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शीरा मिलने के कारण हरगोविंदरपुर से हरिके तक भूरा हो गया ब्यास का पानी, 83 किलोमीटर एरिया में ऑक्सीजन घटने से मरी हजारों मछलियां

भास्कर टीम | तरनतारन/हरिके पत्तन/रईया/जंडियाला गुरु/बाबा बकाला साहिब मशहूर शराब व्यापारी पौंटी चड्ढा के परिवार...

Dainik Bhaskar

May 18, 2018, 04:10 AM IST
शीरा मिलने के कारण हरगोविंदरपुर से हरिके तक भूरा हो गया ब्यास का पानी, 83 किलोमीटर एरिया में ऑक्सीजन घटने से मरी हजारों मछलियां
भास्कर टीम | तरनतारन/हरिके पत्तन/रईया/जंडियाला गुरु/बाबा बकाला साहिब

मशहूर शराब व्यापारी पौंटी चड्ढा के परिवार के स्वामित्व वाली कीड़ी अफगान स्थित चड्ढा शुगर मिल से बुधवार रात जो शीरा ब्यास दरिया में मिलना शुरू हुआ, उसे वीरवार दोपहर बंद करवाया जा सका। इस शीरा के कारण श्री हरगोविंदरपुर से लेकर 83 किलोमीटर दूर हरिके तक पानी में ऑक्सीजन की कमी हो जाने से हजारों मछलियां और दूसरे जलीय जीव मर गए।

घटना का पता तब चला जब वीरवार सुबह मरी हुई मछलियां दरिया किनारे मिलीं। हरिके से ब्यास का पानी नहरों के जरिये राजस्थान तक जाता है। चड्ढा शुगर मिल में टैंक से शीरा ओवरफ्लो होकर दरिया में मिलने से पानी का रंग भूरा हो गया और उससे बदबू उठने लगी।

ब्यास में मछलियों की कई प्रजातियां जैसे डगरा, गौद, सोल, मल्ली, संगाड़ा पाई जाती हैं। मरने वाली मछलियों में सबसे अधिक संख्या इन्हीं प्रजातियों की है। मौके पर पहुंचे अमृतसर के डीसी कमलदीप सिंह संघा ने बताया कि फारेंसिक विभाग ने मरी हुई मछलियों का पोस्टमार्टम किया है और शुरुआती जांच के अनुसार, पानी मे ऑक्सीजन की कमी से मछलियां मरी हैं। संघा के अनुसार, वन विभाग के डीएफओ चरणजीत सिंह के नेतृत्व में कर्मचारी मरी हुई मछलियों को पानी से निकालने में जुटे हैं।

नदी के किनारे 30 गायें भी मरी मिलीं

जंडियाला गुरु में चिट्टा शेर गांव स्थित बाबा गजन सिंह के डेरे के पास लगभग 30 गायें भी मृत मिलीं। इस इलाके में घूमने वाली हजारों गायों की डेरे में लाकर सेवा की जाती है। डेरे में तकरीबन 10 हजार गाय हैं। डेरे के सेवादार अजित सिंह और जतिंदर सिंह ने बताया कि वीरवार सुबह दरिया का जहरीला पानी पीने से लगभग 30 गायें मर गई। डीसी कमलदीप संघा ने कहा कि इन गायों का टेस्ट करवाया जाएगा ताकि मौत के कारणों का पता चल सके।

शुगर मिल से निकला शीरा, जो दरिया में मिला

सोनी ने बंद कराई मिल, तीन दिन में मांगी रिपोर्ट : पर्यावरण मंत्री ओमप्रकाश सोनी ने ब्यास दरिया का जायजा लिया। उन्होंने घटना की जांच के आदेश देते हुए तीन दिन में रिपोर्ट देने को कहा है। रिपोर्ट आने तक मिल बंद रहेगी। सोनी ने बताया कि शीरा का प्रभाव खत्म करने के लिए पौंग डैम से दरिया में अतिरिक्त पानी छोड़ा गया है। कांग्रेस सांसद गुरजीत औजला और विधायक संतोख सिंह भलाईपुर मौके पर पहुंचे।

पानी इस्तेमाल न करने की अपील : अमृतसर के डीसी कमलदीप संघा और तरनतारन के डीसी प्रदीप सभ्रवाल ने अपील की है कि दरिया का पानी पीने योग्य नहीं है। फिलहाल इसका इस्तेमाल न किया जाए। इस पानी से न तो लोग खुद नहाए और न पशुओं को नहलाएं। दो-तीन दिन तक मछलियों का सेवन भी न करें।

डॉल्फिन-घड़ियाल को लेकर चिंता

ब्यास दरिया में इंडस रीवर प्रजाति की डॉल्फिन भी हैं। 3 से 6 मई तक किए गए सर्वे में इनकी संख्या 12 से ज्यादा पाई गई थी। वर्ल्ड वाइड फंड फाॅर नेचर इंडिया (डब्ल्यूडब्ल्यूएफ-इंडिया) के सहयोग से वन एवं जीव सुरक्षा विभाग के विशेषज्ञों ने 185 किलोमीटर स्ट्रेच में तलवाड़ा हेडवर्क्स से हरिके नोज तक यह सर्वे किया था। 2008 में दरिया में 2 से 3 डॉल्फिन ही थीं। 70 के दशक तक सतलुज, ब्यास, रावी, चिनाब और झेलम नदियों में इंडस रीवर डॉल्फिन पाई जाती थी जो 1974 में हरिके बैराज और पौंग डैम बनने के बाद गायब हो गई। उसके बाद ये प्रजाति केवल पाकिस्तान में पाई जाती थी। 2008 में पहली बार डीएफओ ने ब्यास में 3 डॉल्फिन देखी जिसके बाद इनका संरक्षण शुरू किया गया। 2017 में तलवाड़ा हेडवर्क्स से लेकर हरिके नोज तक ब्यास दरिया के 185 किलोमीटर लंबे स्ट्रेच को ब्यास कंजरवेशन रिजर्व एरिया घोषित कर दिया गया। पानी में शीरा मिलने से इन डॉल्फिन को कोई नुकसान पहुंचा है या नहीं, वीरवार शाम तक इसकी जांच जारी थी। फॉरेस्ट विभाग का कहना है कि फिलहाल उन्हें कोई मरी हुई डॉल्फिन नहीं मिली। हालांकि जिंदा डॉल्फिन भी नजर न आने से अधिकारी चिंतित हैं। कुछ महीने पहले दरिया में 47 घड़ियाल भी छोड़े गए थे। किसी घड़ियाल के मरने की भी कोई जानकारी नहीं है।



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