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अमृतसर / स्कैनर के बावजूद सेब की पेटियों में भारत पहुंचा 32 किलो सोना



पुलिस गिरफ्त में आरोपी पुलिस गिरफ्त में आरोपी
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पुलिस गिरफ्त में आरोपीपुलिस गिरफ्त में आरोपी

  • दिल्ली का कस्टम विभाग भी कर रहा जांच 
  • पाक में लगे स्कैनर आसानी से पकड़ सकते थे खेप  
     

Dainik Bhaskar

Dec 07, 2018, 07:38 AM IST

अमृतसर. इंटीग्रेटेड चैक पोस्ट अटारी के जरिए पाकिस्तान से सेब की पेटियों में लाए जा रहे 32 किलो सोने की बरामदगी ने पाकिस्तान की नीति और नीयत दोनों पर सवाल खड़ा कर दिया है। चूंकि सरहद पार स्कैनर लगा हुआ है और ऐसी स्थिति में इस तरह की घटनाएं संभव नहीं हैं। इससे स्पष्ट है कि इसमें कहीं न कहीं पड़ोसी देश की मिलीभगत है। 

 

ऐसे हुआ खुलासा : अफगानिस्तान से सेबों की पेटियां लेकर बुधवार को बाद दोपहर 2.30 बजे पाकिस्तानी ट्रक नंबर-एलएक्सके 7011 भारतीय सीमा में दाखिल हुआ था। इसके बाद सहायक कमिश्नर बसंत कुमार की अगुवाई वाली टीम ने एक पेटी चैक को करने के लिए उतारा।

 

कस्टम कमिश्नर दीपक कुमार गुप्ता ने बताया कि चूंकि एक पेटी का वजन 20 किलो होता है, जिसमें 19 किलो सेब तथा एक किलो पेटी का वजन होता है। सेब तोलने के बाद पेटी भारी लगी और तोला गया तो उसका वजन तीन किलो निकला। फिर उसे तोड़ा गया तो उसकी तली में प्लास्टिक तथा रबर से सोने की प्लेटें काले टेप से चिपकाई मिलीं। इसके बाद दूसरी पेटियों की जांच की गई तो उनमें कुल 32.654 किलो सोना बरामद हुआ। दीपक गुप्ता ने बताया कि माल मंगाने वाला दिल्ली से संबंध रखता है इसलिए दिल्ली कस्टम को भी जांच में शामिल किया गया है।
 

पाक में लगे स्कैनर आसानी से पकड़ सकते थे उक्त खेप :  
हालांकि कस्टम अधिकारियों ने सेब भेजने वाली तथा मंगाने वाली कंपनी के अलावा किसी का सीधे तौर पर नाम नहीं लिया। लेकिन पाकिस्तान की तरफ जो स्कैनर लगा हुआ है और उससे इस तरह की वस्तुएं वहीं पकड़ी जा सकती हैं। इससे साफ है कि कहीं न कहीं पाकिस्तानी कस्टम व सुरक्षा एजेंसियों ने इसमें लापरवाही बरती है।  

 

काबुल से दिल्ली के लिए आई थी खेप : 
कस्टम कमिश्नर दीपक गुप्ता का कहना है कि यह माल काबुल की प्रसिद्ध फर्म अमीनी सादरी काबुल की तरफ से दिल्ली के यूनिवर्सल सोल्यूशन के लिए भेजा गया था। उनका कहना है कि ट्रक पाकिस्तान से गया था और लोड होकर सीधे आईसीपी में आया था। काबुल से जो ड्राइवर गाड़ी पाकिस्तान लाया था वह वहीं रह गया आगे गुल खान नामक ड्राइवर उसे लेकर यहां आया था। चूंकि इसमें ड्राइवर का दोष नहीं था इसलिए उसे छोड़ दिया गया और गाड़ी को कब्जे में ले लिया गया। 

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