अमृतसर

--Advertisement--

खूनदान के लिए कोई उम्र नहीं होती, किसी की जान बचाने की खुशी बयां नहीं की जा सकती

मिसाल- 81 साल की उम्र में नए साल के आगमन पर आज 55वीं बार करेंगे रक्तदान

Danik Bhaskar

Jan 01, 2018, 05:28 AM IST

अमृतसर. खूनदान की कोई उम्र नहीं होती। अगर आप दिमागी तौर पर तंदुरुस्त और शारीरिक तौर पर फिट हैं तो किसी भी उम्र में खून दिया जा सकता है। यह कहना है 54 बार रक्तदान कर चुके 81 वर्षीय रोटेरियन बीएम सिंह का। हर साल 1 जनवरी को रेलवे अस्पताल में रोटरी क्लब की मदद से वह खूनदान कैंप लगाते हैं और रक्तदान करने वाले पहले वालंटियर भी वह खुद ही होते हैं।

बीएम सिंह ने बताया कि 1973 को वह अपने दोस्त से मिलने लुधियाना के एक अस्पताल में गए। वहां खूनदान कैंप लगा हुआ था। वह पहली बार था, जब उन्होंने खूनदान किया। वो अहसास खुशी देने वाला था। उसके बाद तय कर लिया कि अब हर साल अपने जन्मदिन पर खूनदान करेंगे। 31 दिसंबर को रेलवे अधिकारियों की पार्टी थी। मन बनाया कि अब हर साल नए साल को भी खूनदान करेंगे। इसके बाद धीरे-धीरे उनके साथ लाेग जुड़ते गए और 1 जनवरी को हर साल खूनदान कैंप लगने लगा। इस साल 1 जनवरी 2018 को 28वां कैंप लग रहा है। 1995 में वह रेलवे से सीनियर सिविल इंजीनियर के पद से रिटायर हुए, लेकिन ब्लड डोनेशन कैंप लगाना बंद नहीं किया। अब कुछ सालों से रोटरी क्लब भी उनके इस प्रोजेक्ट में साथ जुड़ चुका है।

हरवालंटियर है डॉक्टर
बीएमसिंह ने कहा कि डॉक्टर की कोशिश हर मरीज को बचाने की होती है, इसी तरह खूनदान करने वाला भी किसी अज्ञात की जिंदगी बचाने का ही प्रयास करता है। ऐसे में हर वालंटियर डॉक्टर है। इन्हीं शब्दों के साथ वालंटियर्स को मोटिवेट किया जाता है। पहले 40-45 ही वालंटियर्स होते थे। अब यह गिनती 65 तक पहुंच चुकी है।


बीएम सिंह ने ‘फेयरवैल टू फेयर’ फेड एंड फैंटेसी’ शीर्षक से किताब भी लिखी है। जल्द ही वह उसका विमोचन करने वाले हैं। इस किताब को उन्होंने कोलकत्ता से प्रिंट करवाया है। हर किताब से मिलने वाले प्रोफिट का इस्तेमाल अंगहीनों की मदद के लिए करेंगे।


बीएम सिंह ने अपने घर में मदर टेरेसा, तस्लीमा नसरीन और मलाला यूसुफजई की तस्वीर लगा रखी है। इन्हीं के जीवन से प्रभावित होकर उन्होंने समाज सेवा करने का प्रण लिया।

Click to listen..