चंडीगढ़ / गुरुद्वारा श्री बेर साहिब को लाइटों से सजाया गया, यहीं पर बाबा नानक ने कई साल गुजारे

सजाया गया गुरूद्वारा श्री बेर साहिब। फोटो लखवंत सिंह सजाया गया गुरूद्वारा श्री बेर साहिब। फोटो लखवंत सिंह
सजाया गया गुरूद्वारा श्री बेर साहिब। फोटो लखवंत सिंह सजाया गया गुरूद्वारा श्री बेर साहिब। फोटो लखवंत सिंह
सजाया गया गुरूद्वारा श्री बेर साहिब। फोटो लखवंत सिंह सजाया गया गुरूद्वारा श्री बेर साहिब। फोटो लखवंत सिंह
गुरूद्वारे पर फूलों की वर्षा करते सुखचरण। गुरूद्वारे पर फूलों की वर्षा करते सुखचरण।
गुरूद्वारें में दर्शन के लिए पहुंची संगत गुरूद्वारें में दर्शन के लिए पहुंची संगत
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सजाया गया गुरूद्वारा श्री बेर साहिब। फोटो लखवंत सिंहसजाया गया गुरूद्वारा श्री बेर साहिब। फोटो लखवंत सिंह
सजाया गया गुरूद्वारा श्री बेर साहिब। फोटो लखवंत सिंहसजाया गया गुरूद्वारा श्री बेर साहिब। फोटो लखवंत सिंह
सजाया गया गुरूद्वारा श्री बेर साहिब। फोटो लखवंत सिंहसजाया गया गुरूद्वारा श्री बेर साहिब। फोटो लखवंत सिंह
गुरूद्वारे पर फूलों की वर्षा करते सुखचरण।गुरूद्वारे पर फूलों की वर्षा करते सुखचरण।
गुरूद्वारें में दर्शन के लिए पहुंची संगतगुरूद्वारें में दर्शन के लिए पहुंची संगत

  • काली बेई किनारे गुरूद्वारों में भारी संख्या में संगत पहुंच रही है

दैनिक भास्कर

Nov 06, 2019, 04:13 PM IST

कपूरथला/सुल्तानपुर लोधी. श्री गुरू नानक देव जी के 550वें प्रकाश पर्व को लेकर धार्मिक कार्यक्रम शुरू हो गए है। सुल्तानपुर लोधी के गुरुद्वारा श्री बेर साहिब सहित अन्य गुरुद्वारों को रंग बिरंगी लाइटों सहित दीयों से सजाया गया है।

 

गुरुद्वारे के पास से बहती बेई के पानी में संगतें स्नान कर रही है। गुरूजी ने यहां पर अपनी बहन नानकी के घर में रहते हुए अपने जीवन के 14 साल 9 महीने और 13 दिन गुजारे थे। काली बेई के किनारे ही बैठकर वे प्रभु भक्ति में लीन रहते थे।

 

सुल्तानपुर लोधी सिख धर्म के संस्थापक श्री गुरु नानक देव जी की कर्मस्थली रही है। गुरूजी ने नवाब के मोदी खाने में नौकरी करते हए 13-13 तोल कर सभी की झोलियां खुशियों से भर दी। इतना ही नहीं, काली बेई में डुबकी लगा कर तीन दिनों बाद गुरुद्वारा संत घाट में प्रगट होकर मूल मंत्र का उच्चारण कर श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बुनियाद भी डाली।

 

यहां पर मनाए जा रहे प्रकाश पर्व को लेकर हजारों की संख्या में संगत पहुंच रही है। सरकार की ओर से यहां आने वाली संगतों के रहने के लिए टेंट लगाए गए है।

 

सुल्तानपुर लोधी में आज कई गुरूद्वारों में पहुंच कर संगत नतमस्तक हो रही है जहां पर गुरूजी ने पहुंच कर लोगों को ज्ञान दिया था।

 

 

 

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