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शहर में हैं 200 फुट तक ऊंची इमारतें, फायर ब्रिगेड 40 फुट तक ही आग बुझाने में सक्षम

नगर निगमों के पास ही करीब 10 करोड़ की लागत वाला 150 फुट तक मार करने वाले फायर टेंडर है।

Dainik Bhaskar

Nov 23, 2017, 05:39 AM IST
Fire brigade capable of extinguishing fire up to 40 feet

बठिंडा. जिले में दो दर्जन के करीब इमारतें ऐसी है जो 150 से 200 फुट तक बनी हुई हैं वहीं फायर ब्रिगेड की जमीनी सच्चाई यह है कि उसके पास मात्र 40 फुट तक आग को काबू करने वाली गाड़ियां मशीनरी है। इस स्थिति में लुधियाना जैसा हादसा होने की संभावना अधिक है। पंजाब में केवल चंडीगढ़ मोहाली नगर निगमों के पास ही करीब 10 करोड़ की लागत वाला 150 फुट तक मार करने वाले फायर टेंडर है। भारी कीमत के चलते स्थानीय निगम कांउसिल इसकी खरीद करने से गुरेज करती है सरकार से ग्रांट जारी करने की मांग कर रही है। यह सिलसिला पिछले 10 साल से चल रहा है। इमारत का नक्शा पारित करने के लिए फायर ब्रिगेड की तरफ से एनओसी हासिल करना लाजमी है। जबकि शहर की 90 फीसदी पुरानी बड़ी व्यवसायिक इमारतों में तो फायर उपकरण लगे हैं और ही नगर निगम से हर साल एनओसी हासिल की जा रही है।

जिले में किसी इमारत में आग लगने पर उसे समय पर काबू करने के लिए निगम की तैयारी भी आधी अधूरी है। नगर निगम क्षेत्र में 16 हजार व्यवसायिक इमारतों में फायर सेफ्टी उपकरण लगाने फायरब्रिगेड से एनओसी लेने में लापरवाही इस मायने में झलकती है कि पिछले पांच साल में शहर में बनी मात्र डेढ़ हजार इमारतों ने ही एनओसी हासिल की है। वहीं जिले में 73 प्राइवेट अस्पताल, 40 बड़े शिक्षा संस्थान, 176 बैंक, 45 पेट्रोल पंप, 300 इंडस्ट्री के साथ सभी सरकारी विभागों की इमारतों में फायर सेफ्टी उपकरण किस स्थिति में है इसे लेकर पिछले पांच साल में तो जांच पड़ताल की गई और ही किसी तरह की एनओसी ली है। जिले में 826 स्कूल, काॅलेज,आईटीआई, तकनीकी काॅलेज ऐसे हैं जहां फायर उपकरण नहीं हंै जबकि इन संस्थानों में पांच लाख से अधिक बच्चे शिक्षा हासिल कर रहे हैं।

- एनओसी फीस तो मात्र 2500 रुपए, लेकिन इससे पहले खरीदे जाने वाले उपकरणों की कीमत अधिक होने से लोग बच रहे
- 73 अस्पताल, 40 शिक्षा संस्थान, 176 बैंक, 45 पेट्रोल पंप, 300 इंडस्ट्री सरकारी विभागों में फायर सेफ्टी की जांच तक नहीं हुई
- बठिंडा नगर निगम के पास फायर ब्रिगेड की कुल 10 गाडिय़ां है, जिनमें 4 फायर टेंडर गाड़ी 5000 लीटर, दो छोटे टेंडर 2500 लीटर, एक मिनी टेंडर 500 लीटर, एक मोटरसाइकिल. एक एबुलेंस एक अतिरिक्त खराब गाड़ी है।
- लंबे समय से आईटीआई चौक में सब फायर स्टेशन बनाने की योजना अभी भी अधर में है। बेशक इसके लिए जगह का चयन भी हो गया है। मगर फंड का अभी तक विभाग इंतजाम नहीं कर पाया। मेयर बलवंत राय नाथ का कहना है किफंड मिलते ही योजना को पूरा कर दिया जाएगा।
- बठिंडा दमकल विभाग में आधे से ज्यादा पद खाली पड़े हैं। फायर अफसर एक, 5 सब अफसर, 5 रीडिंग फायरमैन, 11 फायरमैन 10 ड्राइवर है। यहां पर ड्राइवर के कुल 18 पद हैं, जिनमें से 8 पद खाली हैं। जबकि फायरमैन के 9 पद खाली हैं। विभाग को कम से कम 3 ड्राइवर और 15 फायरमैन की जरूरत है।
- 2003 में बठिंडा नगर निगम बनने के बावजूद भी शहर का फायर ब्रिगेड पुराने ढांचे पर ही चल रहा है। अंदरूनी क्षेत्रों में जब भी आग की बड़ी घटना होती है तो फायर ब्रिगेड समय पर नहीं पहुंच पाती। शहर का विस्तार होता गया पर फायर स्टेशन का विस्तार नहीं हुआ। जिले में सब फायर स्टेशन बनाने की योजना को भी बने पांच साल हो गए हैं लेकिन फंड की कमी आड़े रही है।
- 4 जुलाई 2014 को कपड़ा मार्केट में एक दुकान को आग लग गई थी, जिस कारण फायर ब्रिगेड की गाड़ियों के सही प्रबंध होने के कारण आग काफी भड़क गई, जिसके चलते दुकान मालिक का 2.5 करोड़ का नुकसान हो गया था।

सरकार को कई बार अवगत करवाया
नगर निगम क्षेत्र में वर्तमान समय में 12 मंजिला तक 200 फुट इमारतें बनी हुई है। इसके मुकाबले हमारे पास मात्र 40 फुट तक आग बुझाने के साधन है। सरकार को कई बार अवगत करवा चुके हैं। स्थानीय निकाय विभाग की तरफ से नेशनल बिल्डिंग कोड 2005 की पार्ट-4 पाॅलिसी भी जल्द जारी होगी। इसके बाद सभी बड़ी इमारतों के लिए एनओसी हासिल करना फायर उपकरण लगाना लाजमी हो जाएगी। -जसविंदरसिंह, मुख्य फायर अफसर बठिंडा

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Fire brigade capable of extinguishing fire up to 40 feet
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