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थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों के लिए टूरिस्टों ने दिल खोल कर किया रक्तदान

शहर और आसपास के थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों को खून मुहैया करवाने के लिए अमृतसर थैलेसीमिया सोसायटी की तरफ से धर्म...

Danik Bhaskar | Apr 02, 2018, 02:05 AM IST
शहर और आसपास के थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों को खून मुहैया करवाने के लिए अमृतसर थैलेसीमिया सोसायटी की तरफ से धर्म सिंह मार्केट में रविवार को रक्तदान कैंप लगाया गया। यह कैंप खास रूप से टूरिस्टों के लिए लगाया गया था। टूरिस्टों ने खूनदान तो किया ही बल्कि पीड़ित बच्चों से मिल कर उनकी सेहतयाबी की कामना भी की। वैैसे तो सोसायटी की तरफ से पहले भी रक्तदान कैंप लगाए जाते रहे हैं लेकिन अब हर महीने के पहले रविवार को एक नए कैंप का आगाज किया गया है। सोसायटी के प्रधान सतनाम सिंह, उप प्रधान राजिंदर सिंह, महासचिव जसबीर सिंह गुलाटी, नरिंदर कुमार बटाला, कंवलजीत सिंह, गुरबरिंदर सिंह तरन तारन, सोसायटी की कौंसलर संगीता की तरफ से यह कैंप आयोजित किया गया। इसमें गुरु नानक देव अस्पताल के ब्लड बैंक के डॉ. विवेक खन्ना, पीआरओ रवि कुमार, सावित्री, आशीश, रवि कुमार आदि ने सहयोग दिया। सतनाम सिंह ने बताया कि अमृतसर में इस वक्त 200 थैलेसीमिया पीड़ित बच्चे हैं। उनको महीने में दो से तीन बार खून चढ़ाना पड़ता है। इसकी आपूर्ति विभिन्न एनजीओ की तरफ से लगाए गए कैंप से एकत्रित खून से किया जाता है। चूंकि गर्मी आ गई है और खून की ज्यादा जरूरत पड़ेगी और उसी के मद्देनजर इस कैंप का आयोजन किया गया है। कैंप में पहली बार खूनदान करने पहुंची दिल्ली की एकता पांडेय तथा माही ने बताया कि वह लोग दरबार साहिब माथा टेकने आए थे। यहां देखा तो कैंप लगा था और इधर आ गए। थैलेसीमिया के बच्चों की परेशानी जान दुख हुआ और खुद को खून देने से नहीं रोक पाईं। इनका कहना है कि वह लोग पहली बार आई हैं और यात्रा सफल हो गई है। इन लोगों ने बच्चों के तंदुरूस्त होने के लिए भी अरदास की। इस दौरान 121 लोगों ने खूनदान किया, जिसमें 25 महिलाएं शामिल थीं।

सरकार से मदद की अपील

सतनाम सिंह ने बताया कि उन्होंने इस कैंप की शुरुआत 20 साल पहले की थी। उस वक्त सिर्फ पांच मरीज थे, लेकिन सरकार द्वारा ध्यान न दिए जाने के कारण यह तादाद 200 तक पहुंच गई है। राजिंदर सिंह और जसबीर सिंह ने बताया कि सरकार की तरफ से न तो दवाएं मिल रही हैं और ना ही खून चढ़ाने वाला फिल्टर, जिस कारण और दिक्कत आ रही है। इन लोगों ने सरकार से मांग की है कि दूसरी बीमारियों की तरह से इस बीमारी के पीड़ित बच्चों के लिए मदद की जाए।