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देश विदेश से लाखों श्रद्धालु पहुंचे यहां, सीएम ने किया गुरु का प्रसाद ग्रहण

कैप्टन ने फतेहगढ़ साहिब सब-डिविजन के 55 गांवों पर आधारित चनारथल को नई सब-तहसील बनाने का ऐलान किया।

Danik Bhaskar | Dec 27, 2017, 06:26 AM IST

फतेहगढ़ साहिब/चंडीगढ़. शहीदी जोड़ मेल के दूसरे दिन माथा टेकने सीएम कैप्टन अमरिंदर िसंह भी पहुंचे। उन्होंने लंगर छका और कुछ ऐलान कर चले गए। उनके बाद शिअद प्रधान सुखबीर बादल भी हाजिरी भरने पहुंचे।


कैप्टन ने फतेहगढ़ साहिब सब-डिविजन के 55 गांवों पर आधारित चनारथल को नई सब-तहसील बनाने का ऐलान किया। उन्होंने कहा, पटियाला से पनेआली तक नए राष्ट्रीय मार्ग का नाम माता गुजरी मार्ग रखने का प्रस्ताव भी नेशनल हाइवे अथॉर्टी को भेज दिया है। सरहिंद चो के किनारे पक्के करने के लिए 5.71 करोड़ मंज़ूर किए जा चुके हैं। रेलवे के साथ चल रहे मसले को हल कर लिया गया है। इसके अलावा फतेहगढ़ साहिब को टूरिस्ट प्लेस के तहत विकसित किया जाएगा। ऐतिहासिक स्थलों के विकास के साथ इसके सौन्यदर्यीयकरण के लिए एक विशेष योजना भी तैयार की है। उन्होंने सरहिंद में नया बस अड्डा बनाने का भी ऐलान किया।

अकाली दल (अ) ने ही सियासी कॉन्फ्रेंस की

सियासी कॉन्फ्रेंस सिर्फ शिअद (अ) ने की। पार्टी प्रधान सिमरनजीत सिंह मान ने कहा, कांग्रेस, शिअद (बादल), आप ने इसलिए सियासी स्टेजें नहीं लगाईं क्योंकि उनके पास न तो कुछ कहने को है और न ही पंथक एजेंडा है। अकाल तख्त साहिब से सियासी कॉन्फ्रेंस रद्द करवाने का एेलान इसलिए करवाया गया ताकि पार्टी की लोकप्रियता को रोका जा सके। इस मौके पर संपूर्ण सिख राज्य की स्थापना और बेअदबी के आरोपियों पर कानूनी कार्रवाई की मांग संबंधी प्रस्ताव पास किए गए।

झलकियां

- कैप्टन का उड़न खटोला सरकारी स्कूल के मैदान में उतरा। श्री गुरु ग्रंथ साहिब को अर्पित करने के लिए रुमाला तो लाए थे, लेकिन देग की थाली लिए सहयोगी पहले ही मौजूद रहे।
- दरबार साहिब में माथा टेकने के बाद गुरुद्वारा साहिब के हेड ग्रंथी भाई हरपाल सिंह ने उन्हें सिरोपा दे सम्मानित किया।
- भाई हरपाल सिंह ने कैप्टन को एक फाइल थमाई जिसमें सफर-ए-शहादत मार्ग को पूरा करने को फंड देने की मांग की।
- प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद सीएम गुरुद्वारा ठंडा बुर्ज की ओर जाने लगे तो वहां तैनात अधिकारी हड़बड़ा गए लेकिन वह लंगर में गए और सीढ़ियों पर बैठ लंगर छका।
- सीएम के जाते ही शिअद प्रधान सुखबीर बादल पहुंचे। उनके लिए भी सहयोगी देग की थाली उठाए खड़े रहे। फिर उन्होंने माथा टेका। उन्हें भी सिरोपा भेंट किया गया।
- प्रेस वालों ने उन्हें घेरने का प्रयास किया पर वह हाथ जोड़कर ‘नो’ कहकर लंगर की ओर चले गए।