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गृहमंत्री से मिलने पहुंची महिला, पिता को स्वाधीनता सेनानी बताते हुए मांगी पेंशन-नौकरी

राजनाथ सिंह ने कहा कि शहीद ऊधम सिंह उस युवा वर्ग का प्रतिनिधित्व करते हैं जो देश में परिवर्तन लाता है।

Danik Bhaskar | Mar 14, 2018, 07:19 AM IST
राजनाथ सिंह जैसे ही स्टेज पर पहुंचे, पहली कतार में बैठी रचना पिता की तस्वीरें उन्हें दिखाने लगी। राजनाथ सिंह जैसे ही स्टेज पर पहुंचे, पहली कतार में बैठी रचना पिता की तस्वीरें उन्हें दिखाने लगी।

अमृतसर. अपने पिता चुन्नीलाल को स्वाधीनता सेनानी बताने वाली छेहर्टा की रचना मंगलवार को केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह से मिलने जलियांवाला बाग पहुंची। रचना का कहना है कि आज तक उसे सरकार से कोई मदद नहीं मिली। उसकी मांग है कि दूसरे स्वाधीनता सेनानियों के परिवार की तरह उसके बेटे को भी सरकारी नौकरी, रहने के लिए मकान और मां कमलावंती के नाम पर पेंशन दी जाए।

राष्ट्रीय स्तर पर मनाया जाएगा जलियांवाला बाग का शताब्दी समागम : राजनाथ सिंह

13 अप्रैल 1919 के दिन जलियांवाला बाग में हुए भीषण नरसंहार की घटना के 100 साल पूरे होने पर केंद्र सरकार देश भर में इसे बड़े पैमाने पर मनाएगी। यह ऐलान केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने जलियांवाला बाग में मंगलवार को शहीद ऊधम सिंह के बुत के अनावरण के मौके पर किया। उन्होंने कहा कि शहीद ऊधम सिंह उस युवा वर्ग का प्रतिनिधित्व करते हैं जो देश में परिवर्तन लाता है। बर्तानवी हुकूमत ने बाग में 13 अप्रैल 1919 के दिन हमारे निहत्थों पर जो गोलियां चलवाई थी, उनका बदला उन्होंने 21 साल बाद लंदन में जाकर लिया।

केंद्र और सूबा सरकार के दावे कुछ और हकीकत कुछ ओर

बता दें कि 2019 को उक्त घटना की शताब्दी के रूप में मनाने के लिए केंद्र तथा सूबा सरकार कई दावे कर रही हैं। राज्य सभा मेंबर श्वेत मलिक ने इसके लिए केंद्र से पहल करके विगत में 10 करोड़ रुपए मंजूर करवाने का दावा किया था और उससे विकास का काम भी जारी है। इसके बाद स्थानीय निकाय मंत्री ने बाग में ही ऐलान किया था कि वह केंद्र सरकार से शताब्दी समागम की तैयारियों के लिए 100 करोड़ की मांग करेंगे। लेकिन बाग की स्थिति यह है कि यहां पर पिछले चार साल से लाइट एंड साउंड तथा डॉक्यूमेंट्री दिखाने वाला सिस्टम बंद पड़ा है। और तो और यहां का सीवरेज सिस्टम भी बंद ही रहता है। बाग की व्यवस्था देख गृहमंत्री ने खुद कहा कि जो विकास हो रहा है, वह पर्याप्त नहीं है। इसके सौंदर्यीकरण का काम भी केंद्र सरकार पहल के आधार पर करवाएगी।

एसजीपीसी ने उठाया लंगर से जीएसटी हटाने का मुद्दा, राजनाथ बोले- मांगों पर गौर करेंगे

राजनाथ सिंह के दरबार साहिब में माथा टेकने के उपरांत एसजीपीसी ने श्री गुरु रामदास लंगर समेत अन्य गुरुद्वारों के लंगर को जीएसटी मुक्त करने की मांग उठाई है। कमेटी के प्रधान भाई लोंगोवाल ने राजनाथ को एक मांगपत्र भी सौंपा। राजनाथ सिंह ने भरोसा दिया कि उनकी मांगों पर जल्द ही गौर किया जाएगा। राजनाथ सिंह ने विजिटर बुक में लिखा है कि मैं आज बहुत खुश हूं क्योंकि मुझे इस पावन स्थान के दर्शन का मौका मिला।

एसजीपीसी की ओर से की गई मांगें

- श्री गुरु नानक देव जी के 550वें प्रकाश पर्व के संदर्भ में पाकिस्तान स्थित जन्म स्थान करतार पुर साहिब तथा डेरा बाबा नानक के बीच रास्ता दिया जाए।
- बलवंत सिंह राजोआणा समेत अन्य सिख कैदियों को रिहा किया जाए।
- 3 कश्मीर के सिखों को अल्पसंख्यक का दर्जा देकर उन्हें सरकारी नौकरियों और सरकारी स्कीमों का हिस्सा बनाया जाए।
- 1984 के दौरान दरबार साहिब पर हुई सैनिक कार्रवाई के दौरान केंद्रीय सिख रेफ्रेंस लाइब्रेरी से सेना द्वारा उठाई गई किताबों व अन्य दस्तावेज वापस किए जाएं।
- गुरुद्वारा के लंगर को जीएसटी के अलग किया जाए।

बुत को तोड़ना संस्कृति का हिस्सा नहीं, कार्रवाई होगी

देश में बुतों को तोड़े जाने की घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए गृहमंत्री ने कहा कि बुतों को तोड़े जाने की घटनाएं हमारी न तो संस्कृति का हिस्सा हैं और ना ही इसे किसी भी तरह से इजाजत दी जा सकती है। राजनाथ सिंह ने कहा कि जिस तरीके से शहीद ऊधम सिंह कंबोज बिरादरी के होकर भी समूचे देश के हीरो हैं उसी तरह से दूसरे महापुरुष भी पूरे समाज व देश का हिस्सा होते हैं। उनका कहना है कि इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए सभी राज्य सरकारों को कहा गया है और अगर कोई दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई भी होगी।

ऊधम सिंह ने किसे मारा: बताने की जरूरत

जलियांवाला बाग नरसंहार का बदला लेने वाले ऊधम सिंह ने लंदन जाकर किसे गोली मारी? लोगों के साथ-साथ नेता-मंत्री भी इस पर फंस जाते हैं। मंगलवार को जलियांवाला बाग में शहीद ऊधम सिंह के बुत के अनावरण मौके पर यही हुआ। अकाली सांसद प्रेमसिंह चंदूमाजरा, कांग्रेसी विधायक राणा गुरमीत सोढी और दूसरे कई नेता बार-बार जनरल डायर (पूरा नाम -रेजिनाल्ड एडवार्ड हैरी डायर) का राग अलापते रहे। बाद में भाजपा सांसद विजय सांपला ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि ऊधम सिंह ने उस दौर के गवर्नर जनरल सर फ्रांसिस माइकल ओ,डवायर को मारकर नरसंहार का बदला लिया था। इतिहासकार भी मानते हैं कि सन १९४० में ओ' ड्वायर ऊधम सिंह की गोली से मरा वहीं गोलीबारी कराने वाले जनरल डायर की मौत १९२७ में बीमारियों के कारण हुई।

राजनाथ सिंह की नजर पड़ी तो उन्होंने स्टेज से ही इशारा किया कि वह उससे बाद में बात करेंगे। राजनाथ सिंह की नजर पड़ी तो उन्होंने स्टेज से ही इशारा किया कि वह उससे बाद में बात करेंगे।
प्रोग्राम के बाद राजनाथ सिंह सीधे जाने लगे। रचना ने जब भीड़ में से आवाज लगाई तो वह रुक गए। प्रोग्राम के बाद राजनाथ सिंह सीधे जाने लगे। रचना ने जब भीड़ में से आवाज लगाई तो वह रुक गए।
राजनाथ ने रुककर उसकी बात सुनी मगर रचना जब कोई सबूत पेश नहीं कर पाई तो वे चले गए। राजनाथ ने रुककर उसकी बात सुनी मगर रचना जब कोई सबूत पेश नहीं कर पाई तो वे चले गए।
मंच पर तलवार देकर राजनाथ सिंह का स्वागत किया गया। मंच पर तलवार देकर राजनाथ सिंह का स्वागत किया गया।
गोल्डन टेंपल पहुंचे राजनाथ सिंह। गोल्डन टेंपल पहुंचे राजनाथ सिंह।