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गुड न्यूज / मोहाली या अमृतसर में बनेगा सूबे का पहला क्यूलिनरी आर्ट इंस्टीट्यूट : सिद्धू



first culinary art institute of province will be built in Mohali or Amritsa
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first culinary art institute of province will be built in Mohali or Amritsa

  • अमृतसर में 3 दिवसीय विश्व फूड फेस्टिवल और विरासती रसोई सम्मेलन शुरू 

Dainik Bhaskar

Oct 13, 2018, 08:07 AM IST

शिवानी सहगल, अमृतसर.  पंजाब को जल्द ही पहला क्यूलिनरी आर्ट इंस्टीट्यूट मिल जाएगा, जिसके बाद युवाओं को इस पाक कला को सीखने के लिए विदेश जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इसके साथ ही फूड स्ट्रीट भी 2020 तक लोगों के हवाले कर दी जाएगी जिसके लिए तकरीबन 10 करोड़ रुपए का ऐलान किया गया। यह अनाउसमेंट कैबिनेट मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू ने स्थानीय किला गोबिंदगढ़ में आयोजित किए गए तीन दिवसीय विश्व फूड फेस्टिवल और विरासती रसोई सम्मेलन के उद्घघाटनी समारोह पर की। इस दौरान किला गोबिंदगढ़ के फाइनल टचअप के लिए भी 15 करोड़ रुपए का ऐलान किया गया। 


समारोह का उद्घघाटन करने के बाद सिद्धू ने कहा कि टूरिज्म इंडस्ट्री के बूस्ट होने पर इकोनॉमी अपने आप खड़ी हो जाती है और मेन्यूफेक्चरिंग के बिना कोई राज्य नहीं चल सकता। इसीलिए क्यूलिनरी आर्ट इंस्टीट्यूट जल्द ही मोहाली में या फिर अमृतसर के नजदीक बनाया जाएगा ताकि टेलेंटेड बच्चों को यहीं सिखाया जा सके और फिर वह यहीं कार्य करें। उन्होंने कहा कि पाक कला को संजोए रखना समय की जरूरत है और फूड फेस्टीवल के जरिए उस कला के मोतियों को एक ही माला में पिरोने का काम किया जा रहा है।

 

वर्ल्ड कल्चर क्यूलिनरी हेरिटेज कमेटी की ओर से करवाए जा रहे फूड फेस्टीवल में 43 देशों के तकरीबन 130 शेफ हिस्सा ले रहे हैं वहीं देश के 20 राज्यों के शेफ भी पहुंचे हैं। खास तरह के फूड पेश करते हुए छात्रों के लिए मास्टर क्लास भी लगाई जा रही है। इस अवसर पर डीसी कमलजीत सिंह संघा, वर्ल्ड कल्चर कलिनरी हेरिटेज कमेटी के चेयरमैन शेफ मंजीत गिल, किला गोबिंदगढ़ की डायरेक्टर दीपा साही सहित अन्य उपस्थित थे। 
किला गोबिंदगढ़ के फाइनल टच के लिए भी 15 करोड़ रुपए का ऐलान 

 

भारत के लोग मसाले खुद पीसते हैं, इसलिए यहां का खाना विश्व प्रसिद्ध है : गुगलर 
समिट में मुख्य मेहमान के रूप में पहुंचे विश्व शेफ एसोसिएशन के प्रेसीडेंट थॉमस ए गुगलर ने कहा कि केवल भारत ही ऐसा इकलौता देश है जिसने अपनी पाक कला को समेटा हुआ है। आज भी यहां खाना बनाने के लिए बेसिक तकनीक को अपनाया जाता है। यहां लोग खुद मसाले पीसते हैं और अन्य चीजों पर डिपेंट नहीं रहते जिसके चलते ही यहां का खाना विश्व प्रसिद्ध है और लोग हमेशा इस खाने को चखने के लिए बेकरार रहते हैं। 

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