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एक ही फैमिली की चार पीढ़ियों ने एक साथ डाले वोट, पहली बार निगम में पहुंची 42 महिला पार्षद

bhaskar news | Last Modified - Dec 18, 2017, 06:31 AM IST

अकाली दल ने 25, भाजपा ने 24, कांग्रेस ने 4, सीपीआई ने 1 और आजाद उम्मीदवारों ने 11 सीटों पर जीत दर्ज की थी।
  • एक ही फैमिली की चार पीढ़ियों ने एक साथ डाले वोट, पहली बार निगम में पहुंची 42 महिला पार्षद

    अमृतसर.पंजाब में सरकार बनाने के बाद नगर निगम चुनावों में भी सत्ता पूरी तरह से पलट गई है। 2012 चुनावों में कांग्रेस जहां मात्र 6.1 प्रतिशत सीटों पर सिमट गई थी, वहीं इस बार कांग्रेस ने 75.29 प्रतिशत सीटों पर कब्जा किया है। 85 वार्डों में हुए चुनावों के परिणामों में कांग्रेस ने 64 सीटों पर जीत हासिल की है। बटाला रोड के भारत नगर के रहने वाले एक ही परिवार की चार पीढ़ियों ने एक साथ वार्ड 26 के बूथ नंबर सात में रविवार सुबह वोट डाला। 101 वर्षीय पड़दादा पिशोरा सिंह, 76 वर्षीय दादा सुरिंदर सिंह अाजाद, 51 वर्षीय बेटा हरमिंदर सिंह और 21 वर्षीय पोता तजिंदर सिंह ने कहा कि हर किसी को वोट जरूर डालना चाहिए।

    बीजेपी ने 6 और अकाली दल ने 7 सीटों पर जीत हासिल की है। इसके साथ ही 8 आजाद उम्मीदवार जीत दर्ज करने में सफल हुए हैं। इन चुनावों में पहली बार 42 महिला पार्षद जीत निगम में पहुंची हैं। इनमें से सिर्फ दाे ममता दत्ता और जतिंदर सोनिया ही राजनीति में एक्टिव हैं, बाकी सभी को अपने रिश्तेदारों के नाम पर वोट मिले हैं। वर्ष 2012 के चुनाव 65 वार्डों में हुए थे।

    जिसमें अकाली दल ने 25, भाजपा ने 24, कांग्रेस ने 4, सीपीआई ने 1 और आजाद उम्मीदवारों ने 11 सीटों पर जीत दर्ज की थी। चुनावों के बाद तीन आजाद उम्मीदवार अकाली दल में शामिल हो गए थे। इस साल वोट प्रतिशतता पिछली बार के मुकाबले काफी कम रही। 2012 में जहां वोट 60 प्रतिशत पड़े थे, वहीं इस साल 53 प्रतिशत वोट ही पड़े। भाजपा को सबसे बड़ा झटका पूर्व मेयर बख्शीराम अरोड़ा की हार से लगा है। पंजाब सरकार ने 50 प्रतिशत वार्डों को महिलाओं के लिए रिजर्व रखा था। 85 वार्डों में से 42 महिलाओं के लिए रिजर्व रखी गई थी। निगम हाउस में पहुंचने वाली महिलाओं में से इस बार 30 कांग्रेसी महिलाएं हैं। वहीं अकाली दल की 5, आजाद भी 5 और 2 बीजेपी विजेता उम्मीदवारों ने जीत हासिल की है।


    पिछली बार से 42,749 वोटर ज्यादा थे इस बार
    पिछली बार कुल वोटर रहे 7,27,251, जबकि पांच साल बाद 2015 में बढ़ कर 7.70 लाख हो गए यानी कि पांच साल में 42,749 वोटर बढ़े। पिछली बार मतदान 60 फीसदी हुआ था।

    वार्ड 56, 55, 83 और 82 में उम्मीदवारों के समर्थकों में हाथापाई

    छिटपुट घटनाओं के बीच रविवार निगम चुनाव शांतिपूर्वक संपन्न हो गए। पिछली बार की तरह इस बार किसी भी वार्ड का चुनाव न तो स्थगित हुआ और न ही दोबारा हुआ। गौरतलब है कि 2012 में तीन नंबर वार्ड के चुनाव स्थगित किए गए थे और कुछ दिनों के बाद उसके परिणाम घोषित हुए थे। वहीं इस बार वेस्ट की 12 वार्डों को संवेदनशील घोषित किया गया था। सुल्तानविंड रोड, छेहर्टा, पुतलीघर, रेलवे बी ब्लाक कालोनी, तरनतारन रोड, भराड़ीवाल आदि इलाकों में भीड़ की ओर से हल्ला किया जाने की कोशिश कि जा रही थी, मगर पुलिस का कड़ा पहरा होने के कारण सभी जगह कंट्रोल कर लिया गया। सुल्तानविंड रोड पर वीडियो ग्राफी कर रहे कैमरा मैन का कैमरा छीन लिया गया। जानकारी के अनुसार 12 संवेदनशील वार्डों में देर शाम तक परिणाम घोषित होने तक माहौल तनावपूर्ण बना रहा। वहीं वार्ड 56, 55, 83 और 82 में उम्मीदवारों के समर्थकों में हाथापाई और हलकी झड़प भी हुई। वार्ड 83 में कांग्रेस और भाजपा के वर्करों में सरकारी सीनियर सेकंडरी स्कूल छेहर्टा में झड़प भी हुई। वहां दो कांग्रेसी वर्करों को हलकी चोटें भी आई। इसी तरह 82 नंबर वार्ड में कांग्रेस व अकाली-भाजपा गठजोड़ के उम्मीदवारों में हाथापाई की घटनाएं सामने आई। वार्ड 55 में देर शाम करीब पौने चार बजे एएन हाई स्कूल में बने पोलिंग बूथ केंद्र में जाली मतदान करवाने के विवाद बड़ गया। वहीं वार्ड 56 में आजाद और कांग्रेस के उम्मीदवार के समर्थकों के बीच मनमुटाव हुआ। वहीं रेलवे बी ब्लाक कालोनी के पोलिंग बूथ अति संवेदनशील बना रहा।लेकिन पुलिस की सूझबूझ ने माहौल को ठीक किया।

    तैयारी का मौका नहीं मिला : टिक्का
    सात सीटें लेने वाली अकाली दल के जिला प्रधान गुरप्रताप सिंह टिक्का का कहना है कि वार्डबंदी के काफी समय तक स्थिति स्पष्ट ही नहीं की गई और कई बार वोटरों की आधी-अधूरी सूची जारी हुई। ऐसे में हमारे लोगों को तैयारी का न तो मौका मिला और न ही वह सही तरीके से प्रचार कर पाए।


    जीत-हार तो होती रहती है : राजेश हनी
    छह सीटों पर संतोष करने वाली भाजपा के जिला प्रधान एडवोकेट राजेश हनी का कहना है कि जनता का आदेश सिर मत्थे। उनका कहना है कि चुनावों में जीत-हार तो होती रहती है। इससे हमें अपनी कमियों का भी पता लगा है और उसी के आधार पर आगे मंथन करते हुए काम होगा।

    हार से हम लोग हारे नहीं : गुरभेज सिंह
    आम आदमी पार्टी के गुरभेज सिंह का भी कहना है कि हार से हम लोग हारे नहीं हैं, मनोबल हमारा अभी भी पहले जैसा है और आगामी चुनावों में पार्टी और मजबूत बन कर उभरेगी। वह भी कहते हैं कि कांग्रेस का जादू ज्यादा दिन

    तक चलने वाला नहीं है।

    मेयर और सीनियर डिप्टी मेयर भी हारे

    वार्ड नंबर 46 बतौर आजाद चुनाव लड़ने वाले विगत में अकाली दल की सीट से निगम के सीनियर डिप्टी मेयर अवतार सिंह ट्रकांवाला अपने प्रतिद्वंद्वी कांग्रेसी उम्मीदवार शैलिंदर सिंह शैली से चुनाव हारे हैं। विगत विधानसभा चुनावों में टिकट की दौड़ में शामिल ट्रकांवाला ने पार्टी से बगावत करते कांग्रेस ज्वाइन किया था, यहां वह टिकट की मांग कर रहे थे, लेकिन कांग्रेस की तरफ से जारी दल बदलुओं की खिलाफत के कारण उनको टिकट नहीं मिला और वह आजाद ही मैदान में उतर गए।

    जो मांग रहे थे विधानसभा के लिए टिकटें, वे भी हारे

    निगम चुनावों के परिणाम काफी रोचक रहे। इन चुनावों में उन नेताओं को भी हार का मुंह देखना पड़ा जो किसी समय विधानसभा चुनाव लड़ने का दावा करते हुए टिकटों की मांग कर रहे थे। वार्ड नंबर 8 से हारे कांग्रेसी नेता रंजन अग्रवाल विधानसभा चुनावों के लिए हलका उत्तरी से टिकट के दावेदार रहे है। इनके अलावा भारतीय जनता पार्टी के वार्ड नंबर 28 से चुनाव हारे सुरेश महाजन भी हलका उत्तरी से भाजपा के दावेदार थे और वह इस हलके से टिकट के चाहवान थे। उन्हीं की वजह से हलका उत्तरी से टिकट की घोषणा होने में भी काफी समय लग गया था।

    सियासी नेताओं के ये नजदीकी रिश्तेदार जीते

    विधानसभा चुनाव में विधानसभा सेंट्रल से कांग्रेस के विधायक ओपी सोनी के भतीजे विकास सोनी वार्ड नंबर 70 से चुनाव जीते हैं। विधानसभा नार्थ से कांग्रेस के विधायक सुनील दत्ती की भाभी ममता दत्ता वार्ड नंबर 11 और भाई समीर दत्ता वार्ड-10 से जीते हैं।

    वार्ड 13 में वोटर नहीं कर पाए मतदान

    वार्ड नंबर 13 के अधीन आते आबादी गोकुल एवेन्यू व गोकुल नगर के कई लोग अपने बूथ में मतदान करने पहुंचे तो उन्हें मायूसी हाल लगी। स्थानीय लोगों ने बताया कि उन्हें पार्टियां पर्ची देकर भी गई थी। लेकिन जब लोग वोट डालने गए तो वोटर सूची से नाम गायब थे। इसके अलावा कई वार्डों से लोगों की शिकायतें मिली हैं, जो वोटर सूची से नाम कटने के कारण वोट नहीं डाल सके।

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Web Title: Four Generations Cast Votes Together
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