पंजाब / अकाली सरकार में भी सीनियर किए गए दरकिनार, जूनियर सुमेध सिंह को बनाया था पुलिस महानिदेशक

आईपीएस सुमेध सैनी। आईपीएस सुमेध सैनी।
X
आईपीएस सुमेध सैनी।आईपीएस सुमेध सैनी।

  • कैप्टन सरकार में मो. मुस्तफा-चट्टोपाध्याय को छोड़ गुप्ता को डीजीपी बनाने का मामला पहुंचा था हाईकोर्ट
  • नियुक्ति को लेकर विवाद पहला नहीं, 2014 के चुनाव में चुनाव आयोग ने सुरेश अरोड़ा को बनाया था डीजीपी

Dainik Bhaskar

Jan 18, 2020, 09:52 AM IST

चंडीगढ़. पंजाब में डीजीपी की नियुक्ति को लेकर विवाद पहला नहीं है। अकाली-भाजपा सरकार में सुमेध सिंह सैनी काे डीजीपी लगाने पर भी विवाद हो गया था। उस वक्त भी तीन सीनियर लाेगों के होने के बावजूद सैनी को डीजीपी पद की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। उसी दौरान सैनी छ़ुट्टी पर चले गए। फिर 2014 के चुनाव आए तो चुनाव आयोग ने एक माह के लिए सुरेश अरोड़ा को डीजीपी बना दिया।

चुनाव होते ही सैनी लौट आए और फिर से वह डीजीपी पद पर तैनात हो गए। लेकिन इसका अकाली दल ने विरोध किया। उसके बाद सुरेश अरोड़ा को ही 25 अक्टूबर 2015 को दोबारा डीजीपी लगा दिया गया। 2017 कैप्टन में डीजीपी पद को लेकर लॉबिंग होने लगी। दौड़ में मुहम्मद मुस्तफा आगे थे। परंतु कैप्टन ने अरोड़ा को डीजीपी पद पर काम करने के लिए कहा।

जबकि अरोड़ा की केंद्र में डेपुटेशन में बतौर सीआरपीएफ डीजी पद की फाइल क्लियर हो चुकी थी। कैप्टन के फैसले से पुलिस अफसरों में लाबिंग और बढ़ गई। अरोड़ा को 31 दिसंबर 2018 को एक साल और तीन-तीन महीने की एक्सटेंशन दी गई। अभी एक्सटेंशन का दौर चल रहा था कि सरकार ने केंद्र को तीन अफसरों का पैनल भेजा, जिसमें गुप्ता को डीजीपी बनाया गया।

इस तर्जुबे को देखकर की जाती है डीजीपी की नियुक्ति
पंजाब में आतंकवाद के बाद से और पंजाब के बॉर्डर स्टेट होने के नाते डीजीपी की नियुक्ति में इंटेलिजेंस में काम करने वाले अफसरों को प्राथमिकता दी जाती है। यह देखा जाता है कि डीजीपी बनने वाले आईपीएस अफसर ने इंटेलिजेंस में मुख्य भूमिका निभाई हो। कुछ वर्षों के दौरान जितने भी आईपीएस अफसरों को डीजीपी लगाया गया है, उनमें चाहे सुरेश अरोड़ा हों, सुमेध सैनी हों, या दिनकर गुप्ता सभी ने इंटेलिजेंस चीफ के तौर पर काम किया है। जबकि मोहम्मद मुस्तफा और सिद्धार्थ चट्टोपाध्याय ने इंटेलिजेंस में काम नहीं किया है। सरकार दिनकर गुप्ता की नियुक्ति के लिए भी यह भी एक तर्क देती है।
 

गुप्ता की नियुक्ति के वक्त चार नाम थे पैनल में

जब दिनकर गुप्ता की नियुक्ति हुई थी, तब पंजाब सरकार ने चार आईपीएस अफसरों के नाम डीजीपी के पद के लिए केंद्र को भेजे थे। इनमें 1984 बैच के आईपीएस समंत कुमार गोयल, 1985 बैच के मोहम्मद मुस्तफा, 1986 बैच के सिद्धार्थ एस. चट्‌टोपाध्याय, 1987 बैच के आईपीएस वी के भावरा और 1987 बैच के ही आईपीएस दिनकर गुप्ता शामिल थे। चूंकि चट्टोपाध्याय और मो. मुस्तफा, दिनकर गुप्ता से सीनियर थे, इसीलिए उन्होंने कैट में चुनौती दी थी।

COMMENT

आज का राशिफल

पाएं अपना तीनों तरह का राशिफल, रोजाना