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पाक हिंदूओं ने इसलिए दोबारा हिन्दुस्तान आने से की तौबा, अस्थि विसर्जन करने आए थे

5 दिन के वीजे पर पाकिस्तानी हिंदुओं का जत्था सोमवार को देर शाम अमृतसर पहुंचा, वीजा अवधि कम होने के कारण नाराज।

Bhaskar News | Last Modified - Feb 14, 2018, 05:48 AM IST

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    पाकिस्तान से अपनी माता की अस्थियां हरिद्वार में विसर्जन करने के लिए भारत पहुंचे हिंदू अपनी व्यथा सुनाते हुए।

    अमृतसर.पाकिस्तान के विभिन्न राज्यों से दर्शन-दीदार को हिंदोस्तान पहुंचे हिंदुओं को पुलिस वेरीफिकेशन के लिए मंगलवार दिन भर धक्के खाना पड़ा। हालात यह रहे कि शाम को उनके सब्र का प्याला छलका और उनकी पीड़ा आंसुओं तथा आक्रोश के जरिए फूट पड़ी। इनका कहना है कि वे हिंदोस्तान को अपना मुल्क ही नहीं बल्कि बुजुर्गों की जमीन समझते हैं लेकिन यहां आने के लिए उनको न तो मांग के मुताबिक वीजा दिया जाता है और न ही यहां आने पर सही तरीके से ट्रीट किया जाता है। 15 दिन का वीजा है बाकी के लोगों का...

    - श्री गुरु सेवा वेलफेयर सोसायटी ट्रस्ट के प्रधान मुकेश राणा के नेतृत्व में कराची, सिंध, लाहौर, बलोचिस्तान आदि इलाकों से महिला, पुरुष, बच्चे तथा बुजुर्गों का 143 सदस्यीय दल सोमवार को यहां आया हुआ है।

    - इन लोगों की यही शिकायत है कि पहला दिन उनका बार्डर पर निकल गया और दूसरा पुलिस की खानापूर्ति में, जबकि पहले सिर्फ जत्था लीडर ही वेरीफिकेशन के लिए जाता था लेकिन इस बार सभी को जाना पड़ा।

    - राणा का कहना है कि उनके साथ आए 98 लोगों का 15 दिन का वीजा है बाकी के लोगों का सिर्फ पांच दिन का। हालांकि वीजा इंडिया के लिए मांगा गया था लेकिन अंबेसी ने सिर्फ अमृतसर का दे दिया।

    काशी जाकर हवन-यज्ञ करना था

    - बलोचिस्तान से आए दर्शन दास, जिनकी दादी राजस्थान तथा दादा काशी से थे, ने बताया कि उनके बुजुर्गों ने काशी जाकर हवन-यज्ञ करने को कहा था।

    - वे पहली बार यहां आए हैं लेकिन वीजा अमृतसर का ही दिया गया वह भी सिर्फ पांच दिन का।

    - कराची से अपनी मां की अस्थि लेकर आई सामिया स्वामी ने बताया कि वह हरिद्वार में अस्थि विसर्जन के लिए आई थीं लेकिन वीजा अवधि कम होने तथा इसे अमृतसर तक सीमित करने के कारण नहीं लगता कि विसर्जन हो सकेगा। - इस जत्थे में चार अस्थियां लेकर लोग आए हैं। कालेराम ने कहा कि वे अब दोबारा नहीं आएंगे।

    - वह कहते हैं कि यहां आकर बच्चों का अपने धर्म से जुड़ाव होता है लेकिन यहां की स्थिति देख वह वापस जाकर धर्म परिवर्तन कर लेंगे।

    हमारी यात्रा अधूरी रह गई
    सरहद पार से आई महिलाओं लीला, अंजुला, लक्ष्मी, कांता बाई आदि तो इतनी परेशान थीं कि रो पड़ीं। उन्होंने कहा कि वीजा मांग मुताबिक न मिलने के कारण उनकी यात्रा अधूरी रह गई है। इन्होंने विदेश मंत्री सुषमा स्वराज से मांग की है कि उनका वीजा बढ़ाया जाए और उसे हरिद्वार, काशी, पुष्कर के लिए भी किया जाए।

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    पाकिस्तान से अपनी माता की अस्थियां हरिद्वार में विसर्जन करने के लिए भारत पहुंचे हिंदू अपनी व्यथा सुनाते हुए।
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    पाकिस्तान के कराची से श्री दुर्ग्याणा तीर्थ में पहुंचे हिंंदू जत्थे के सदस्य अपना सामान लेकर बीबी धनवंत कौर सराय में जाते हुए।
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    देर होने के कारण लोग हरिद्वार नहीं जा पाए।
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    किसी को 15 दिन तो किसी को 5 दिन का वीजा दिया गया था।
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Web Title: Pak Hindus Who Came To Immerse Bone In Haridwar
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