कथा सुनना सहज, मगर उसके अंतर तक उतरने की कला एक संत ही सिखाता है : स्वामी ज्ञानदेव

Amritsar News - कथा मानव जाति को सुख समृद्धि और आंनद देने वाली होती है। भगवान स्वयं कल्याण एवं सुख के मूल स्रोत हैं। जो संपूर्ण...

Oct 22, 2019, 07:31 AM IST
कथा मानव जाति को सुख समृद्धि और आंनद देने वाली होती है। भगवान स्वयं कल्याण एवं सुख के मूल स्रोत हैं। जो संपूर्ण विद्याओं के ईश्वर समस्त भूताें के अधीश्वर, ब्रह्मवेद के अधिपति और साक्षात परमात्मा हैं।

वह समस्त जीवों को आत्मज्ञान देकर ईश्वर से जुड़ने की कला सिखाते हैं। यह प्रवचन माल रोड स्थित निर्मल वेदांत आश्रम में चल रहे 69वें अखिल भारतीय निर्मल वेदांत सम्मेलन में स्वामी ज्ञानदेव सिंह महाराज ने किए। स्वामी सहजदीप सिंह के दिशा निर्देशों में सुबह 7 से 10 और शाम 4 से 6 बजे तक की जा रही कथा में शहर समेत देश भर के संत महात्मा शामिल हुए। इस मौके पर स्वामी ने कहा कि भगवान की कथा में गोता लगाने से मानव को प्रभु की प्रप्ति होती है। वहीं कथा सुनने और उसमें उतरने में अंतर होता है, सुनना तो सहज है लेकिन इसमें उतरने की कला हमें केवल एक संत ही सिखा सकते हंै। हमारे समस्त वेद-शास्त्र सत्संग की महिमा का व्याख्यान कई प्रकार से करते हैं। महाराज ने कहा कि एक घड़ी के सत्संग की तुलना स्वर्ग की समस्त संपदा से की गई है। इस मौके पर स्वामी दिव्य चेतना महाराज, स्वामी माधवानंद महाराज हरिद्वार वाले, स्वामी हरिहर नंद महाराज, स्वामी वैराग्य महाराज, स्वामी जगदीश हरि, स्वामी सतप्रीत हरि, स्वामी मंगलप्रीत हरि, स्वामी आत्मप्रकाश ज्योति गिरि, स्वामी प्रकाशा नंद गिरि, स्वामी दर्शन शास्त्री महाराज, स्वामी मंगल मूर्ति, स्वामी साध्वी सप्तप्रीत हरि, साध्वी करुणा हरि आदि मौजूद थे।

निर्मल वेदांत आश्रम में चल रहे 69वें अखिल भारतीय निर्मल सम्मेलन में मौजूद महात्मा।

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