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इंडस्ट्री को स्पैशल पैकेज चाहिए, शिक्षा प्रसार के लिए बजट बढ़ाना जरूरी

केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली की तरफ से वीरवार को पेश किए जाने वाले बजट को लेकर आम आदमी से लेकर कारोबारी तक को...

Bhaskar News Network | Last Modified - Feb 01, 2018, 03:10 AM IST

केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली की तरफ से वीरवार को पेश किए जाने वाले बजट को लेकर आम आदमी से लेकर कारोबारी तक को खासी उम्मीदें हैं। जनता की सोच है कि वर्ष 2019 में चुनाव को देखते इस बजट में सरकार की तरफ से आकर्षक घोषणाएं किए जा सकती है। वहीं इंडस्ट्रियलिस्ट चाहते हैं कि पहले के किए चुनावी वादों को बजट में पूरा किया जाना चाहिए। वहीं शिक्षा, मेकल और अहम योजनाओं के लिए स्पेशल फंड की घोषणाओं का इंतजार हो रहा है। कारोबारियों के मुताबिक वित्त मंत्री ने वर्ष 2014 में अमृतसर से संसदीय चुनाव के दौरान कई वादे किए थे, जो उन्हें पूरे करने चाहिए।

वर्ष 2019 के चुनाव को देखते हुए वीरवार को पेश होने जा रहे केंद्रीय बजट से आम आदमी और कारोबारियों को काफी उम्मीदें, ज्यादातर की मांग

विदेशी कपड़े के इंपोर्ट पर एंटी डंपिंग ड्यूटी लगे

टैक्स लिमिट 5 लाख की जानी चाहिए

इन्कम टैक्स लिमिट बढ़ाकर 5 लाख की जानी चाहिए। वहीं 10 लाख की इन्कम तक स्लैब 10% होनी चाहिए। आम आदमी के लिए टैक्स स्बैल 20 फीसदी से ऊपर नहीं रखी जानी चाहिए। पहाड़ी राज्यों की तर्ज पर बार्डर इंडस्ट्री को स्पेशल पैकेज दिया चाहिए। गुरप्रीत कटारिया, वाइस प्रेसिडेंट, पंजाब प्लाईवुड मेनुफेक्चरर एसो.

लटके रिफंड का प्रावधान हो

सरकार ने 2016 में एक्सपोर्ट पर दो फीसदी इंसेटिव देने की योजना शुरू की थी। इसके तहत रिबेट आफ स्टेट लेवी (आरओएसएल) के रिफंड काफी लटके हुए हैं। इसके लिए बजट में फंड का प्रावधान रखने का भरोसा दिलाया गया था, जोकि जारी होने चाहिए। अमित खन्ना, एक्सपोर्टर

शिक्षा नीति तीन साल से उपेक्षित है

राष्ट्रीय उच्चतम शिक्षा अभियान, सर्व शिक्षा मुहिम के तहत स्कूल खोले गए थे, लेकिन फंड की कमी के कारण शिक्षकों को वेतन नहीं मिले। राष्ट्रीय शिक्षा नीति पिछले 3 साल से उपेक्षित है। इसी कारण राज्य सरकारें भी शिक्षा प्रसार पर दिलचस्पी नहीं दिखा रही हैं। -एडवोकेट एमके शर्मा

एमएसएमई की लिमिट बढ़ानी जरूरी: डालमिया

चाइना व अन्य देशों से सस्ता कपड़ा इंपोर्ट होने की वजह से भारतीय टैक्सटाइल इंडस्ट्री प्रभावित हो रही है। कारोबारी केंद्र सरकार को कई बार ज्ञापन दे चुके हैं कि इस इंपोर्ट पर एंटी डंपिंग ड्यूटी लगाई जानी चाहिए। देश की रीढ़ की हड्डी टैक्सटाइल इंडस्ट्री को इस मार से बचाने के लिए बजट में यह घोषणा होनी चाहिए। जतिंदर शर्मा, ज्वाइंट सेक्रेटरी नार्दन इंडिया चेंबर आफ कामर्स

माइक्रो-स्माल मीडियम एंटरप्रेन्योर्स की कैपिटल इन्वेस्टमेंट लिमिट वर्ष 2006 के बाद से अभी तक नहीं बढ़ी है। पूर्व केंद्रीय मंत्री कलराज मिश्रा ने अप्रैल 2015 में इसे बढ़ाने के लिए पार्लियामेंट में माइक्रो इंडस्ट्री की लिमिट को 25 से 50 लाख, स्माल इंडस्ट्री की लिमिट 5 से 10 करोड़ और मीडियम के लिए 10 से 30 करोड़ करने का प्रस्ताव रखा था, इसे बजट में अनाउंस किया जाना चाहिए। कमल डालमिया, चेयरमैन, फोकल प्वाइंट इंडस्ट्रीज एसोसिएशन

बजट से यह अपेक्षाएं

जीएसटी दरें घटानी चाहिए।

सुपर सीनियर सिटीजंस की इन्कम टैक्स छूट 5 लाख से 10 लाख होनी चाहिए, जिसमें लंबे समय से बदलाव नहीं हुआ है।

इन्कम टैक्स में मेडिकल इंश्योरेंस की छूट’सीमा 25 हजार से बढ़ाकर 50 हजार होनी चाहिए।

हिंदू अनडिवाइडेड फैमिली (एचयूएफ) की इन्कम टैक्स सीमा छूट भी 5 लाख होनी चाहिए।

एजुकेशन, मेडिकल सुविधाएं सस्ती होनी चाहिए, जिसके लिए बजट बढ़ाना जरूरी है।

सीनियर सिटीजंस की सेविंग पर स्पेशल ब्याज मिलना चाहिए।

सुकन्या व अन्य योजनाओं की ब्याज दर बढ़ाई जानी चाहिए।

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