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संसार में कोई तो है जो मनुष्य के सुख-दुख को सुनता है

चिन्मय मिशन अमृतसर की ओर से करवाए जा रहे संगीत प्रवचन-यज्ञ के चौथे दिन गोवा के आचार्य पूज्य स्वामी सुघोशानंद जी ने...

Dainik Bhaskar

Apr 01, 2018, 02:00 AM IST
संसार में कोई तो है जो मनुष्य के सुख-दुख को सुनता है
चिन्मय मिशन अमृतसर की ओर से करवाए जा रहे संगीत प्रवचन-यज्ञ के चौथे दिन गोवा के आचार्य पूज्य स्वामी सुघोशानंद जी ने भक्तियोग के रूपों में से एक भगवान की लीलाओं का श्रवण और दर्शन पर चिंतन करवाया। स्वामी ने भगवान श्री कृष्ण के अवतरण के कारणों पर विचार किया। उन्होंने कहा कि पृथ्वी मां के लिए पाप और अत्याचारों का भार जब असहनीय हो गया तो उन्होंने आर्त होकर भगवान विष्णु से अपनी व्यथा कही। भगवान ने उन्हें वचन दिया कि इस भार को कम करने के लिए वे अवतार लेंगे।

स्वामी जी ने कहा कि जो लोग कहते हैं कि भगवान है ही नहीं। भगवान के साथ अपना कोई संबंध नहीं मानते तो जरा सोचो कि वह अपने भीतर की स्थिति किसके साथ सांझा करेंगे। इसलिए यह मानना चाहिए कि कोई तो है जो उनके सुख-दुख को सुनता है। अनाथ जैसी स्थिति तो बहुत भयानक होती है, तो अपने वचनानुसार भगवान ने कंस और अन्य कितने ही दुराचारियों का उद्धार करने के लिए देवकी वसुदेव के घर अवतार लिया। भगवान के दिव्य रूप के दर्शन करके देवकी और वसुदेव तो अपनी सुध भूल गए। वहीं मां यशोदा और नंद बाबा को अपनी बाल लीलाओं का आनंद लेने के अवसर दिए। भगवान के अवतरण पर हर दिन उत्सवी दिन होता है। गोकुल में हर दिन भगवान के बालरूप के आनंद संस्कार होने लगे। कंस की व्याकुलता बढ़ने लगी और भगवान तो ऐसे करुणामयी हैं कि पापी और अत्याचारी का भी बुरा नहीं करते उनका भी उद्धार ही करते हैं। महाराज ने मां यशोदा द्वारा भगवान को सुलाना, गोप-गोपियों के संग खेलना, माखन चोरी के बहाने उनका मन ही चुरा लेना, होली मनाना, आदि प्रसंगों के साथ सभी को भाव विभोर कर दिया। गुरुदेव की आरती के साथ की चौथे दिन की कथा का समापन हुआ। इस दौरान मिशन अमृतसर के अध्यक्ष अविनाश महेंद्रू, जीएनडीयू हिंदी विभाग के पूर्व प्रो. एचएस बेदी, समाज सेविका स्वराज ग्रोवर, अनिल सिंघल समेत कई लोग मौजूद थे।

रणजीत एवेन्यू ई ब्लाक अमृत आश्रम में करवाए जा रहे धार्मिक समारोह के दौरान दीप प्रज्जवलित करतीं समाज सेविका मैडम स्वराज ग्रोवर और अन्य।

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