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गुरूनानक के दिए 20 रूपए से शुरू हुआ ये लंगर, कितनी भी लोग आएं नहीं पड़ता कम

शहीदी जोड़ मेल में पहुंची करीब 4 लाख संगत के लिए अलग-अलग जगह लगाए सैकड़ों लंगर।

Dainik Bhaskar

Dec 27, 2017, 05:52 AM IST
इतने बड़े कड़ाहे हैं कि उसमें उतरकर साफ करना होता है। इतने बड़े कड़ाहे हैं कि उसमें उतरकर साफ करना होता है।

फतेहगढ़ साहिब (पटियाला). गुरुद्वारा श्री फतेहगढ़ साहिब में शहीदी जोड़ मेल के दूसरे दिन गुरु घर में करीब 4 लाख श्रद्धालुओं ने माथा टेका।। नम आंखों से बजुर्ग छोटे बच्चों को अपनी गोद में बिठाकर पाठ करते रहे। पंजाब के अलावा हरियाणा, राजस्थान, कलकत्ता, हिमाचल, जम्मू-कश्मीर और दिल्ली से श्रद्धालु पहुंचे। इसके अलावा कनाडा, इंग्लैंड, इटली और अमेरिका से भी संगत पहुंची। ये तस्वीर गुरुद्वारा फतेहगढ़ साहिब की है, यहां श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के आगे माथा टेकने के लिए संगत रही है।

गुरुद्वारा फतेहगढ़ साहिब से करीब पांच किलोमीटर के दायरे में सजे शहीदी जोड़ मेल में पहुंच रहे लाखों श्रद्धालुओं के लिए सैकड़ों लंगर लगाए गए हैं। लंगर लगाने के लिए विभिन्न गांवों से लोग एक सप्ताह पहले ही आने शुरू हो गए थे, ताकि पूर्ण व्यवस्था की जा सके। बड़ी संख्या में संगत शुक्रवार से ही पहुंचना शुरू हो गई थी और उन्हें लंगर छकाया जाना शुरू कर दिया गया था।

गुरुनानक देव जी ने लंगर प्रथा 20 से शुरू की थी
करनाल(हरियाणा) से आए एक सेवक कुलतार सिंह से जब शहीदी जोड़ मेल के तीनों दिन में लगने वाली रसद के बारे में पूछा तो, उन्होंने कहा कि यह गुरु का लंगर है, इसलिए इस सवाल का कोई अर्थ ही नहीं। गुरु नानक देव जी ने जो 20 रुपए लंगर में डाले थे, वह हम से कभी खत्म ही नहीं होंगे। वह तो हर पल लाखों, करोड़ों गुना बढ़ रहे हैं। संगत जितनी भी लंगर छकने के लिए आये तो वह कम ही है।

संगत को पकवानों का लालच देना ठीक नहीं
रूपनगर से आए बलविंदर सिंह ने कहा कि लंगरों में किसी भी तरह से कोई कमी नहीं, पर एक बात जरूर ठीक नहीं कि लंगरों के प्रबंधक स्पीकरों पर आवाज लगाकर संगत को विभिन्न पकवानों का लालच देते हैं, जोकि ठीक नहीं।

एक महीने पहले हो जाती तैयारियां शुरू
संगरूर जिले के दिड़बा से आने वाले गुरमुख सिंह ने कहाकि उन के यहां तो एक महीना पहले ही तैयारियां शुरू हो जाती हैं। बड़ी संख्या में महिलाएं और पुरुष लंगर में सेवा निभाते हैं। गुरमुख सिंह ने कहा कि उन्हें खुद लगातार पिछले 27 सालों से लंगर में सेवा करने का मौका मिल रहा है।

1 महीने पहले हो जाती है तैयारी शिरू।। 1 महीने पहले हो जाती है तैयारी शिरू।।
लंगर के लिए खाना बनाते लोग। लंगर के लिए खाना बनाते लोग।
लंगर में सेवा करते लोग। लंगर में सेवा करते लोग।
कढ़ाही धोते लोग। कढ़ाही धोते लोग।
बर्तन साफ करते लोग। बर्तन साफ करते लोग।
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इतने बड़े कड़ाहे हैं कि उसमें उतरकर साफ करना होता है।इतने बड़े कड़ाहे हैं कि उसमें उतरकर साफ करना होता है।
1 महीने पहले हो जाती है तैयारी शिरू।।1 महीने पहले हो जाती है तैयारी शिरू।।
लंगर के लिए खाना बनाते लोग।लंगर के लिए खाना बनाते लोग।
लंगर में सेवा करते लोग।लंगर में सेवा करते लोग।
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