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कर्मचारियों के 35 करोड़ के बिल क्लीयर, ढाई करोड़ के वैट रिफंड रुके

वित्तीय वर्ष 2017-18 के अंतिम दिन, 31 मार्च की रात 12 बजे तक जिला खजाना दफ्तर में बिलों की क्लीयरिंग का काम चलता रहा।...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 01, 2018, 04:05 AM IST

कर्मचारियों के 35 करोड़ के बिल क्लीयर, ढाई करोड़ के वैट रिफंड रुके
वित्तीय वर्ष 2017-18 के अंतिम दिन, 31 मार्च की रात 12 बजे तक जिला खजाना दफ्तर में बिलों की क्लीयरिंग का काम चलता रहा। अलग-अलग विभागों के मुलाजिम अपने डिपार्टमेंट के पेंडिंग बिल पास कराने के लिए दफ्तर में डटे रहे। देर रात तक विभिन्न विभागों के 31 जनवरी 2018 तक के सभी बिल निपटाते हुए 35 करोड़ से ज्यादा की पेमेंट क्लीयर कर दी गई। वित्त वर्ष का आखिरी दिन होने के कारण स्टेट बैंक आॅफ इंडिया (एसबीआई) में भी रात तक सरकारी बिलों का भुगतान चलता रहा। हालांकि जनवरी 2018 के ढाई करोड़ रुपए के वैट रिफंड का भुगतान नहीं हो पाया।

खजाना दफ्तर में 50 अलग-अलग कैटेगरी के बिल भुगतान के लिए आते हैं। इनमें मुख्यत: जीपीएफ एडवांस, रिटायरमेंट बेनिफिट्स, पेंशन स्कीम और मिसलेनियस खर्चों से जुड़े बिल शामिल रहते हैं। दफ्तर जिले में तैनात 28 हजार मुलाजिमों को हर महीने 147 करोड़ रुपए बतौर वेतन जारी करता है। खजाना दफ्तर के मुलाजिमों ने दावा किया कि सरकार ने वित्तीय संकट के बावजूद काफी हद तक बिलों का भुगतान कर दिया है। पिछले 10 साल के मुकाबले इस साल 31 मार्च तक सबसे ज्यादा बिल निपटाए गए, जो अपने आप में रिकाॅर्ड है। जिला खजाना अफसर अमन मैनी ने कहा कि एक फरवरी 2018 से 31 मार्च 2018 तक के बिल पेंडिंग हैं जिनकी क्लीयरिंग का काम चल रहा है।

खजाना दफ्तर में शनिवार देर रात तक स्टाफ पेंडिंग बिल निपटाने में लगा रहा।

एक दिन में 49.18 लाख रुपए का प्रॉपर्टी टैक्स जमा

प्रॉपर्टी टैक्स भरने के अंतिम दिन, 31 मार्च को नगर निगम में लोगों ने 49.18 लाख रुपए जमा करवाए। शनिवार तक प्रॉपर्टी टैक्स न चुकाने वालों को अब टैक्स की रकम के साथ 20 फीसदी जुर्माना और 18 फीसदी ब्याज चुकाना होगा। साथ ही कानूनी कार्रवाई का सामना भी करना होगा। नगर निगम ने वित्तीय वर्ष 2017-18 के लिए प्रॉपर्टी टैक्स के रूप में 24 करोड़ रुपए का टारगेट रखा था मगर वह सिर्फ 17.75 करोड़ रुपए की रिकवरी ही कर पाया। रिकवरी बढ़ाने के लिए मार्च के अंतिम दो हफ्तों में नगर निगम ने कई प्रयास किए। लोगों को 8 जोन में प्राॅपर्टी टैक्स जमा कराने की सुविधा देने के अलावा सभी 85 वार्डों में कैंप लगाने की योजना भी बनाई गई थी मगर कई वार्डों में ये कैंप नहीं लग पाए।

शनिवार को नगर निगम दफ्तर में प्राॅपर्टी टैक्स जमा कराने पहुंचे लोग।

पानी-सीवरेज बिलों के 17 लाख रु. जमा

पानी-सीवरेज के बिल भरने के अंतिम दिन, शनिवार को नगर निगम में 17 लाख रुपए जमा हुए। कारपोरेशन एरिया में बिल लेने के लिए सुल्तानविंड गेट, कंपनी बाग, पुतलीघर, छेहर्टा और रंजीत एवेन्यू में विशेष काउंटर खोले गए थे। निगम ने वित्त वर्ष 2017-18 में पानी-सीवरेज बिलों से 22 करोड़ रुपए का टारगेट रखा था। शनिवार तक 15 करोड़ रुपए की रिकवरी हो पाई। जिन लोगों ने शनिवार तक बिल नहीं भरे, उन्हें जुर्माने के साथ इसकी भरपाई करनी होगी।

अंतिम दिन 2270 लोगों ने भरी रिटर्न

आयकर सेवा केंद्र पर शनिवार को देर शाम तक इनकम टैक्स रिटर्न भरने का काम चलता रहा। रिटर्न भरने के आखिरी दिन, शनिवार को छुट्टी का दिन होने के बावजूद विभाग ने आयकरदाताओं की सुविधा के लिए चार काउंटर खोले थे। इन पर 2270 लोगों ने रिटर्न दाखिल की। असेस्मेंट ईयर 2017-18 की रिटर्न और रिवाइज्ड रिटर्न दाखिल करने की अंतिम तिथि होने के चलते विभाग को स्पेशल काउंटर खोलने के निर्देश थे। यहां इनकम टैक्सपेयर की मदद के लिए रिटर्न प्री-परेटर भी बैठाए गए थे। इससे पहले शुक्रवार को 800 लोगों ने रिटर्न फाइल की थी।

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