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शहर की 7 हजार फैक्टरियों को कुछ नहीं, सवा लाख टैक्सपेयर मायूस तो 30 हजार पेंशनर खुश

केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली के आम बजट के बाद अमृतसर के 30 हजार पेंशनरों के चेहरे पर जहां मुस्कान है वहीं शहर के 1...

Dainik Bhaskar

Feb 02, 2018, 02:10 AM IST
केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली के आम बजट के बाद अमृतसर के 30 हजार पेंशनरों के चेहरे पर जहां मुस्कान है वहीं शहर के 1 लाख 25 हजार टैक्सपेयर इनकम टैक्स स्लैब में सीधी राहत न मिलने से मायूस हैं। मौजूदा सरकार का आखिरी पूर्ण बजट होने की वजह से आस थी कि बॉर्डर बेल्ट होने के चलते अमृतसर की 7 हजार से ज्यादा इंडस्ट्रीयल यूनिट्स के लिए कोई स्पेशल पैकेज दिया जाएगा लेकिन अमृतसर लोकसभा सीट से पिछला चुनाव हार चुके जेटली ने इन उद्योगों को बेसहारा छोड़ दिया। इनमें से लगभग 3 हजार टैक्सटाइल यूनिट हैं।

कई बरसों से कारोबारी जिस अमृतसर इंडस्ट्रियल कॉरीडोर की मांग कर रहे थे, बजट में उसका भी कोई जिक्र नहीं किया गया। पंजाब की लगभग खत्म हो चुकी इंडस्ट्री को दोबारा खड़ा करने के लिए पड़ोसी राज्यों की तर्ज पर विशेष पैकेज मिलने की आस भी पूरी नहीं हुई। केंद्र ने पिछले साल हिमाचल, जम्मू-कश्मीर व उत्तराखंड का विशेष पैकेज 10 साल के लिए बढ़ा दिया था।

बजट में बुजुर्गों को सेविंग पर मिलने वाले ब्याज में छूट दी गई लेकिन मिडिल क्लास परिवार को मायूसी मिली। अमृतसर जिले में 5,37,904 घरों में 1 लाख 25 हजार करदाता रहते हैं। 40 हजार की स्टैंडर्ड डिडक्शन के अलावा इनकम टैक्स स्लैब में कोई छूट नहीं दी गई।

ऐसे समझिए...



हेल्थ गरीबों के लिए

नेशनल हेल्थ प्रोटेक्शन स्कीम: राज्य में पहले ही भगत पूरन सिंह बीमा योजना है, जो नीले कार्डधारकों के लिए है। जिले में इसके तहत 1.13 लाख कार्ड बने हुए हैं। इस स्कीम में एक परिवार को ‌Rs.50 हजार तक का इलाज मुफ्त दिया जाता है।

पीजी कोर्स में सीटें : मेडिकल कॉलेज में पोस्ट ग्रेजुएशन की 139 सीटें। कितनी बढ़ेंगी इस पर विचार नहीं हुआ।

टीबी मरीज : अमृतसर में टीबी के 4217 मरीज। इन्हें 500 रुपए महीना मिलेगा।

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मुफ्त डायलिसिस पहले से, पर किट के लिए बजट नहीं: सिविल अस्पताल में जुलाई 2017 में मुफ्त डायलिसिस की सुविधा शुरू की गई थी लेकिन फंड न आने से 4 माह से मरीजों को किट बाहर से खरीदनी पड़ती है। 3 बार डायलिसिस कराने का खर्चा Rs.3500 है। जुलाई-17 से अस्पताल में कोई फीस नहीं लगती, जो पहले 750 रुपए थी। जीएनडीएच में भी जुलाई 2017 से केवल फीस माफ की गई।



पीएम आवास योजना : जिले में 4 साल में 100 परिवारों को घर मिले।

फ्री गैस कनेक्शन : गरीब वर्ग की महिलाओं को उज्जवला योजना के तहत फ्री गैस कनेक्शन देने की स्कीम पिछले साल शुरू की गई थी। 14 हजार कनेक्शन बांटे गए हैं।

बीपीएल परिवार : बीपीएल कार्डधारकों को 5 साल पहले आटा-दाल स्कीम के साथ जोड़ दिया गया था। उस समय जिले में इनकी संख्या 32 हजार थी।

अमृतसर टू दिल्ली

क्लास पहले अब

फर्स्ट एसी 1775 1773

सेकेंड एसी 1065 1043

थर्ड एसी 755 733

स्लीपर 290 279

अमृतसर टू चंडीगढ़

ऐसी चेयर कार 435 413

सेकेंड क्लास 120 109

बिटकॉइन पर बैन से रियल एस्टेट को होगा फायदा

बजट में अफोर्डेबल हाउसिंग के लिए 14 हजार करोड़ रुपए के प्रावधान से रियल एस्टेट सेक्टर को बूस्ट मिलेगा। अंसल हाउसिंग एंड कंस्ट्रक्शन के असिस्टेंट वाइस प्रेसीडेंट विपिन मेहता के अनुसार शहरों के लिए कनेक्टिविटी बढ़ाने के अलावा बिटकॉइन जैसी क्रिप्टोकरंसी पर बैन लगाने का फायदा रियल एस्टेट सेक्टर को मिलेगा।

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पब्लिक टॉयलेट : चार साल में सिर्फ 70 नए टॉयलेट बने। 100 की मरम्मत हुई। इनके न होने से स्वच्छता सर्वे में शहर पिछड़ सकता है।

डाकघर में पासपोर्ट: पहले से पासपोर्ट केंद्र है। अमृतसर-तरनतारन के किसी डाकघर में पासपोर्ट बनाने का प्रस्ताव नहीं।

हाईवे : अमृतसर से श्रीगंगानगर तक बन रहे सिक्सलेन हाईवे का काम पूरा होने वाला है। पीडब्ल्यूडी की कहीं भी हाईवे के लिए जमीन अधिग्रहण की योजना नहीं।

मनरेगा : 10 महीनों में अमृतसर में 24 करोड़ रु. खर्च किए। चालू वित्त वर्ष के बचे 2 माह में 8 करोड़ रुपए और खर्च किए जाने हैं। इस साल जिले में 20 हजार नए जॉब कार्ड बनाए गए। 78 हजार जॉब कार्ड पहले से थे।

अमृतसर इंडस्ट्रियल कॉरीडोर का जिक्र तक नहीं किया

3 हजार टैक्सटाइल यूनिट भी इग्नोर

31 मानवरहित क्रॉसिंग

अमृतसर जिले में 10 और तरनतारन जिले में 21 मानवरहित क्रॉसिंग हैं। वर्ष 2020 तक इन सभी मानवरहित क्रॉसिंग को पूरी तरह खत्म कर दिया जाएगा।

बीटेक-आईटीआई : अमृतसर के कॉलेजों में बीटेक की 3600, आईटीआई की 4985 सीटें। तरनतारन में आईटीआई की 1985 सीट हैं। यहां कोर्स करने वालों को जॉब दिलाने के लिए कार्यक्रम चलाए जाएंगे।

‘आधार’ से पेमेंट: अमृतसर-तरनतारन में ‘आधार’ से पेमेंट करने की कोई मशीन नहीं है।

किसानी : अमृतसर और तरनतारन में 1 हजार हेक्टेयर रकबे में प्याज और 9 हजार हेक्टेयर रकबे में आलू बोया जाता है। इनके लिए बजट में खास इंतजाम किए गए हैं।

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