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तरनतारन ब्लास्ट में पुलिस को मिले अहम सुराग, पूर्व उप मुख्यमंत्री सुखबीर बादल पर हमले की थी साजिश

एक वर्ष पहले
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पंजाब के पूर्व उपमुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल।
  • 4 सितम्बर की रात करीब साढ़े 12 बजे गांव कलेर के पास खाली प्लॉट में हुआ था धमाका
  • दो युवकों की हो गई थी मौके पर ही मौत, तीसरा हुआ था गंभीर घायल

तरनतारन. पंजाब के तरनतारन जिले में कलेर गांव में 4 सितम्बर की रात को हुए धमाके की जांच में सुरक्षा एजेंसियों को अहम सुराग मिले हैं। सूत्रों के मुताबिक, यह विस्फोटक 2016 में पूर्व उपमुख्यंत्री सुखबीर बादल पर हमले के लिए तैयार किया गया था। हालांकि, चरमपंथी सफल नहीं हुए। ऐसे में उन्होंने विस्फोटक को कलेर गांव में जमीन में छिपा दिया था, जिसमें 4 सितंबर को निकालते वक्त विस्फोट हो गया।
 
सूत्रों ने बताया कि जांच में यह बात भी सामने आई है कि 2015 में बरगाड़ी बेअदबी घटना से आक्रोशित चरमपंथियों ने इस हमले की योजना बनाई थी।
कलेर गांव में 4 सितम्बर की रात एक प्लॉट में हुए विस्फोट में हरप्रीत सिंह हैप्पी निवासी बछड़े, विक्रमजीत सिंह विक्की निवासी कदगिल की मौत हो गई थी, जबकि गुरजंट सिंह पुत्र रेशम सिंह गंभीर रूप से जख्मी हो गया था। इस धमाके के बाद एनआईए, एसएफएल, बीडीडीएस, एनजीएस, आईबी अलावा पंजाब पुलिस द्वारा अपने-अपने स्तर पर जांच शुरू की।
 
तरनतारन जिला पुलिस अभी तक 7 आरोपियों को गिरफ्तार कर पूछताछ के बाद जेल भेज चुकी है। वहीं, मामले की गंभीरता को देखते हुए यह केस एनआईए को सौंप दिया गया। सूत्रों के मुताबिक, गिरफ्तार मलकीत सिंह उर्फ शेर सिंह ने पूछताछ में बताया कि पूर्व उपमुख्यमंत्री को मारने के लिए साजिश बिक्रम सिंह पंजवड़ ने रची थी। उसे देसी बम बनाने का अनुभव था और उसने दो बम बना भी लिए थे।
 
हालांकि, अक्टूबर 2016 में यह साजिश उस वक्त धरी रह गई, जब श्री गुरु रामदास जी के प्रकाशोत्सव के मौके पर सुखबीर सिंह बादल अमृतसर श्री हरमंदिर साहिब पहुंचे। यहां सुखबीर की भारी सुरक्षा को देखते हुए पंजवड़ घबरा गया। इसके बाद पंजवड़ 2018 में ऑस्ट्रिया भाग गया था, लेकिन इन बमों को शेरा ने छिपा दिया था। सूत्रों का कहना है कि इन दिनों वह पाकिस्तान में खालिस्तान जिंदाबाद फेर्स के जरिए यहां चरमपंथियों के संपर्क में है।
 
माना जा रहा है कि उसी की सूचना पर धमाके वाले दिन मारे गए दोनों युवक हरप्रीत सिंह हैप्पी, विक्रमजीत सिंह विक्की और घायल हुआ गुरजंट सिंह इन बमों को निकालने गए थे।
 

ये है बेअदबी प्रकरण
अक्टूबर 2015 में पवित्र ग्रंथ की बेअदबी के बाद बरगाड़ी और बहबल कलां में सिख जत्थेबंदियों और पुलिस में झड़प हुई थी। इस दौरान फायरिंग में 2 लोगों की मौत हो गई थी। बेअदबी का पहला मामला 14 जुलाई 2015 को बुर्ज जवाहर सिंह वाला में हुआ। सितंबर 2016 से दिसंबर 2015 के बीच सूबे में बेअदबी की 60 घटनाएं हुई। जांच के लिए तत्कालीन प्रकाश सिंह बादल सरकार ने आयोग बनाया। बाद में कांग्रेस सरकार आने पर मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने जांच जस्टिस रणजीत सिंह कमीशन को सौंप दी।
 

जांच में कहा गया, बादल को थी घटनाक्रम की जानकारी
रणजीत सिंह आयोग ने कहा था- पूरे घटनाक्रम के बारे में सुखबीर बादल को पता था। 13 अक्टूबर 2015 की रात 2 बजे बादल ने उन्हें फोन कर कोटकपूरा में हालात की जानकारी ली। कॉल डिटेल और बयान के आधार पर हम मानते हैं कि न सिर्फ बादल, बल्कि उनके कई अधिकारियों को भी इसकी जानकारी थी।
 

राम रहीम, बादल पिता-पुत्र और अक्षय कुमार से हो चुकी पूछताछ
इसके बाद राज्य सरकार की तरफ से बनाई गई एसआईटी बादल पिता-पुत्र और रोहतक जेल में बंद डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह के अलावा बॉलीवुड कलाकार अक्षय कुमार से भी पूछताछ कर चुकी है। आरोप यह भी है कि गुरमीत राम रहीम सिंह ने अपनी फिल्म एमएसजी-2 के रिलीज के वक्त पंजाब में माहौल बिगाड़ने के लिए यह सब कराया था और इससे पहले फिल्म की रिलीज की मंजूरी के लिए अक्षम कुमार ने राम रहीम की मुलाकात बादल परिवार से कराई थी। एसआईटी से पूछताछ में अक्षय कुमार इस बात से इनकार कर चुके हैं, वहीं पंजाब में लोकसभा चुनाव में भी अकाली दल के प्रति रोष देखने को मिला।
 
 

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