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पंजाब के छोटे और मझोले इंडस्ट्रियों से अपने उपकरण बनवाएगी भारतीय सेना

पहले विश्व युद्ध से लेकर अब तक की लड़ाइयों में अग्रणी भूमिका निभाई है, अब उसको सेना ने आयुध उपकरणों को बनाने का निमंत्रण

Danik Bhaskar | Dec 09, 2017, 07:22 AM IST

अमृतसर. पंजाब, जिसने पहले विश्व युद्ध से लेकर अब तक की लड़ाइयों में अग्रणी भूमिका निभाई है, अब उसको सेना ने आयुध उपकरणों को बनाने का निमंत्रण दिया है। इसके तहत सूबे के छोटे तथा मझोले इंडस्ट्रियों को पहल के आधार पर शामिल होने की बात कही गई है। देश की आजादी के बाद यह पहला मौका है जब भारतीय एयरफोर्स के जरिए यहां रणजीत एवेन्यू में पीएचडी चैंबर ऑफ कामर्स एंड इंडस्ट्री की तरफ से लगाए गए लगे पाइटैक्स मेले (पंजाब इंटरनेशनल ट्रेड एक्सपो) स्टाल और सेमिनार आयोजित करके यह पहल की गई है। एयरफोर्स के एयर मार्शल संजय शर्मा (एओसी आईएनसी मेंटिनेंस) ने बताया कि इंडस्ट्रलिस्टों को चाहिए कि वह एयरफोर्स की मांग को देखते हुए रक्षा उपकरणों का निर्माण करें। इससे देश रक्षा उपकरणों के क्षेत्र में आत्मनिर्भर हो सकेगा और लोगों को रोजगार भी मिलेगा। उनका कहना है कि अब वक्त आ गया है कि मेक इन इंडिया को बढ़ावा देते हुए टूल्ज, टेस्टर, ग्रांउड उपकरणों का निर्माण अपने ही देश में शुरू किया जाए। उनका कहना है कि वर्तमान हालातों में हम इस मामले में विदेशों पर निर्भर हैं। उन्होंने इंडस्ट्रलिस्टों से अपील करते हुए कहा कि इस तरह के सेमिनार और स्टाल लगाने का मुख्य मकसद एयरफोर्स के उपकरण निर्माण में उनकी भागीदारी को भागीदारी सुनिश्चित करना है। चैंबर के अध्यक्ष अनिल खेतान ने कहा कि एयरफोर्स की मांग को पूरी करने के लिए उद्योग जगत का मीडियम एंड स्माल एंड माइक्रो इंटरप्रेन्योरशिप (एमएसएमई) क्षेत्र अहम भूमिका निभा सकता है। चैंबर की पंजाब कमेटी के चेयरमैन आरएस सचदेवा ने सेमिनार में मौजूद सूबे के इंडस्ट्रलिस्टों को रक्षा क्षेत्र में उपकरण व टूल्ज आदि निर्माण क्षेत्र में आगे आने का आह्वान किया है।

देश में रह जाएगा 17,200 करोड़ का रक्षा बजट

एयरफोर्स अधिकारियों का कहना है कि यह पहल एयर फोर्स ने की है और इसके साथ ही नेवी तथा सेना भी इस तरफ कदम बढ़ा रही है। अधिकारियों की मानें तो इस वक्त देश का रक्षा बजट 86 हजार करोड़ रुपए का है। इसमें से 20 फीसदी यानी कि 17,200 करोड़ एमएसएमई के जरिए रक्षा उपकरण विदेशों से मंगाए जाते हैं। अगर इनको देश में तैयार किया जाए तो अपने लोगों को रोजगार तो मिलेगा ही बल्कि देश आत्मनिर्भर भी होगा। इसके तहत टूल्ज, टैस्टर, ग्रांउड उपकरणों का निर्माण किया जा सकेगा। इसमें शामिल होने के लिए उद्यमियों का सालाना टर्नओवर 5 से 50 करोड़ होना चाहिए। इसमें शामिल होने के बाद उद्यमी को सरकार की तरफ से स्टाल लगाने के लिए ढाई करोड़ रुपए की मदद भी दी जाती है।