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विदेश जाने की तैयारी में था गौंडर, मुठभेड़ के बाद हरियाणा में रुका फिर लूटी कार

सुरक्षा में चूक: गणतंत्र दिवस की चौकसी के दौरान 20 दिन में 10 बार लक्खा की ढाणी में आया विक्की।

Dainik Bhaskar

Jan 29, 2018, 05:29 AM IST
Gondar was preparing to go abroad

हिंदूमलकोटअबोहर. नाभा जेल ब्रेक के बाद फरार हुआ विक्की गौंडर पंजाब, हरियाणा, हिमाचल उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में रहा। पिछले दो तीन माह से वह विदेश भागने की तैयारी में था। उसका साथी उसे नेपाल के रास्ते विदेश भिजवाने की तैयारी कर रहे थे। इसमें सबसे बड़ा रोल इसी के साथ नाभा जेल से फरार हुए इंद्रजीत का था। इंद्रजीत नाभा जेल ब्रेक में नामजद 36 लोगों में शामिल था। इंद्रजीत सिंह संधू निवासी तरनतारन को राजपुरा पुलिस ने कुछ माह पहले ही दिल्ली एयरपोर्ट से पकड़ा। यहां इंद्रजीत सिंह से फर्जी पासपोर्ट भी मिला था, जिसके जरिए व साइप्रस गया था। इसी तरह वह विक्की गौंडर को भी विदेश भिजवाने की तैयारी कर रहा था।

सोनीपत से आगे नहीं जा सके तो हरियाणा में ही रुके

विक्की चूंकि पाकिस्तान में बैठे अपने दोस्त हरमीत पीएचडी के साथ मिलकर क्राइम और टेररिज्म का नया माॅड्यूल पंजाब में तैयार करना चाहता था। उसने अपना बड़ा नेटवर्क भी तैयार कर लिया था। इंटेलिजेंस की इसी रिपोर्ट के आधार पर 14 महीने से फरार गौंडर का एनकाउंटर दो माह में कर दिया गया। सूत्रोें की मानें तो गौंडर को विदेश भेजने में मदद जेलब्रेक में भागा खालिस्तान लिब्रेशन फोर्स का हरमिंदर मिंटू भी कर रहा था। नाभा जेल ब्रेक के 24 घंटे के अंदर ही 28 नवंबर 2016 को यूपी के शामली में पलविंदर सिंह पिंदा पकड़ा गया तो सेखों, गौंडर साथियों समेत हरियाणा के रास्ते दिल्ली की ओर भागे। मगर सोनीपत से आगे नहीं जा सके तो हरियाणा में ही रुके।


इस दौरान वह पंजाब, हरियाणा समेत कई राज्यों में रहा। 18 दिसंबर 2017 को भागने का प्रयास करते यमुनानगर के छछरौली में गौंडर, सिम्मा, बुड्‌ढा और गौरव मिगलानी की फॉर्च्यूनर पलट गई। इन्हें पनाह देने वाला दर्शन भूरा पकड़ा गया पर गौंडर साथियों संग गाड़ी लूटकर राजस्थान की ओर निकल गया। गौंडर ने मोगा से फर्जी पासपोर्ट बनवाने का भी प्रयास किया था। मगर एसटीएफ की रेड में सेखों के मोगा से पकड़े जाने से गौंडर को यहां से भगना पड़ा। सूत्रों के अनुसार विक्की सिंगापुर में गर्मदलियों से मीटिंग की तैयारी थी।

रोमी से थी गहरी दोस्ती
गौंडर की रोमी सिद्धू से गहरी दोस्ती थी। इसी के चलते एनकाउंटर की अगली रात 11 बजे हॉगकांग में बैठे वांटेड रोमी सिद्धू ने फेसबुक वॉल पर गौंडर और प्रेमा की पोस्ट कर उनके अंतिम संस्कार की जगह और टाइम लिखकर समर्थकों को पहुंचने की अपील करते हुए संगरूर जेल में बंद गैंगस्टर गुरप्रीत सेखों को शेयर की। इस पर सेखों ने अपने कामेंट लिखे।

26 जनवरी को लेकर पूरे पुख्ता सुरक्षा प्रबंध के बीच कुख्यात गैंगस्टर विक्की गौंडर और प्रेमा लाहौरिया राजस्थान और फाजिल्का पुलिस को मात देकर इंटरनेशनल बार्डर के पास तक आसानी से पहुंचते रहे। पिछले 20 दिनों में ये लोग 10 बार पक्की गांव में लक्खा की ढाणी में आए गए, लेकिन पुलिस को कोई भनक तक नहीं लगी।

बड़ी बात यह है कि ये लोग कभी किसी नाके पर रोके तक नहीं गए। ओकू टीम ने शनिवार को प्रेस कान्फ्रेंस में यह बताकर श्रीगंगानगर और फाजिल्का जिले के सुरक्षा बंदोबस्त की पोल खोल दी। अब पुलिस दोनों जिलों की पुलिस इस मामले में मुंह मोड़ रही है, जिला फाजिल्का के एसएसपी केतन बलिराम पाटिल तो फोन तक नहीं उठा रहे और न ही मैसेज के जवाब दे रहे।

सर्च जारी, ओकू टीम का मोर्चा अभी भी उसी ढाणी में

एनकाउंटर के 48 घंटे बात भी ओकू टीम, राजस्थान और पंजाब पुलिस का लखविंद्र की ढाणी में डेरा डाले हुए है। ओकू के एएआईजी संदीप गोयल, मुख्य कमांडर बिक्रमजीत सिंह बराड़ रविवार शाम 6 बजे तक उसी ढाणी में राजस्थान प्रशासन को लेकर अलग-अलग कार्रवाई करवा रहे थे। दोनों टीमों अधिकारियों के अनुसार ये उनके लिए एक बड़ी सफलता है क्योंकि वो पिछले 8 महीने से गौंडर को ढूंढ रहे थे।

प्लानिंग. मोबाइल नेटवर्क आसानी से नहीं होता था ट्रैस

ओकू टीम के अनुसार यह पाकिस्तान की सीमा पर लगा एरिया है, यहां आसानी से मोबाइल नेटवर्क ट्रेस नहीं हो पाता था। कई बार तो पाक की रेंज पकड़ में आने लगती है। ऐसे में सबसे बड़ा चैलेंज, उनकी मोबाइल लोकेशन ट्रेस करना था। जब हमने यह कन्फर्म कर लिया कि किस कंपनी का मोबाइल यहां सही कार्य करेगा, उसी के बाद कार्रवाई शूरू की। आधुनिक टेक्नोलॉजी भी उन्हें पकड़ने में काफी मददगार रही।

गौंडर रखता था पाकिस्तान की एसाल्ट राइफल, पर पुलिस ने दिखाई नहीं
गौंडर किसी भी वारदात को अंजाम देने के लिए अत्याधुनिक हथियारों का इस्तेमाल करता था। डीजीपी सुरेश अरोड़ा ने 27 जनवरी को चंडीगढ़ में प्रेस कांफ्रेंस में कहा था कि गौंडर के आतंकी, रैडीकल और आईएसआई से संबंधों की भी जांच हो रही है। उसके पास बार्डर पार से एक एसाल्ट राइफल भी भेजी गई थी। मगर जब गौंडर का एनकाउंटर हुआ तो उसके व उसके साथियों के पास राइफल नहीं मिली। गौंडर के शव के पास से .32 बोर का पिस्टल, प्रेमा के पास .32 बोर और तीसरे साथी सविंदर सिंह निवासी अमृतसर के पास .30 बोर का पिस्टल मिला है, जिस पर मेन इन चाइना लिखा है। ओकू टीम के एएआईजी संदीप गोयल कहते हैं कि हम जल्द ही एसाल्ट राइफल जल्द बरामद कर लेंगे।

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