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शहीद की बहन बोली- अभी संस्कार मत करना, भाई को आखिरी बार देखना चाहती हूं

शहीद की दो बेटियां नागमजीत (5) व गुनरीत (3) और 1 साल 10 महीने का बेटा जगदीश है।

Bhaskar News | Last Modified - Jan 02, 2018, 07:49 AM IST

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    शहीद की दो बेटियां और एक बेटा भी है।

    फिरोजपुर. नौशहरा सेक्टर में रविवार को पाक फायरिंग में शहीद हुए लोहगढ़ ठाकरां के जगसीर सिंह का सोमवार को संस्कार नहीं हो पाया। अॉस्ट्रेलिया में रह रही उनकी बहन पवनदीप कौर ने पिता अमरजीत सिंह को फोन कर भाई के आखिरी दर्शन करने तक संस्कार न करने को कहा था। मंगलवार को संस्कार किया जाएगा। शहीद की दो बेटियां नागमजीत (5) व गुनरीत (3) और 1 साल 10 महीने का बेटा जगदीश है।

    बेटे का जन्मदिन मनाने के लिए छुट्‌टी बढ़वाने 10 दिन पहले ड्यूटी पर गया था जगसीर सिंह

    राजौरी जिले के नौशहरा सेक्टर में एलओसी पर रविवार सुबह हुई पाक फायरिंग में शहीद हुए पंजाब-19 बटालियन का जवान जगसीर सिंह अपने बेटे का दूसरा जन्मदिन 27 फरवरी को धूमधाम से मनाना चाहता था। इसीलिए 22 दिसंबर को 10 दिन की छुट्टी काटकर अपने घर से 2 माह की छुट्‌टी बढ़वाने के लिए वापस ड्यूटी पर गया था। दो माह की छ़ुट्टी मंजूर हो गई थी सोमवार को उसे गांव के लिए निकलना था। जवान घर तो नहीं पहुंचा मगर साल के आखिरी दिन रविवार को उसकी शहादत की खबर जरूर पहुंची।

    लगभग दो हजार से ज्यादा आबादी वाले गांव में करीब 15 जवान भारतीय सेना में सेवा दे रहे हैं 7 जवान रिटायरमेंट के बाद घर चुके हैं। गांव की पहली शहादत पर जहां एक और गम का माहौल है वहीं शहीद जगसीर सिंह के परिवार वाले शहादत पर मान महसूस कर रहे हैं। 32 वर्षीय शहीद जवान जगसीर सिंह के एक भाई एक बहन है। छोटा भाई जसवीर सिंह 10 सालों से दुबई में रह रहा है छोटी बहन पवनदीप कौर भी आस्ट्रेलिया में रह रही है। भाई की मौत की खबर सुन विदेश में बैठी बहन के पैरों तले से जमीन निकल गई आपातकाल में उसने टिकट बुक करवाई भारत के लिए चल पड़ी। शहीद जवान की 7 साल पहले सुनेहरा निवासी महिंद्रपाल कौर से शादी हुई उससे उनके दो बेटियां एक बेटा है।

    दोस्त बोले...

    जगसीर के शहीद होने के बाद दोस्तों में मायूसी के साथ उसके साथ बीते हुए पलों को याद करके आंखें नम हो जा रही हैं छुट्‌टी पर आने के बाद दोस्तों के साथ बुलेट स्टंग बाइक राइडिंग करना आदि करता था। जगसीर सिंह बचपन से ही भारतीय सेना में भर्ती होकर देश की सेवा करने का लक्ष्य निर्धारित किए हुए था। शहीद की पत्नी महिंद्रपाल कौर रो-रोकर कह रही थी मुझे शनिवार रात को फोन पर कहा था कि छ़ुट्‌टी मंजूर हो गई है साग बनाकर रखना मैं सोमवार तक पहुंच जाऊंगा।

    शहीद जगसीर के बचपन के दोस्त गुरप्रीत सिंह का भी रो-रोकर बुरा हाल था गुरप्रीत बहरीन से एक माह की छुट्टी काटने के लिए गांव आया हुआ था तबीयत ठीक होने के कारण उसने अपनी टिकट कैंसिल करवा ली थी उसका कहना था कि मुझे क्या मालूम था कि मेरा जिगरी यार मुझे यूं छोड़कर चला जाएगा। उन्होंने बताया कि जगसीर हंसमुख मिलनसार था। उसे बाइक राइडिंग, बुलेट स्टंट पुराने गाने सुनने का शौंक था। गुरप्रीत ने बताया कि सूर सिंह वाला रोड़ पर कई बार जब वह बुलेट पर खतरनाक स्टंट करता तो बाकी साथी दांतों तले उंगली दबाते नजर आते थे। शहीद जगसीर ने नर्सरी से लेकर सीनियर सेकेंडरी तक की पढाई पास के गांव सूर सिंह वाला में ही पूरी की। वर्ष 2000 में बाहरवीं की पढाई पूरी करने के बाद अपने पिता अमरजीत सिंह के साथ खेतों में हाथ बंटाने लगा।

    वर्ष 2004 में उसे भारतीय सेना में नौकरी मिली

    सेना में भर्ती होने के बाद वह घर आता तो कुछ समय बाद ही घर में अपनी बुलेट, गाड़ी, ट्रैक्टर पशुओं की देख रेख में जुट जाता अपनी घर की 5 एकड़ जमीन में खेती के चलते कुछ दिन पूर्व ही शहीद जगसीर ने अपने पिता अमरजीत सिंह से कहा कि पिता जी अब आप घर में दूध के लिए एक भैंस रख लो बाकी सब पशु बेच दो अब इनकी आपसे इतनी संभाल नहीं होगी। 65 वर्षीय पिता अमरजीत सिंह सुन्न हो गए मां गुरमीत कौर फफक-फफक कर रो रही थी। शहीद अपने पीछे दो बेटियां नागमजीत 5 वर्ष गुनरीत 3 वर्ष एक बेटा जगदीश जिसकी उम्र एक वर्ष दस माह को पीछे छोड़ गया है। 27 फरवरी को बेटे जगदीश का दूसरा जन्मदिन धूमधाम से मनाने के लिए ही जगसीर जनवरी फरवरी माह की छ़ुट्टियां बढवाने के लिए ही वापस ड्यूटी पर गया था। मगर तकदीर में कुछ ही और ही लिखा था।

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    शहीद जसगीर सिंह की फाइल फोटो।
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    शहीद के परिजन।
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