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अमृतसर हादसा / सीएम के निर्देश, दहशरा उत्सव के आयोजक और गेटमैन पर हो केस दर्ज



CM says to launch FIR against Gatemen of Railway and Dushehra Organizers
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CM says to launch FIR against Gatemen of Railway and Dushehra Organizers

  • 19 अक्टूबर को अमृतसर के धोबीघाट के पास ट्रेन से कटकर मारे गए थे दशहरा देख रहे 65 लोग
  • डिविजनल कमिश्नर बी पुरुषार्थ के नेतृत्व वाली कमेटी की 300 पन्नों की रिपोर्ट के आधार पर दिए सीएम ने निर्देश

Dainik Bhaskar

Dec 07, 2018, 03:43 PM IST

अमृतसर। अमृतसर के जोड़ा फाटक रेल हादसे के संबंध में मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने रेलवे के गेटमैन और दशहरा उत्सव के आयोजकों के खिलाफ केस दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। हालांकि दोनों गेटमैन के खिलाफ केस दर्ज करने की कार्रवाई रेलवे के अपने स्तर पर तय होनी है। दरअसल बीते दिनों डिविजनल कमिश्नर बी पुरुषार्थ के नेतृत्व वाली एक स्पेशल कमेटी ने अपनी 300 पन्नों की रिपोर्ट गृह मंत्रालय को सौंपी थी। गुरुवार सुबह यह रिपोर्ट सार्वजनिक हुई और इसके बाद शाम को मुख्यमंत्री ने रिपोर्ट के आधार पर यह फैसला लिया।

 

मामला 19 अक्टूबर का है, जब पार्षदपुत्र सौरभ मदान उर्फ मिट्‌ठू के द्वारा अमृतसर के धोबीघाट मैदान में दशहरा उत्सव का आयोजन किया गया था। यह मैदान बहुत छोटा है, जबकि यहां मेला देखने वालों की भीड़ हजारों में थी। शाम को जिस वक्त रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतलों को अग्नि के सुपुर्द किया गया, अचानक वहां से ट्रेन आ गई। पटाखों के शोर की वजह से गाड़ी की आवाज और हॉर्न नहीं सुन पाए लोगों में कटकर 65 की मौत हो गई थी, जबकि डेढ़ सौ के लगभग घायल हो गए थे। इस हादसे की जांच के लिए जहां रेलवे ने अपने लेवल पर एक आयोग का गठन किया था, वहीं मुख्यमंत्री ने डिविजनल कमिशनर बी पुरुषार्थ के नेतृत्व में एक कमेटी का गठन किया था। इस कमेटी ने गहनता से जांच के बाद 21 नवंबर को गृह मंत्रालय को 300 पन्नों की रिपोर्ट सौंपी है।

 

2 गेटमैन पर गिर सकती है गाज: जांच में कहा गया है कि गेट नंबर 27 जोड़ा फाटक अमृतसर के गेटमैन अमित अपनी ड्यूटी निभाने में नाकाम रहा। उसने ऐसी घटना को घटित होने से रोकने के लिए अग्रिम उपाय नहीं किए थे। जांच रिपोर्ट में गेट नंबर 26 के एक अन्य गेटमैन निर्मल सिंह को भी इस विफलता के लिए दोषी ठहराया गया है, क्योंकि वह गेट नंबर 27 के गेटमैन को समय पर लोगों के रेलवे ट्रैक पर जमा होने की सूचना नहीं दे सका। उसे रेलवे ट्रैक पर दशहरा देखने के लिए आए लोगों की उपस्थिति के बारे में शाम साढ़े 5 बजे पता चल गया था, लेकिन उसने गेट 27 के गेटमैन अमित सिंह को इसकी सूचना शाम 6.40 से 6.45 के बीच दी। उसने संबंधित स्टेशन मास्टर को भी सूचना नहीं दी।

 

आयोजक अनुमति लेते तो इतना बड़ा हादसा न होता: जांच रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि दशहरा समारोह करने के लिए आयोजकों के पास कोई पूर्व अनुमति नहीं थी। धोबीघाट पर दशहरा समारोह गैर कानूनी ढंग से आयोजित किया गया था, जिसमें दर्शकों के जीवन के बचाव व सुरक्षा की तरफ ध्यान नहीं दिया गया। रिपोर्ट के मुताबिक आयोजकों को पता था कि दशहरा देखने के लिए भारी गिनती में लोग आएंगे, लेकिन फिर भी उन्होंने रावण दहन की घटना से पहले सुरक्षा के पर्याप्त बंदोबस्त नहीं करवाए। न तो पुलिस प्रशासन को दशहरा आयोजित करने की जानकारी दी और न ही इसके संबंध में रेलवे अधिकारियों को सूचित किया।

 

150 से ज्यादा लोगों से हुई पूछताछ: जांच अधिकारियों ने घटना से जुड़े 150 से ज्यादा लोगों से पूछताछ की। इके साथ ही, नवजोत सिंह सिद्धू, उनकी पत्नी, रेलवे डीआरएम, डीसी, पुलिस कमिश्नर सहित 50 से ज्यादा लोगों को समन भेजकर तलब किया गया था। सिद्धू ने अपनी पत्नी के हाथ बंद लिफाफे में अपना जवाब भेज दिया था। बताया जाता है कि इसमें उन्होंने कहा था कि घटना वाले दिन सहित चार दिन तक वे राज्य से बाहर थे। इसके बाद उन्हें पेशी से मुक्त कर दिया गया।

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