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मेयर की कुर्सी के लिए जोर आजमाइश शुरू, सिद्धू- वेरका सीएम से मिलने पहुंचे चंडीगढ़

विधायक सुनील दत्ती की भाभी ममता दत्ता मेयर बनने की दौड़ में शामिल हैं।

Satish Sharma | Last Modified - Dec 19, 2017, 06:03 AM IST

  • मेयर की कुर्सी के लिए जोर आजमाइश शुरू, सिद्धू- वेरका सीएम से मिलने पहुंचे चंडीगढ़

    अमृतसर.नगर निगम चुनाव के नतीजे आते ही मेयर की कुर्सी के लिए जोर आजमाइश शुरू हो गई है। लोकल बाडीज मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू और विधानसभा हलका पश्चिमी से विधायक डा. राजकुमार वेरका सोमवार को चंडीगढ़ में मुख्यमंत्री से मिलने के लिए गए हैं।

    फिलहाल मेयर के नाम को लेकर विचार-विमर्श का सिलसिला शुरू हो चुका है, हालांकि इस बारे में कोई भी फैसला लिए जाने से पहले सभी विधायकों की रायशुमारी भी लिए जाने की बात कही जा रही है। निगम की कमान सीधे अपने हाथों में रखने के लिए अपने-अपने रिश्तेदारों और नजदीकियों को मेयर बनाने के लिए विधायकों में रस्साकशी का खेल शुरू हो चुका है।

    राजकंवलप्रीत लक्की :

    पिछले नगर निगम चुनाव में कांग्रेस के सिर्फ चार पार्षद जीते थे। उस समय लक्की को सबसे अधिक वोट मिले थे, जिसके बाद उन्हें निगम में विपक्ष का नेता बनाया गया था। वर्ष 2007 में उनकी भुआ कश्मीर कौर कांग्रेस से पार्षद बनीं थी और इसके बाद लक्की अब दूसरी बार पार्षद बने हैं।

    करमजीत सिंह रिंटू :

    वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव में विधानसभा हलका नार्थ से भाजपा के अनिल जोशी से हारे थे। इसके बाद वर्ष 2017 में उन्हें पार्टी ने टिकट न देकर सुनील दत्ती को उम्मीदवार बनाया था। अब निगम चुनावों में वह वार्ड नंबर 12 से 4779 वोटों से जीत कर पहली बार पार्षद बने हैं। इससे पहले उनकी माता ओंकार कौर वर्ष 2002 और 2007 में पार्षद रह चुकी हैं।

    दमनदीप सिंह :

    दमनदीप की माता चरणजीत कौर 2007 में कांग्रेस की टिकट पर पार्षद बनीं थीं। इसके बाद दमनदीप भाजपा में चले गए थे और वर्ष 2012 में भाजपा की टिकट पर जीते थे। अब लोकल बाडीज मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू के साथ कांग्रेस में आए और वार्ड नंबर-26 से पहली बार खुद पार्षद बने हैं।

    जीत सिंह भाटिया :

    वर्ष 2002 में कांग्रेस की टिकट पर पार्षद बने, उसके बाद 2007 कांग्रेस और 2012 में कांग्रेस से खफा होने के बाद उनकी बहु सिमरप्रीत कौर भाजपा की तरफ से सीट पर लड़ कर पार्षद बनीं थीं। इसके बाद अब जीत सिंह भाटिया दोबारा से कांग्रेस की तरफ से कांग्रेस की टिकट पर चुनाव जीत कर पार्षद बने हैं।

    यूनुस कुमार :

    वर्ष 2002 में आजाद चुनाव जीत कर पार्षद बने और कैप्टन अमरेंद्र सिंह की हाजरी में कांग्रेस ज्वाइन की। फिर 2007 में कांग्रेस की तरफ से लड़े, 2012 में उनकी पत्नी नरेश कुमारी पार्षद बनीं और 2017 में अब वह खुद पार्षद बने हैं।

    रमन बख्शी :

    वर्ष 2007 में कांग्रेस की टिकट पर चुनाव लड़ पार्षद बने थे। इसके बाद 2012 में चुनाव हारने के बाद अब दूसरी बार पार्षद बने हैं। वह विधायक डा. राजकुमार वेरका और विधायक सुखबिंदर सिंह सरकारिया के नजदीकी माने जाते हैं।

    विधायकों के ये रिश्तेदार कतार में

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