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गोविंदा के किरदार को 31 सालों से असल जिंदगी में जी रहे ये शख्स, दिल को छू गया था नाम

उन्हीं की तरह अभिनय करते ही हैं और रहन-सहन यहां तक कि पहरावा भी गोविंदा से प्रेरित है।

Danik Bhaskar | Dec 20, 2017, 06:50 AM IST
आर्केस्ट्रा आर्टिस्ट गोविंंदा यानी विद्यासागर आर्केस्ट्रा आर्टिस्ट गोविंंदा यानी विद्यासागर

अमृतसर. अभिनेता अपनी कला से सिर्फ लोगों का मनोरंजन ही नहीं करते, बल्कि वह सामाजिक सरोकारों और मुद्दों के साथ आम आदमी की जिंदगी पर भी असर डालते हैं। इसी का जीता-जागता सबूत हैं बहुआयामी कला के धनी गोविंदा, जिनके प्रभाव में आकर ग्वालमंडी के विद्यासागर खुद गोविंदा बन बैठे। विद्यासागर तीन दशकों से उन्हीं की तरह से अभिनय करते ही हैं और रहन-सहन यहां तक कि पहनावा भी गोविंदा से प्रेरित है।


मुफलिसी में पला कलाकार
कलाकार छोटा हो या बड़ा वह संवेदनशील जरूर होता है। ग्वालमंडी में रहने वाले विद्यासागर में भी बचपन से ही कला और संवेदना का पुट था। पिता सरदारी लाल और माता कौशल्या देवी की कोख की संतान विद्यासागर आर्थिक मुश्किलों के कारण सिर्फ दसवीं तक पढ़ाई कर पाए। इसके बाद शादी-विवाह में होने वाले प्रोग्रामों में शिरकत करके कॉमेडी तथा डांस आदि से लोगों का मन बहलाने लगे।


इससे उनकी रोजी-रोटी चलने के साथ-साथ शौक भी पूरा हो जाता था। उनके भीतर का कलाकार आहिस्ता-आहिस्ताप्रौढ़ होता गया और वह आर्केस्ट्रा के एक स्थापित कलाकार बन गए। दो बच्चों के पिता विद्यासागर को गोविंदा बन कर जिंदगी व्यतीत करते हुए 31 हो चले हैं। उम्र भी 45 साल को पार कर चुकी है, लेकिन उनकी हरेक पेशकारी में गोविंदा का ही अक्स नजर आता है।

स्टेज पर आते ही लोग गोविंदा-गोविंदा कह कर तालियां और सीटियां बजाते हैं। उनके प्रशंसकों का कहना है कि भले ही अब असल गोविंदा का रूपहले पर्दे पर वह क्रेज नहीं है, लेकिन गोविंदा को जीने वाले विद्यासागर उसे आज भी स्टेजों पर कायम रखे हुए हैं।


वह 20 सालों से गोविंदा सभ्याचारक ग्रुप बना कर शादी-विवाह या अन्य सांस्कृतिक आयोजनों के जरिए पंजाब, हिमाचल, चंडीगढ़, हरियाणा तक में गोविंदा के रूप में शोहरत बटोर रहे हैं।

गोविंदा नाम पड़ा तो यह मान दिल को छू गया

विद्यासागर बताते हैं कि 1986 में गोविंदा की फिल्म आई “इल्जाम’। इस फिल्म का गीत आईएम स्ट्रीट डांसर... खूब मकबूल हुआ और वह आर्केस्ट्रा पार्टियों का पसंदीदा गीत बन गया। इस गीत से वह भी काफी प्रभावित हुए। इसके बाद गोविंदा का वही स्वरूप धारण किया। वैसे ही कपड़े, बूट और हेयर स्टाइल भी तैयार कर ली।

स्टेज पर जब पहुंचते तो उनकी पेशकारी और हावभाव से लोग उनको गोविंदा की तरह से सम्मान देने लगे। रही-सही कसर गोविंदा जी की उसी साल आई फिल्म 'लव 86’ जिसके गीत ओ मिस दे दे किस आया है 86...को भी उन्होंने खूब भुनाया। इसके बाद उनका नाम ही गोविंदा पड़ गया। लोगों द्वारा मिला यह मान दिल को छू गया और उन्होंने अपना पुराना नाम भुला खुद को गोविंदा के रूप में स्थापित कर लिया।