अमृतसर

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एक दूसरे के खिलाफ पति-पत्नी तो कहीं बाप-बेटा बने उम्मीदवार

डमी कैंडीडेट- वार्ड 14 में जसपाल सिंह अकाली और पत्नी आजाद उम्मीदवार

Danik Bhaskar

Dec 17, 2017, 04:57 AM IST

पटियाला. नगर निगम चुनाव में पति-पत्नी, बाप-बेटा और देवरानी-जेठानी में भी टक्कर है। जी हां, इस चुनाव में ऐसे कई वार्ड हैं जहां चुनावी जंग के मैदान में ये सब रिश्ते एक दूसरे के खिलाफ तलवारें खींचे खड़े है। वार्ड 14 में अकाली उम्मीदवार जसपाल सिंह बिट्टू चट्ठा की पत्नी बलजिंदर कौर जिनका चुनाव चिह्न टेबल है, आजाद उम्मीदवार के तौर पर खड़ी है। इसी वार्ड में कांग्रेसी उम्मीदवार रचिन बांसल के पिता रमेश कुमार भी आजाद उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ रहे हैं। इसी तरह 15 नंबर वार्ड में अकाली उम्मीदवार हरमीत कौर सिद्धू की जेठानी इंद्रजीत कौर (चुनाव चिह्न बैट) चुनाव लड़ रही है।

असल में यह सब मुख्य उम्मीदवारों के कवरिंग कैंडीडेट्स हैं। जब मुख्य उम्मीदवार अपने कवरिंग कैंडीडेट्स के पेपर वापस नहीं लेता है तो ऑटोमैटिक कवरिंग कैंडीडेट आजाद उम्मीदवार के तौर पर मैदान में जाता है। इन सभी मुख्य उम्मीदवारों ने अपने अपने रिश्तेदारों के कवरिंग कैंडीडेट्स के तौर पर पेपर तो भरवाए, लेकिन आखिरी मौके पर उनके पेपर वापस नहीं करवाए। प्रशासन ने इन कवरिंग कैंडीडेट्स से बिना पू्छे उन्हें इलेक्शन सिंबल बांट दिए।

नाम वापस लेने वाले होते आजाद
जिन उम्मीदवारों ने अपने कवरिंग कैंडीडेट्स के पेपर वापस नहीं लिए, वो खुद खुद आजाद उम्मीदवार की कैटेगिरी में जाते हैं। प्रशासन की तरफ से उनके कागजों में भरे गए चुनाव चिन्ह के मुताबिक उन्हें सिंबल अलॉट हो जाते हैं। शौकतअहमद परे, एडीसी कम एडिशनल जिला चुनाव अधिकारी।

हकीकत : पोलिंग एजेंट ज्यादा बनें, इसलिए वापस नहीं लेते नाम
जानकारबताते हैं कि मुख्य उम्मीदवारों द्वारा इन डमी कैंडीडेट्स के पेपर वापस लेने का सबसे बड़ा कारण हैं वोटिंग वाले दिन अपने पोलिंग एजेंट्स की संख्या ज्यादा रखना। असल में एक उम्मीदवार के पोलिंग एजेंट्स की संख्या सीमित होती है। अब जब एक पति की पत्नी आजाद उम्मीदवार के तौर पर चुनाव मैदान में है तो वो अपने कोटे के पोलिंग एजेंट्स बूथ पर तैनात कर देती है। इस तरह एक उम्मीदवार के पोलिंग एजेंट्स बढ़ जाते हैं। इस चक्कर में उम्मीदवार डमी कैंडीडेट्स के पेपर आखिरी समय पर वापस नहीं लेते।

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