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देश में हर साल जर्मन खसरे से 50 हजार बच्चों की असमय मौत, इसका टीका सुरक्षित, स्कूलों में लगवाने से मना न करें

पुतलीघर सरकारी स्कूल में मीजल्स रूबेला का टीका लगवाने के बाद कार्ड उठाकर खुशी का इजहार करते बच्चे। फोटो | संजय...

Danik Bhaskar | May 02, 2018, 02:05 AM IST
पुतलीघर सरकारी स्कूल में मीजल्स रूबेला का टीका लगवाने के बाद कार्ड उठाकर खुशी का इजहार करते बच्चे। फोटो | संजय वालिया

नादानी : तरसिक्का के सरकारी स्कूल में पेरेंट्स ने टीम को किया नजरबंद

सेहत विभाग ने दर्ज करवाया केस

तरसिक्का ब्लॉक के दशमेश नगर सरकारी स्कूल मेंे 12 बजे सेहत विभाग की टीम बच्चों को टीके लगा रही थी। उसी समय कुछ पेरेंट्स आ गए और अभद्रता शुरू कर दी। उन्होंने स्कूल को घेरकर प्रिंसिपल को दफ्तर और सेहत टीम को दूसरे कमरे में नजरबंद कर दिया। सेहत विभाग की टीम ने अधिकारियों को फोन कर बुलाया और पुलिस को जानकारी दी। दो घंटे बहसबाजी चलती रही। अंत में प्रिंसिपल और सेहत विभाग की टीम ने पेरेंट्स के खिलाफ पुलिस को लिखित शिकायत दे दी।

पहले दिन अमृतसर में 5400, तरनतारन में 5026 को लगे टीके

आठ राज्यों में लग चुके टीके, कहीं से कोई शिकायत नहीं

अमृतसर के सिविल सर्जन डॉ. हरदीप सिंह घई ने कहा कि पंजाब-हरियाणा में मीजल्स रूबेला के इंजेक्शन लगाने का अभियान अब शुरू किया गया है, मगर चंडीगढ़ समेत देश के 8 राज्यों में यह इंजेक्शन पहले ही लगाए जा चुके हैं। इनमें से किसी भी राज्य में कहीं से ऐसी कोई शिकायत नहीं मिली कि टीकाकरण के बाद किसी बच्चे को दिक्कत हुई हो।

प्रिसिंपल के रवैये की होगी जांच

तरनतारन | सुरसिंह गांव के सरकारी स्कूल में जब सेहत विभाग की टीम इंजेक्शन लगाने पहुंची तो अभिभावकों ने उसे बैरंग लौटा दिया। स्कूल प्रिसिंपल सतिंदर कौर ने कहा कि सेहत विभाग ने टीकाकरण को लेकर कोई कैंप नहीं लगाया। डीईओ निर्मल सिंह जैतो सरजा ने कहा कि सेहत विभाग ने प्रिसिंपल के टीकाकरण में रुकावट डालने की शिकायत की है। इसका नोटिस लेते हुए डीसी प्रदीप सभ्रवाल ने पट्‌टी के एसडीएम सुरिंदर सिंह को स्कूल प्रिंसिपल के रवैये की जांच करने के आदेश दिए हैं।

असल वीडियो लाया सेहत विभाग, बताए इंजेक्शन के फायदे

अमृतसर | मीजल्स रूबेला (एमआर) इंजेक्शन को लेकर सोशल मीडिया में चल रहे झूठे वीडियो की काट के लिए सेहत विभाग ने मंगलवार को सोशल मीडिया पर वीडियो की असल पूरी कॉपी अपलोड की। शरारती तत्वों की ओर से अपलोड किए गए वीडियो, जिससे छेड़छाड़ की गई है, में कहा गया है कि एमआर इंजेक्शन से बच्चों में नपुसंकता आ सकती है। ये फेक वीडियो देखकर बहुत से पेरेंट्स गुमराह हो गए। ऐसे में सेहत विभाग ने पूरा असल वीडियो सोशल मीडिया, स्कूलों के व्हाट्सअप ग्रुपों और अपनी टीमों के बीच जारी किया ताकि सच पता चल सके। इस पूरे वीडियो में बाकायदा एक्सपर्ट बता रहे हैं कि मीजल्स रूबेला से भारत में हर साल 50 हजार बच्चों की असमय मौत होती है। एमआर टीका बच्चों को इस बीमारी से बचाता है। यह इंजेक्शन वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (डब्ल्यूएचओ) से प्रमाणित है। इससे न तो कोई बच्चा नपुंसक हो सकता है और न ही किसी को किसी तरह की बीमारी हो सकती है। सिविल सर्जन डॉ. हरदीप सिंह घई ने पेरेंट्स से सोशल मीडिया में फैलाए जा रहे झूठ पर विश्वास न करने की अपील की। उन्हें स्कूल प्रबंधन से सहयोग करते हुए बच्चों को टीका लगवाना चाहिए।