदर सिंह, डा. प्रताप सिंह, अविनाश महेन्द्रू, अनिल सिंघल, अशोक सेठी, इंदरबीर सिंह निज्जर, डाॅ. तेजबीर सिंह, डाॅ. कर्मजीत सिंह के अलावा कई सामाजिक और स्वयंसेवी संगठनों के लोग मौजूद थे।

    मेडिकल कॉलेज ब्यूटीफिकेशन के लिए दिए थे एक लाख

    जब डॉ. करनैल सिंह मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल बने तो उन्होंने कॉलेज की ब्यूटीफिकेशन की बात कही। उनकी बात खत्म होने के साथ ही डॉ. दलजीत सिंह ने 1 लाख रुपए का चैक काट डॉ. करनैल सिंह को थमा दिया था। इसके खर्च से प्रिंसिपल ऑफिस के सामने पार्क काे संवारा गया।

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    डॉ. दलजीत सिंह का बुधवार सुबह निधन हुआ।
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    वे कुछ समय से बीमार चल रहे थे।
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    वे कुछ समय से बीमार चल रहे थे।
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    पदमश्री डॉ. दलजीत सिंह की पुरानी फोटो।
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    पदमश्री डॉ. दलजीत सिंह एक स्पोर्ट्स प्लेयर भी थे।
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    सम्मान लेते हुए डॉक्टर।
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    डाॅ. दलजीत सिंह को सम्मानित करते पूर्व पीएम स्वर्गीय आईके गुजराल।
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    डाॅ. दलजीत सिंह मनोज कुमार के साथ।
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    डाॅ. सिंह ने पूर्व राष्ट्रपति स्व. ज्ञानी जैल सिंह की आंखों का आॅपरेशन भी किया था।
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Web Title: Eye Surgeon Padamshree Dr. Daljeet Singh Funral
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