ज्यादा कीटनाशक छिड़कने में 400 रुपए तक गिरा बासमती का रेट

Amritsar News - अमृतसर | खुशबू, चावलों की लंबाई और अन्य गुणों के कारण विदेशों तक में धूम मचाने वाले सूबे की बासमती पर लगा कीटनाशक का...

Sep 14, 2019, 07:25 AM IST
Amritsar News - basmati rate dropped by rs 400 for spraying more pesticides
अमृतसर | खुशबू, चावलों की लंबाई और अन्य गुणों के कारण विदेशों तक में धूम मचाने वाले सूबे की बासमती पर लगा कीटनाशक का कलंक उसका पीछा छोड़ने का नाम नहीं ले रहा है। हालांकि इस सीजन की बासमती को कीटनाशक मुक्त करने के लिए सूबा सरकार तथा निर्यातकों ने खासी मेहनत की लेकिन मंडी में आने के बाद एक बार फिर यह औंधे मुंह गिरी है। हालात ये हैं कि पिछले साल की तुलना में इसका भाव औसतन 400 रुपए प्रति क्विंटल कम मिल रहा है। इसका मुख्य कारण कीटनाशकों के कारण विदेशी मार्केट में इसकी विगत में हुई किरकिरी मानी जा रही है। इस वक्त मंडी में अभी बासमती की किस्म 1509 की आमद हो रही है। इसका भाव 2200 से 2600 रुपए प्रति क्विंटल चल रहा है। सबसे बड़ी अनाज मंडी भगतांवाला की बात करें तो मंडी में 4 लाख बोरी आ चुकी है। इसमें जो अच्छी क्वालिटी है वह 2600 और जो कुछ हल्की है वह 2200 रुपए प्रति क्विंटल बिक रही है। हालांकि यह किस्म बीते साल में 2800 से 2900 रुपए प्रति क्विंटल तक बिकी थी। आढ़ती-गल्ला मजदूर यूनियन के प्रधान राकेश कुमार तुली का कहना है कि शुरुआती दौर में यह 3500 से 4000 रुपए प्रति क्विंटल बिकती थी, लेकिन 5 साल पहले इसके भाव में गिरावट आनी शुरू हुई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार के जानकारों की मानें तो बाजार में मंदा कमजोर क्वालिटी के कारण आया है। सूबे में मौसम खराब होने की वजह से धान गिर गया जिससे दाना ठीक से नहीं बना और कहीं-कहीं पर दागी भी हो गया। दूसरा कारण कंबाइन से कटाई है क्योंकि जल्दी खेत खाली करने और लेबर न मिलने के कारण किसान मशीन से कटाई करते हैं और उसमें नमी ज्यादा होती है। नतीजतन ग्राहक रेट पर खास ध्यान रखता है। इसका सबसे अहम कारण है इसमें इस्तेमाल किया जाने वाला कीटनाशक और रासायनिक खादों का है। जानकारी के लिए बताते चलें कि विगत में अंतरराष्ट्रीय मार्केट में बासमती इसलिए रिजेक्ट हो गई थी क्योंकि वहां के मानक से अधिक कीटनाशक उससे चावलों में पाए गए थे। हालांकि गत दो सालों से सूबा सरकार तथा चावल निर्यातकों ने किसानों को इस बाबत जागरुक भी किया और भरपूर सहयोग भी किया, ताकि हमारी बासमती फिर से विदेशी बाजार में अपना खोया रुतबा हासिल कर सके। बावजूद इसके खरीदार ज्यादा रेट देकर कोई रिस्क नहीं लेना चाहते। इस संदर्भ में मार्केट कमेटी के सचिव अमरदीप सिंह कौड़ा का कहना है कि बासमती का सरकारी तौर पर कोई एमएसपी तय नहीं है, जिस कारण इसमें उतार-चढ़ाव आता रहता है।

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