Hindi News »Punjab »Amritsar» 13 साल की मनप्रीत का कम्युनिटी स्कूल : अब तक 27 को बना चुकी साक्षर

13 साल की मनप्रीत का कम्युनिटी स्कूल : अब तक 27 को बना चुकी साक्षर

बॉर्डर से लगते अजनाला के गोपाल नगर में पैदा हुई मनप्रीत कौर 13 साल की उम्र में 27 लोगों को साक्षर बना चुकी है। इस समय वह...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 02, 2018, 02:00 AM IST

बॉर्डर से लगते अजनाला के गोपाल नगर में पैदा हुई मनप्रीत कौर 13 साल की उम्र में 27 लोगों को साक्षर बना चुकी है। इस समय वह 6 महिलाओं के अलावा छोटी बच्चियों के लिए ‘कम्युनिटी स्कूल’ चला रही है। उसके इन्हीं प्रयासों के बूते, 28 मार्च को उसे दिल्ली में डीएचएलएफ प्रेमेरिका के 8वें एनुअल स्पिरिट ऑफ कम्युनिटी अवार्ड्स में सिल्वर मेडल से नवाजा गया। इस अवॉर्ड के लिए देशभर से 25 लोग चुने गए और इनमें पंजाब से मनप्रीत इकलौती थी।

कर्नाटक-दिल्ली की दो लड़कियों को गोल्ड मेडल के बाद इस अवॉर्ड में तीसरे नंबर पर रही मनप्रीत बताती हैं, ‘जब 11 साल की थी तो एक दिन स्कूल में पेरेंट्स-टीचर मीटिंग (पीटीएम) में सहेलियों के पेरेंट्स रजिस्टर पर साइन कर रहे थे। वहां मेरी मां ने अंगूठा लगाया। मैंने उसी समय ठान लिया कि अब मां को कभी अंगूठा नहीं लगाने दूंगी। मैं रोज स्कूल से आकर उन्हें अपना नाम लिखना और साइन करना सिखाने लगी। एक हफ्ते में उन्होंने दोनों सीख लिए। मेरी दूसरी छात्रा बनी मेरी दादी। आज वह भी अपना नाम लिख और पढ़ लेती हैं।’

कम्युनिटी स्कूल में वयस्क निरक्षरों को पढ़ना सिखाती मनप्रीत कौर।

सफलता के पीछे 2 चेहरे : प्रिंसिपल ने गाइड किया, मां ने तो अपना सपना ही बदल डाला

प्रिंसिपल बलराज कौर ने किताबें उपलब्ध कराई, वयस्क निरक्षरों को पढ़ाना सिखाया

मनप्रीत के अनुसार, वयस्क निरक्षरों को बेसिक एजुकेशन देने का तरीका उन्हें उनकी प्रिंसिपल बलराज कौर ने सिखाया। जून-2016 की छुट्टियों में उनके स्कूल ने उसे कुछ किताबें भी दी थीं। मनप्रीत के स्कूल सत्या ऐलिमेंटरी स्कूल की प्रिंसिपल बलराज कौर को भी अपनी इस छात्रा पर गर्व है। वे कहती हैं, हमारे स्कूल की कोशिश बच्चों को शिक्षा के साथ-साथ समाज के लिए कुछ करने वाला अच्छा नागरिक बनाना रहता है और मनप्रीत इसका प्रत्यक्ष उद्धारण है।

सिर्फ साइन करना ही नहीं सिखाती, बेसिक एजुकेशन भी देती है मनप्रीत

प्रिंसिपल बलराज कौर और मां परमजीत कौर (पीले सूट में) के साथ मनप्रीत कौर।

‘कम्युनिटी स्कूल’ में मनप्रीत की पहली छात्रा उसकी अपनी मां थी। डेढ़ साल के अंदर उसने मां परमजीत कौर को हिंदी-पंजाबी पढ़ना-लिखना सिखाया। आजकल वह मां को अंग्रेजी सीखा रही है। उसकी 68 वर्षीय दादी बलबीर कौर भी अब ठाठ से बैंक में साइन करके पेंशन निकलवाती है। मनप्रीत ने बताया कि अपने कम्युनिटी स्कूल में वह निरक्षरों को सिर्फ हस्ताक्षर और उनका नाम लिखने तक सीमित नहीं रखती। वह उन्हें बेसिक एजुकेशन देती हैं। अब तक वह 27 वयस्कों को साक्षर बना चुकी हैं जिनमें से 22 महिलाएं हैं। ये सभी पंजाबी पढ़ लेते हैं।

बेटी को अब बैंक अफसर की जगह टीचर बनाने की चाहत ताकि दूसरे भी पढ़ते रहें

मनप्रीत कौर को जब नेशनल लेवल पर सम्मानित किए जाने की खबर सुनी तो उनकी मां परमजीत कौर भावुक हो गई थीं। वह कहती हैं, ‘मैंने कभी नहीं सोचा था कि मेरी बेटी के प्रयासों को इतना अधिक सराहा जाएगा। पहले मैं उसे बैंक अधिकारी बनाना चाहती थी क्योंकि मैंने बैंकों में लड़कियों को फर्राटेदार इंग्लिश बोलते देखा है। हालांकि अब मैं चाहती हूं कि मनप्रीत टीचर बने और इसी तरह दूसरों को पढ़ाती रहे।’

दैनिक भास्कर पर Hindi News पढ़िए और रखिये अपने आप को अप-टू-डेट | अब पाइए News in Hindi, Breaking News सबसे पहले दैनिक भास्कर पर |

More From Amritsar

    Trending

    Live Hindi News

    0

    कुछ ख़बरें रच देती हैं इतिहास। ऐसी खबरों को सबसे पहले जानने के लिए
    Allow पर क्लिक करें।

    ×