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चार में से 1 महीना गुजरा, काॅलोनी रेगुलराइज नहीं कराने वाले कॉलोनाइजरों पर एफआईआर होगी

राज्य सरकार की ओर से जारी नई कॉलोनी रेगुलराइजेशन पॉलिसी के तहत अमृतसर डेवलेपमेंट अथारिटी (एडीए) के अधिकार क्षेत्र...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 18, 2018, 04:10 AM IST

चार में से 1 महीना गुजरा, काॅलोनी रेगुलराइज नहीं कराने वाले कॉलोनाइजरों पर एफआईआर होगी
राज्य सरकार की ओर से जारी नई कॉलोनी रेगुलराइजेशन पॉलिसी के तहत अमृतसर डेवलेपमेंट अथारिटी (एडीए) के अधिकार क्षेत्र में आती अनधिकृत कॉलोनियों को नई पालिसी के तहत रेगुलर करने को लेकर वीरवार को एडीए के अधिकारियों की शहर के अलग-अलग कॉलोनाइजर के साथ बचत भवन में मीटिंग हुई। एडीए की मुख्य प्रशासक दीप्ति उप्पल की अध्यक्षता में करीब एक घंटे तक चली मीटिंग में जहां कॉलोनाइजरों ने अपनी मुश्किलें बयान की, वहीं मुख्य प्रशासक ने कॉलोनाइजरों से जोर देकर कहा कि वह नई पालिसी के तहत तय समय के अंदर अपने आवेदन करें। हालांकि एडीए की ओर से अमृतसर, तरनतारन, गुरदासपुर और पठानकोट जिलों के तहत आते कॉलोनाइजरों को मीटिंग में आमंत्रित किया गया था, लेकिन इसमें सिर्फ अमृतसर जिले के डेढ़ दर्जन कॉलोनाइजर ही पहुंचे।

नई पाॅलिसी को लेकर एडीए अफसरों की कॉलोनाइजरों के साथ मीटिंग

दीप्ति उप्पल ने कहा कि रियल एस्टेट को लेकर बनी यह पालिसी टाइम फ्रेम है। इसके लिए 4 महीने का समय दिया गया है। इसमें से 1 महीने का निकल चुका है। विभाग चाहता है कि अनआथोराइज्ड कॉलोनियों के कॉलोनाइजर टाइम फ्रेम के अंदर नई पालिसी के तहत अपने आवेदन करें, जो कॉलोनाइजर काॅलोनी को रेगुलाइज नहीं कराएगा, नियमों के तहत उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के अलावा काॅलोनी का पावर कनैक्शन काटे जाने का भी प्रावधान है। उन्होंने कहा कि पालिसी में अभी तक कोई बदलाव नहीं हुआ।

ये आपत्तियां बताईं

कॉलोनाइजर कृष्ण शर्मा कुक्कू ने कहा कि सरकार कॉलोनाइजर को पॉलिसी में रिलेक्सेशन दें। कॉलोनाइजर कपिल मेहरा का कहना था कि साल 2013 से पहले जो काॅलोनियां बनी हैं, उस पर पुरानी पालिसी, जबकि 2013 के बाद बनी काॅलोनियों पर नई पालिसी लागू की जाए। कॉलोनाइजर अशोक कुमार ने कहा कि हमने पुरानी पालिसी के तहत पैसे जमा करवाए थे। अब हमें नोटिस आ रहे हैं कि गलियां चौड़ी की जाएं। कॉलोनाइजर प्रदीप कुमार का कहना था कि पुरानी काॅलोनियों पर नई पालिसी लागू न की जाए। काटी हुई काॅलोनियों के एनओसी न मिलने के कारण प्लाट नहीं बिक रहे। इसका हल निकाला जाए।

दीप्ति उप्पल ने बताया कि आवेदन करने के लिए अथॉरिटी के ऑफिस में सिंगल विंडो बनाई गई है, जिस पर स्पेशल टीम को लगाया गया है। इस टीम में शामिल कर्मचारी अप्लाई करने वालों के सभी कागजात चेक करेंगे और उन्हें आने वाली किसी भी तरह की मुश्किल को हल करेंगे।

पुरानी पालिसी के 6 नियम, जो अब भी है जारी

1.2013 में कॉलोनाइजर से प्रति एक्यूजेशन फीस 90 लाख रुपए मांगे थे।

2. काॅलोनी में सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट के लिए जगह होनी चाहिए। ऐसी काॅलोनियां न के बराबर है।

3. दस एकड़ तक की काॅलोनी की रोड 35 फिट चौड़ी, 50 एकड़ तक में 45 फिट चौड़ी, 50 एकड़ ज्यादा होने पर रोड 60 फीट चौड़ी, सबसे मेन एंट्री 25 से 30 फीट चौड़ी, लिंक रोड 15 से 20 फीट चौड़ी होनी चाहिए।

4. बहुत से मामलों में कॉलोनाइजर ने जिन किसानों से जमीनें ली है, उनकी पावर आफ अटार्नी पर सीधे उपभोक्ताओं को प्लाट बेचे हैं। अब जमीन के सौदे किसान और उपभोक्ता के बीच है।

5. 15 मीटर तक की इमारत ही रैगुलर होगी। कई ईमारतें 20 मीटर ऊंची है। फालतू ऊंचाई वाली हिस्सा तोड़ना होगा।

6. काॅलोनी में पब्लिक बिल्डिंग, रोड्स, पार्क, वाटर पंप की रिजर्व स्पेस आदि का एरिया 35 परसेंट से कम न हो। हकीकत में बहुत सी काॅलोनियां में यह एरिया बहुत कम है।

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