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पंजाब की बासमती दुनिया में फिर बिखेरेगी खुशबू, प्रतिबंधित पेस्टीसाइड के बिना खेती को आगे आए किसान

मानक पूरा न करने पर यूरोप और अरब देशों से दो साल से लौटाई जा रही है बासमती

Dainik Bhaskar

Aug 13, 2018, 06:56 AM IST
farmers agree for pesticide free farming

अमृतसर. पंजाब की बासमती एक बार फिर यूरोप और अरब देशों की मार्केट में खुशबू बिखेरने की तैयारी में है। पेस्टीसाइड के इस्तेमाल के चलते दो साल से इसे विदेशों से लौटाया जा रहा है। बासमती का 10 हजार करोड़ का निर्यात करने के साथ पंजाब देश में नंबर वन है। विदेश से लौटाए जाने के बाद सूबे में इसका रकबा काफी कम हो गया था। अब खेतीबाड़ी विभाग, राइस मिलर, निर्यातक व खुद किसान इसकी गुणवत्ता को बरकरार रखने व विदेशी मार्केट में इसकी मांग और बढ़ाने के लिए एकजुट हो गए हैं। इसके तहत गांव-गांव जाकर उन पेस्टीसाइड के इस्तेमाल से किसानों को रोका जाने लगा है, जिसके कारण इसकी मार्केटिंग खराब हुई। पंजाब राइस एक्सपोर्टर एसो. के डायरेक्टर अशोक सेठी ने कहा खेतीबाड़ी विभाग की अगुवाई में एसोसिएशन अगस्त से अक्टूबर तक काम करेगी। इसके लिए सूबे को 3 हिस्सों में बांटा गया है। घर-घर जाकर किसानों को जागरूक किया जा रहा है। कई किसान आगे भी आए हैं।

पेस्टीसाइड ने की मार्केट खराब: साल 2016-17 में यूरोपियन देशों से बासमती वहां के तय मानदंड पर खरा न उतरने के कारण वापस आ गई थी। वहां की सरकार ने प्रति किलो चावल में कीटनाशक की मात्रा .01 पीपीएम तय की है, जबकि हमारे बासमती चावल में यह 1 पीपीएम तक पाई गई थी और कन्साइनमेंट रिजेक्ट कर दी गई थी। अरब देशों ने भी इसकी गुणवत्ता सुधारने को कहा है।

रकबे में आई गिरावट: पंजाब में पहले बासमती का रकबा 4 लाख हेक्टेयर के करीब था, लेकिन विदेशों में मांग बढ़ने के बाद यह 8 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया था। विदेशों से वापसी के कारण इसका रेट गिर गया और किसानों ने इसकी बिजाई कम कर दी नतीजतन रकबा फिर नीचे आ गया।

हर साल 10 हजार करोड़ का निर्यात: भारत बासमती चावल में विश्व बाजार का अग्रणी निर्यातक देश है। हर साल औसतन 23 हजार करोड़ रुपए का चावल निर्यात होता है। पंजाब की बात करें तो इसमें इसका हिस्सा 10 हजार करोड़ होता है, जो कि पूरे देश में सबसे अधिक है।

रकबा 5 लाख हेक्टेयर, 20 लाख टन पैदावार का अनुमान: आत्मा स्कीम के डायरेक्टर डॉ. मनदीप सिंह पुजारा के मुताबिक सूबे में इस बार 5 लाख हेक्टेयर रकबे में बीजी गई बासमती का उत्पादन 20 लाख टन होने का अनुमान है। इसकी खुशबू, स्वाद और लंबाई देश ही नहीं बल्कि विदेश की तुलना में भी बेहतर है।

क्या इस्तेमाल करें, क्या न करें: खेतीबाड़ी विभाग के सचिव काहन सिंह पन्नू ने बताया कि तंदरुस्त पंजाब मुहिम के तहत बासमती की गुणवत्ता सुधारने के लिए किसानों को 5 प्रमुख कीटनाशकों ट्राईसाइकलाजोल, कारबैंडाजिम, बाईमीथॉक्सम, ऐसीफेट व ट्राईएजोफास का इस्तेमाल न करने की हिदायत दी जा रही है।

- पंजाब एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी लुधियाना की सिफारिशों के मुताबिक किसान क्लोरोपाइरी फास, कारटाप हाइड्रोक्लोराइड,फ्लूबेंडामाइड व कोंफीडोर का इस्तेमाल करें। इसी तरह से उल्ली नाशक के तौर पर कारबेंडाजिम, प्रोपिकानोजोल, टैबूकोनाजोल, फ्लूजिलाजोल, कारबंडिज्म, नटीवो प्रयोग में लाएं।

- पंजाब की जिस बासमती ने दुनिया भर में सिक्का जमाया था वह भारतीय सेना ने उन्हें लाकर दी थी। खेतीबाड़ी से जुड़े लोगों की मानें तो पहले यहां पर भी देश के दूसरे हिस्सों की तरह आम बासमती उगाई जाती रही है। 1965 की जंग के दौरान लाहौर तक पहुंचे भारतीय सैनिकों को वहां इसके बीज की कुछ बोरियां मिलीं और वे इसे ले आए। इसके बाद से यहां भी इसकी खेती की जाने लगी। आज पूरी दुनिया में इसका नाम है।

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