--Advertisement--

यहां हर घर के बाहर लगी है लेडीज के नाम की प्लेट, वाइफ के नाम से आते हैं लेटर

गांव के लोग अब पत्र व्यवहार के लिए भी पुरुषों की जगह महिलाओं के नाम को प्राथमिकता दे रहे हैं।

Danik Bhaskar | Jan 08, 2018, 05:06 AM IST

बठिंडा. शहर के पास के गांव हिम्मतपुरा पंजाब का पहला गांव है, जहां हर घर के बाहर महिलाओं के नाम की नेम प्लेट लगी हैं। महिलाओं को सम्मान देने और पंजाब पर लगे कुड़ीमार के कलंक को धोने के लिए इस गांव में खास अभियान शुरू किया गया है। गांव के लोग अब पत्र व्यवहार के लिए भी पुरुषों की जगह महिलाओं के नाम को प्राथमिकता दे रहे हैं।

ग्रामीण विकास अधिकारी परमजीत सिंह ने ये योजना तैयार की है। जब उन्होंने गांव की सरपंच मलकीत कौर से शेयर की तो उन्होंने सहमति दे दी। पंचायत के साथ इलाके के लोगों ने दिन-रात काम शुरू किया। गांव के हर वार्ड का पूरा नक्शा गली के बाहर लगाया गया और इसमें मकान नंबर भी अंकित किया गया है ताकि किसी को घर तलाशने में दिक्कत हो। साथ हर घर के गेट के आगे परिवार की सबसे अधिक उम्र की महिला के नाम की तख्ती भी लगाई गई है। यही नहीं इस गांव में हर लड़की को स्कूल भेजना जरूरी है जबकि गरीब परिवारों को आर्थिक सहायता मदद दी जाती है। इस समय गांव में करीब 55 फीसदी महिला वोटर हैं पांच सदस्यीय पंचायत में तीन महिलाएं शामिल हैं। गांव में ग्राम सभा का समय-समय पर आम इजलास होता है, जहां दो या दो से अधिक लड़कियों वाली महिलाओं का सम्मान किया जाता है, गत दिनों आयोजित समागम में 8 महिलाओं को सम्मानित किया गया।

महिला दिवस के लिए 50 हजार का बजट
महिलाओं के सम्मान के लिए पंचायत ने महिला दिवस के लिए अलग 50 हजार का बजट रखा है। इस दिन जहां महिलाओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक किया जाता है। वहीं इस साल मनाए जाने वाले महिला दिवस को लेकर पहले से ही योजना तैयार कर ली गई मेडिकल कैंप भी लगाए जाएंगे। डीसी दीप्रवा लाकडा़ ने बताया, बेटियों को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करने उन्हें सम्मान देने के लिए पंचायत के साथ अधिकारियों की तरफ से उठाए जा रहे कदमों की सराहना की जानी चाहिए। इसमें प्रशासन की तरफ से हरसंभव सहयोग दिया जाएगा।

लोहड़ी भी लड़कियों को समर्पित
पंच इंद्रजीत कौर ने कहा, पंचायत ने हर साल लोहड़ी को लड़कियों को समर्पित करने का फैसला किया है। इसके तहत धीयां दी लोहड़ी मनाया करेगी। वहीं पंजाब का यह दूसरा गांव है, जहां सोकपिट बन रहे हैं ताकि जो निकासी पानी को फिर धरती में डाल कर प्रयोग में लाया जा सके। पूरे गांव में जगह-जगह सामाजिक बुराइयों से सुचेत करने के लिए भी नारे लिखे गए हैं।