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ठेकों पर नजर नहीं आई रौनक, शराबी हुए मायूस

बाबा बकाला साहिब | गुरप्रीत हर साल 31 मार्च का दिन शराबियों के लिए उनकी जिंदगी का सबसे खुशीभरा दिन होता है। उनको...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 01, 2018, 02:00 AM IST

ठेकों पर नजर नहीं आई रौनक, शराबी हुए मायूस
बाबा बकाला साहिब | गुरप्रीत

हर साल 31 मार्च का दिन शराबियों के लिए उनकी जिंदगी का सबसे खुशीभरा दिन होता है। उनको उतनी खुशी खुद के विवाह और नौकरी मिलने की भी नहीं होती जितनी खुशी ठेके टूटने की होती है। लेकिन इस बार 31 मार्च ने उनको मायूस किया। जहां आज के दिन शराब के ठेकों के बाहर शराबी हस्ते नज़र आते थे और एक दूसरे शराबी से खुशी में झूमते हुए यह पूछते हैं कि “तू केहड़ी लई ए, किन्ने दी पेट्टी मिली ए। परंतु वे आज के दिन एक दूसरे की तरफ मायूसी भरे अंदाज़ में देखते रहे। एक दूसरे को बोलते रहे हैं “यार पता कर तेरे इलाके विच ठेके टूटे कि नहीं, जे टूट्टे तां फोन कर देवीं, मैं आ जाऊंगा।

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