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रिश्वत की डिलिवरी लेने जेल से बाहर गया हत्यारोपी कैदी, सुपरिंटेंडेंट बोले-गलती से चला गया

कैदी का खुलासा- सुपरिंटेंडेंट हर कैदी से लेता है 10 हजार प्रति माह

Danik Bhaskar | Dec 20, 2017, 06:56 AM IST
डेमोफोटो डेमोफोटो

बठिंडा. प्रदेश की नाभा और पटियाला जेल के कैदियों की ओर से लश्कर-ए-तैयबा के आतंकियों के साथ मोबाइल में बातचीत के मामले में कोर्ट के आदेश पर उक्त जेल के अफसरों के खिलाफ शुरू हुई जांच का मामला अभी ठंडा नहीं हुआ था कि मानसा जेल के कैदियों को ही जेल में सुविधाओं देने की एवज में रिश्वत की राशि की डिलिवरी लेने को जेल अफसरों ने जेल के वेलफेयर अफसर के साथ मर्डर केस में उम्रकैद की सजा काट रहे कैदी को ही जेल से बाहर भेज दिया।

इस मामले में विजिलेंस ने जहां रिश्वत लेने के आरोप में मानसा जेल के वेलफेयर अफसर सिकंदर सिंह और कैदी पवन कुमार और डिप्टी जेल सुपरिंटेंडेंट के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। वहीं डीआईजी जेल ने भी जेल से बाहर गए कैदी के मामले में जांच रिपोर्ट बनाकर कार्रवाई के लिए एडीजीपी जेल को भेज दी है। बता दें कि प्रदेश में ये तीसरी जेल है जिसके खिलाफ उच्चाधिकारियों की ओर से जांच शुरू कर दी गई है। वहीं रिश्वत लेने गए कैदी के जेल से बाहर जाने के मामले में मानसा जेल सुपरिंटेंडेंट दविंदर सिंह रंधावा का बयान बड़ा ही हैरान करने वाला था, उनका कहना है कि कैदी वेलफेयर अफसर के साथ कैंटीन की सफाई करते हुए गलती से बाहर चला गया।

यह था मामला- विजिलेंस ने शिकायत पर लगाया ट्रैप

मानसा जेल में बीड़ी, जर्दा, मोबाइल का प्रयोग करने और मनपसंद बैरक में रहने आदि सुविधाओं के लिए कैदियों की ओर से एक कैदी के खाते में जमा करवाई 86 हजार के करीब राशि वसूलने और 50 हजार रुपए रिश्वत लेने के मामले में विजिलेंस ने 18 दिसंबर को ट्रैप लगाकर जेल से बाहर कैदी पवन कुमार और जेल वेलफेयर अफसर सिकंदर सिंह को रंगे हाथों पकड़ा था। कैदी गौरव के खाते में आई हजारों रुपए की राशि के बारे में जब डिप्टी जेल सुपरिंटेंडेंट को पता चला तो उसने मामला दबाने के लिए 86 हजार के अलावा एक लाख रिश्वत मांगी। नहीं देने पर प्रताड़ित करना शुरू कर दिया और उसके साथ मारपीट की गई। जिसकी वीडियो भी कैदी ने ही विजिलेंस को दी थी। विजिलेंस ब्यूरो रेंज बठिंडा ने जेल सुपरिंटेंडेंट गुरजीत सिंह बराड़ के खिलाफ भी केस दर्ज किया है। वह अभी पकड़ से बाहर है। एसएसपी विजिलेंस जगजीत सिंह भुगताना का कहना था कि आरोपी डिप्टी सुपरिंटेंडेंट को काबू करने के लिए टीमें लगातार रेड कर रही हैं।

सुविधाओं के बदले भरोसे वाले कैदियों से ली जाती है रिश्वत

मानसा जेल में नशा तस्करी के मामले में 12 साल की सजा काट रहे कैदी गौरव जो 10 महीने से जेल में बंद है के भाई रविंदर कुमार ने विजिलेंस को दिए बयान में आरोप लगाया था कि उसके भाई गौरव ने उसे मोबाइल पर बताया था कि जेल सुपरिंटेंडेंट गुरजीत सिंह बराड़ कैदियों को उनकी इच्छा मुताबिक टोली वाइज बैरकों में बंद रखने और जेल के अंदर मोबाइल समेत अन्य सुविधाएं देने के बदले प्रत्येक से 10 हजार महीना रिश्वत लेता था। भरोसे वाले कैदियों से ये रिश्वत नकद ले ली जाती है और अन्य से भरोसे वाले कैदियों के बैंक खातों में जमा करवाली जाती है। डिप्टी सुपरिंटेंडेंट ने ये जिम्मेदारी जेल वेलफेयर अफसर सिकंदर सिंह और मर्डर केस में उम्रकैद काट रहे कैदी पवन को सौंपी थी।

बिना मंजूरी जेल से बाहर नहीं जा सकता कैदी
जेल अधिकारियों के अनुसार जेल के नियमों के मुताबिक जेल में कोई भी कैदी न तो मोबाइल रख सकता है और न ही प्रयोग कर सकता है और न ही बिना परमिशन लिए जेल से बाहर जा सकता है। लेकिन मानसा जेल में कैदी गौरव और पवन ने फोन का प्रयोग किया और रिश्वत लेने के लिए कैदी पवन कुमार वेलफेयर अफसर के साथ बाहर चला गया। जिसमें जेल सुपरिंटेंडेंट की देखरेख भी सवालों के घेरे में आ गई है।

वेलफेयर अफसर के साथ गया था
जेल सुपरिंटेंडेंट दविंदर सिंह ने बताया कि कैदी पवन कैंटीन की सफाई करने के संबंध में वेलफेयर अफसर सिकंदर सिंह के साथ गया था जो गलती से बाहर चला गया। उन्होंने कहा कि सरकार से मंजूरी लिए बिना कोई भी कैदी बाहर नहीं जा सकता। जब पूछा गया कि क्या परमिशन ले रखी थी, तो उनका कहना था कि नहीं। ये तो गलती से चला गया था।

कोई भी कैदी जेल से बाहर बिना परमिशन के नहीं जा सकता। मानसा जेल में कैदी के जेल से बाहर जाने के मामले में मैंने जांच रिपोर्ट एडीजीपी जेल को कार्रवाई के लिए भेज दी है।- लखविंदर जाखड़, डीआईजी जेल।