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नशा इतना नासूर! ड्रग एडिक्ट बेटा-पति मर न जाएं इसलिए जेलों में मांएं और पत्नियां पहुंचा रहीं नशा

Amritsar News - नशे की लत में पड़कर प्रदेश के युवा तो नशेड़ी और तस्कर बनकर जेलों में जा बैठे, अब वह जेल में नशे की तोड़ से न मरें इसके लिए...

Jan 23, 2020, 07:15 AM IST
Amritsar News - drug addiction so much drug addicts sons and husbands do not die so mothers and wives are getting intoxicated in jails
नशे की लत में पड़कर प्रदेश के युवा तो नशेड़ी और तस्कर बनकर जेलों में जा बैठे, अब वह जेल में नशे की तोड़ से न मरें इसके लिए उनकी मांएं, प|ियां और रिश्तेदार जेलों में नशा पहंुचाने को मजबूर हो रहे हैं। जेलों में नशे के कारण बढ़ती आत्महत्याओं और मौतों के बाद भास्कर ने सूबे भर में जेलों में नशा सप्लाई करते पकड़े गए लोगों का आंकड़ा जुटाया तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। पता चला कि 3 साल में 101 केसों में जेलों में नशा सप्लाई करने वाले लोग कोई और नहीं बल्कि नशेड़ी युवाओं की मांएं, प|ियां, भाई या नजदीकी रिश्तेदार हैं जो तस्करी के आरोप में सजा भी काट चुके हैं। ये हालात इसलिए हैं क्योंकि प्रदेश की पूर्व व मौजूदा सरकारों ने नशे के खिलाफ अभियान तो छेड़े, लेकिन उनमें कोई बड़ा तस्कर नहीं बल्कि नशेड़ियों को ही जेल में डाल दिया गया। जबकि इन्हें नशामुक्ति व पुर्नवास की जरूरत थी। अब जेलों में बंद नशेड़ी युवा ओट केंद्रों से पर्याप्त इलाज न मिलने से कभी असामान्य मौत तो कभी आत्महत्याओं की तरफ बढ़ रहे हैं।

भास्कर पड़ताल
इसलिए बने ये हालात

क्योंकि... सरकार और सिस्टम होश में नहीं हैं

ये सिस्टम है... प्रदेश की 24 जेलों में से 9 में नशामुक्ति केंद्र हैं, जिनमें से मात्र 3 ही फंक्शनल हैं, बाकी में स्टाफ नहीं है। यहां साइकोलोजिस्ट नहीं है, मनोचिकित्सक सप्ताह में दो दिन ही बैठते हैं। हालांकि, हाइकोर्ट के निर्देश के बाद नशामुक्ति केंद्र की बजाय 13 जेलों में ओट क्लीनिक खोल दिए गए, यहां कैदियों को बुप्रिनोरफिन की टेबलेट देकर शांत तो रखा जाता है, मगर यह पर्याप्त इलाज नहीं है।

सरकारों के ये हाल...





एनसीआरबी रिपोर्ट में खुलासा... देश में सर्वाधिक आत्महत्याएं सूबे की जेलों में

एनसीआरबी (नेशनल क्राइम रिकाॅर्ड ब्यूरो) के प्रिजन स्टैटिक्स इंडिया सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक पिछले 3 साल में देश की जेलों में सर्वाधिक आत्महत्याएं व एचआईवी से मौतें पंजाब की जेलों में हुई हैं। यह आंकड़ा कम होने की बजाय बढ़ता जा रहा है। वहीं, जेलों में सामान्य मौतों में भी पंजाब देश में पिछले 3 साल में दूसरे व तीसरे नंबर पर है। पंजाब की जेलों में सामान्य व असामान्य तौर पर मरे कैदी व हवालातियों में ज्यादातर एनडीपीएस एक्ट यानी नशे से संबंधित थे। पंजाब जेल प्रबंधन ने जेलों में बढ़ रहीं आत्महत्याओं व मौत के रुझान की माइक्रो स्टडी करने को आईसीपी (इंस्टीट्यूट ऑफ क्रेक्शनल एडमिनिस्ट्रेशन) को पत्र भी लिखा है।

कहां कितने दर्ज हुए केस

परिवारों की बर्बादी के 101 मामले

नशे के कुचक्र में फंसे परिवारों की बर्बादी का हाल जानने को जब भास्कर ने प्रदेश की जेलों का रिकॉर्ड खंगाला तो 101 केस सामने आए। इनमें नशे के केसों में बंद कैदियों व हवालातियों को नशा पहुंचाने के चक्कर में उनकी मांएं, प|ियां व भाई अब जेल में बैठे हैं। फिरोजपुर में सबसे ज्यादा 41 केस, लुधियाना में 13, पटियाला में 12, बठिंडा में 5, संगरूर में 9, कपूरथला में 2, अमृतसर में 2, मुक्तसर में 1 और रोपड़ में 1 केस शामिल हैं। वहीं, गुरदासपुर में 13 व होशियारपुर में 2 केस सामने आए हैं। जेल में नशे के केसों में बंद व्यक्तियों के परिजनों को इस दलदल में उतरने के लिए मजबूर कर दिया है।

ये हैं उदाहरण...कैसे-कैसे केस

बठिंडा
-17 जुलाई 2018 को जेल में बेटे को नशा देने आई एक महिला और उसकी बहू को पकड़ा। 20 ग्राम हेरोइन बरामद हुई।

-6 सितंबर 2018 को गांव मलूका वासी महिला पति काला सिंह को जेल में 9 ग्राम हेरोइन देने पहुंची तो पकड़ी गई।

-नवंबर 2018 में अमृतसर के जगतार को उसका रिश्तेदार हेरोइन दे गया। तलाशी में जगतार पकड़ा तो खुलासा हुआ।
ऐसे समझिए...

सूबे की 24 जेलों में 3 माॅर्डर्न जेलों में एक फरीदकोट की है। भास्कर टीम ने जब यहां हालात जाने तो पता चला यहां 1850 कैदी हैं। इनमें 600 नशेड़ी हैं, जिन्हें जेल में चलते ओट सेंटर से बुप्रिनोरफिन टेबलेट रोजाना दी जाती है ताकि वे शांत रहें। स्थाई मनोचिकित्सक न होने से यही उपचार का तरीका है। वहीं, 270 कैदी एचआईवी पॉजिटिव हैं। इनमें भी कई नशेड़ी हैं। 2019 में इस जेल में 8 कैदियों ने दम तोड़ा व 1 ने आत्महत्या की। 3 माह पहले अमृतसर जेल से यहां 200 नशेड़ी कैदी शिफ्ट हुए। इससे यह जेल सबसे संवेदनशील हो चुकी है। यही हालात अमृतसर, फिरोजपुर, कपूरथला जेल के भी हैं।

फरीदकोट मॉर्डर्न जेल के हाल से जानें सूबे की जेलों की हालत

सूबे की 24 जेलों में 3 माॅर्डर्न जेलों में एक फरीदकोट की है। भास्कर टीम ने जब यहां हालात जाने तो पता चला यहां 1850 कैदी हैं। इनमें 600 नशेड़ी हैं, जिन्हें जेल में चलते ओट सेंटर से बुप्रिनोरफिन टेबलेट रोजाना दी जाती है ताकि वे शांत रहें। स्थाई मनोचिकित्सक न होने से यही उपचार का तरीका है। वहीं, 270 कैदी एचआईवी पॉजिटिव हैं। इनमें भी कई नशेड़ी हैं। 2019 में इस जेल में 8 कैदियों ने दम तोड़ा व 1 ने आत्महत्या की। 3 माह पहले अमृतसर जेल से यहां 200 नशेड़ी कैदी शिफ्ट हुए। इससे यह जेल सबसे संवेदनशील हो चुकी है। यही हालात अमृतसर, फिरोजपुर, कपूरथला जेल के भी हैं।

जेलों में सुसाइड व मौत पर माइक्रो स्टडी को आईसीपी को लिखा है पत्र : एडीजीपी

जेलों में बढ़ते सुसाइड व मौत का आंकड़ा गंभीर है। आईसीपी चंडीगढ़ को इस पर माइक्रो स्टडी करने के लिए पत्र लिखा है। ताकि कारणों को जाना जा सके। जेलों में नशामुक्ति केंद्र खोलने के हम प्रयास कर रहे हैं। फिलहाल दो-तीन जेलों में हैं। इतने कैदियों के लिए हमें साइकोलोजिस्ट और मनोचिकित्सक दोनों डैडिकेटिड चाहिए तभी हल होगा। -पीके सिन्हा, एडीजीपी, जेल

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