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यूजीसी ग्रांट हुई बंद, रिसर्च के लिए अगले आदेशों तक विदेश नहीं जा पाएंगे लेक्चरर्स

कुछ स्कीमों पर अगले आदेशों तक यूजीसी ने रोक लगा दी है।

bhaskar news | Last Modified - Dec 04, 2017, 04:27 AM IST

  • यूजीसी ग्रांट हुई बंद, रिसर्च के लिए अगले आदेशों तक विदेश नहीं जा पाएंगे लेक्चरर्स
    फाइल फोटो


    अमृतसर. यूनिवर्सिटी ग्रांट कमिशन ने देश की यूनिवर्सिटीज को अन-असाइंड ग्रांट के नाम पर दी जाने वाली अनिर्धारित ग्रांट पर रोक लगा दी है। इससे यूनिवर्सिटी विभिन्न मदों में किए जाने वाले मनमर्जी के खर्च को आसानी से नहीं कर पाएगी। इससे यूनिवर्सिटी के साथ शिक्षकों को भी नुकसान होगा, क्योंकि वे रिसर्च के नाम पर देश-विदेश नहीं जा पाएंगे। गौरतलब है कि अधिक खर्च के कारण मिनिस्ट्री ऑफ फाइनांस ने यूजीसी को अपनी स्कीमें रिव्यू करने के आदेश जारी किए थे। जिसके बाद अब कुछ स्कीमों पर अगले आदेशों तक यूजीसी ने रोक लगा दी है।

    यूनिवर्सिटी अनुदान आयोग की तरफ से एक पब्लिक नोटिस जारी किया गया है। जिसमें कई स्कीमों को जारी रखने के आदेश हैं तो कुछ में संशोधन किए गए हैं। लेकिन कुछ स्कीमों को जारी रखा जाए या नहीं, इसके बारे में जानकारी नहीं है। यह नोटिस यूजीसी के सचिव पीके ठाकुर ने जारी किया है। इस नोटिस में सबसे बड़ा फैसला अन-असाइंड ग्रांट को बंद करने का है। इस ग्रांट के बंद करने से यूनिवर्सिटीज के मनमर्जी के खर्च पर रोक लग जाएगी। इस मद में यूनिवर्सिटी शोध, शिक्षा विकास के तहत होने वाले वे कार्य भी कर लेते थे, जिनके लिए फंड उपलब्ध नहीं हो पाता।

    अनअसाइंड ग्रांट के पैसों से ही विदेश जाते हैं शिक्षक
    अधिकतरयूनिवर्सिटीज अन असाइंड ग्रांट के तहत ही शिक्षकों को विदेश यात्रा पर भेजते हैं। देश-विदेश की यूनिवर्सिटीज में होने वाले शोध सेमिनार में शामिल होने के लिए शोधकर्ता प्रतिवर्ष जाते रहते हैं। उन्हें इसी ग्रांट के तहत फंड उपलब्ध करवा कर आने-जाने की व्यवस्था की जाती है। लेकिन अब यह व्यवस्था बंद है।

    केवल यूजीसी प्रोजेक्ट में ही होगी ट्रैवल ग्रांट
    यूनिवर्सिटी की तरफ से ट्रैवल ग्रांट के रूप में केवल यूजीसी प्रोजेक्ट के तहत ही फंड उपलब्ध करवाया जा सकेगा। यानी वे शिक्षक जो यूजीसी के किसी प्रोजेक्ट के तहत कार्य कर रहे हैं, वे ही ट्रैवल ग्रांट के लिए आवेदन कर सकेंगे। जो शिक्षक किसी प्रोजेक्ट से नहीं जुड़े, वे देश-विदेश में सेमिनार अटैंड करने के लिए ट्रैवल ग्रांट मद में राशि नहीं उठा सकेंगे।

    जीएनडीयू में बतौर वीसी ज्वाइन करने सेे पहले मैं यूजीसी में ही सेवाएं दे रहा था। यूजीसी को हर साल 1200 करोड़ रुपए के करीब राशि खर्च करने के लिए मिलती है, लेकिन खर्च उससे अधिक हो जाता है। ऐसे में फाइनांस विभाग ने यूजीसी को स्कीमें रिव्यू करनेेे के लिए कहा है। अभी रिव्यू प्रक्रिया चल रही है। रिव्यू के बाद स्कीमें दोबारा शुरू होंगी। डॉ.जसपाल संधू, वीसी, गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी

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Web Title: Lectures Can Not Go Abroad
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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