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पुलिस को देख 100 की स्पीड से दौड़ रही ट्रेन से कूदे तीन युवक, दो साल पहले छोड़ दी थी पढ़ाई

नशा हासिल करने के लिए कभी दिल्ली तो कभी राजस्थान जाते थे।

BhaskarNews | Last Modified - Nov 18, 2017, 04:45 AM IST

  • पुलिस को देख 100 की स्पीड से दौड़ रही ट्रेन से कूदे तीन युवक, दो साल पहले छोड़ दी थी पढ़ाई
    पुलिस बयान लेती हुई।

    मानसा.नशे की लत में डूबे तीन दोस्त सस्ता नशा खरीदने के लिए दिल्ली में अपने रिश्तेदार के यहां गए थे। दिल्ली में यमुना पार शाहदरा में कुछ नशा तस्कर दीपू बागी सिंह के संपर्क में थे जो उन्हें एक हजार रुपए में पांच ग्राम नशे की पुड़िया देता था। तीनों दोस्त दो साल पहले ही नशे की लत में पड़े। पहले भुक्की अफीम का नशा करते थे, लेकिन बठिंडा के गांव बीड में उन्हें एक तस्कर ने स्मैक का नशा करने का आदी बना दिया।

    इसके बाद वह नशा हासिल करने के लिए कभी दिल्ली तो कभी राजस्थान जाते थे। आर्थिक तौर पर कमजोर परिवार से संबंध रखने वाले तीनों युवकों ने पढ़ाई बीच में छोड़ दी। कभी किसी दुकान में कुछ समय के लिए काम करते थे लेकिन उनकी तरफ से नशा करने की आदत के कारण वह काम छोड़ने पर मजबूर हो जाते थे। तीनों युवक नशा करते थे लेकिन कभी तस्करी नहीं। की यही कारण है कि उनके खिलाफ किसी पुलिस थाने में भी किसी तरह का मामला दर्ज नहीं था। यही नहीं नशा करने के संबंध में परिजनों को भी किसी तरह की जानकारी नहीं थी। यही दो कारण थे जिसे वह राज रहने देना चाहते थे लेकिन आभा एक्सप्रेस में सादी वर्दी में तीन पुलिस कर्मचारियों ने जब तीनों को नशे की हालत में देखा तो पकड़कर उन पर केस दर्ज करने की बात कही। इसके चलते तीनों ने एक साथ ट्रेन से छलांग लगा दी।

    नशा तस्करों के खिलाफ पुलिस सख्ती कर रही है यही कारण है कि हर माह सैकड़ों तस्करों को गिरफ्तार करने के साथ राजस्थान हरियाणा की सीमाओं पर सख्ती की गई है। -नवीन सिंगला, एसएसपी, बठिंडा।

    बठिंडा में कुछ माह पहले नशा सप्लायर को सरेआम मौत दी गई थी। यहां गांव आसपास के इलाकों में नशा सप्लाई करने वाले युवक का गांव वालों ने दिन दहाड़े हाथ-पैर काटकर कत्ल कर दिया। इससे पहले युवक को दौड़ा-दौड़ा कर बुरी तरह पीटा। नशे के मामले में पंजाब पहले ही बदनाम है लेकिन बठिंडा के कुछ ऐसे गांव भी हैं जो नशे के गढ़ बने हुए हैं। शराब के मामले में गांव बीड़ तालाब तो रामपुरा कस्बे के मेहराज, भगता, दियालपुरा, रामपुरा, चाऊके, नथाना गांव कई नशों के लिए बदनाम हैं।

    नशे की तस्करी के लिए बदनाम रहा बठिंडा का गांव बीड़ पुलिस की सख्ती के बावजूद दलदल से बाहर नहीं निकल सका है। 18 जून 2017 को गांव बीड़ तलाब से आरोपी पूर्ण सिंह को 50 लीटर लाहन समेत गिरफ्तार किया गया तो 20 जुलाई को सदर बठिंडा पुलिस ने मुल्तानिया रोड़ से हरभजन सिंह निवासी बीड़ तलाब को काबू कर 12 ग्राम स्मैक बरामद की। वही तीन अगस्त को गांव नरुआना से पुलिस ने 50 ग्राम स्मैक गांव बीड़-तलाब निवासी संदीप सिंह से बरामद की। 25 जून 2014 को बीड़ तालाब गांव को स्मैक का गढ़ बनाने वाले पूर्व महिला सरपंच के बेटे को उसके दो साथियों के साथ गिरफ्तार किया गया।

    दीपू बागी सिंह 100 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से चल रही ट्रेन के पहियों में आकर कट गए लेकिन गुरप्रीत सिंह उनके साथ टकराकर रेल पटरी से दूर जाकर गिर गया। उसके हाथ-पैर और सिर में चोट लगी लेकिन जान बच गई।

    गांव की पूर्व महिला सरपंच के पति अमर सिंह ने 8 साल पहले स्मैक की लत के कारण बाहर से लाई हुई स्मैक को गांव में बेचना शुरू कर दिया। उसकी लत से भला उसके बेटे कब तक बचे रहते। देखते ही देखते उसके बेटे बिक्का सिंह और संदीप सिंह उर्फ सीपा गांव में स्मैक के बड़े तस्कर बन गए। इन्होंने गांव के बेरोजगार लोगों को मोहरा बनाकर पहले उन्हें स्मैक का आदी बनाया, फिर उन्हीं के जरिये स्मैक के नेटवर्क को कई शहरों से लेकर छोटे-छोटे गांवों तक फैलाया। गांव की वर्तमान सरपंच प्रकाश कौर का कहना है कि नशा तस्करों पर नकेल कसने के लिए वह पुलिस के साथ सहयोग कर रहे हैं।

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