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दरबार साहिब में अब कंपोस्ट लिफाफों में मिलेगा प्रशाद

शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने पर्यावरण संरक्षण के मकसद से रविवार से दरबार साहिब आने वाले श्रद्धालुओं को...

Danik Bhaskar | Apr 02, 2018, 02:05 AM IST
शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने पर्यावरण संरक्षण के मकसद से रविवार से दरबार साहिब आने वाले श्रद्धालुओं को प्रशाद और सिरोपे देने के लिए कंपोस्ट लिफाफों का इस्तेमाल शुरू कर दिया। इसके साथ ही दरबार साहिब पंजाब का पहला ऐसा धार्मिक स्थल बन गया जहां प्लास्टिक लिफाफों पर पाबंदी लग गई। अभी तक दरबार साहिब में संगत को सिरोपा-प्रशाद देने के लिए पॉलीथीन लिफाफों का प्रयोग किया जाता था। दरबार साहिब के बाद एसजीपीसी क्रमवार तरीके से अपने तहत आते दूसरे गुरुद्वारों में भी पॉलीथिन लिफाफों की जगह इन कंपोस्ट लिफाफों का इस्तेमाल शुरू करेगी।

तीन महीने में अपने आप खत्म हो जाएगा ये लिफाफा : आलू और मक्की के स्टार्च से बने होने की वजह से ये कंपोस्ट लिफाफे पर्यावरण फ्रेंडली हैं। इनमें प्रशाद और सिरोपा रखने में भी कोई दिक्कत नहीं हैं। प्लास्टिक के लिफाफे केमिकल बेस्ड होते थे और वह लंबे समय तक गलते नहीं थे। पानी, हवा, धूप और मिट्टी में कहीं भी रखने पर कंपोस्ट लिफाफा तीन महीने में अपने आप गल जाएगा।

पंजाब प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड ने भेजे 18 क्विंटल लिफाफे, हर महीने 15 क्विंटल की खपत

प्लास्टिक की जगह कंपोस्ट लिफाफे श्री दरबार साहिब में संगत को बांटते हुए एसजीपीसी के मुख्य सचिव डाॅ. रूप सिंह व अन्य।

पॉलीथिन 265 क्विंटल लगता था, अब 180 क्विंटल की जरूरत | एसजीपीसी अकेले दरबार साहिब में प्रशाद और सिरोपे देने के लिए हर साल 265 क्विंटल पॉलीथिन लिफाफे खरीदती थी। अब इनकी जगह सालाना 180 क्विंटल कंपोस्ट लिफाफे खरीदे जाएंगे। एसजीपीसी के मुख्य सचिव डाॅ. रूप सिंह ने बताया कि पंजाब प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड ने पहली खेप में 18 क्विंटल कंपोस्ट लिफाफे दरबार साहिब भेजे हैं। आगे एसजीपीसी इनकी खरीद अपने तौर पर करेगी जिसके लिए सोमवार को एसजीपीसी की सब-कमेटी की मीटिंग बुलाई गई है। उसी बैठक में तय होगा कि ये लिफाफे कितने और किस कंपनी से खरीदने हैं। कंपोस्ट लिफाफों का रेट प्लास्टिक लिफाफों से थोड़ा ज्यादा है मगर पर्यावरण हित में एसजीपीसी उन्हीं का प्रयोग करेगी। रविवार को एसजीपीसी के मुख्य सचिव डाॅ. रूप सिंह की अगुवाई में एसजीपीसी अफसरों और दरबार साहिब के मैनेजर सुलखन सिंह भंगाली ने पंजाब प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड के इंजीनियर जीएस मजीठिया की मौजूदगी में कंपोस्ट लिफाफों के इस्तेमाल की शुरूआत की।