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मेरे बेटे ने बहुत जहाज उड़ाए... जब भी गांव से गुजरता तो जहाज नीचे कर लेता, मैं छत से हाथ हिला आशीर्वाद देती

Amritsar News - पटियाला में एनसीसी कैडेट्स को विमान उड़ाने का प्रशिक्षण देते एयरक्राफ्ट क्रैश होने से शहादत का जाम पीने वाले...

Feb 27, 2020, 07:15 AM IST

पटियाला में एनसीसी कैडेट्स को विमान उड़ाने का प्रशिक्षण देते एयरक्राफ्ट क्रैश होने से शहादत का जाम पीने वाले वायुसेना की नंबर-3 एयर स्क्वार्डन एनसीसी यूनिट पटियाला के विंग कमांडर जीएस चीमा का बुधवार को गांव आलोवाल में सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार हुआ। इस दौरान उनके 13 वर्षीय बेटे भवगुरनीत सिंह ने पिता की चिता को मुखाग्नि दी। शहीद की तिरंगे में लिपटी पार्थिव देह को वायुसेना के जवान श्मशानघाट ले जाने लगे तो शहीद की मां सरबजीत कौर और प|ी नवनीत कौर की करुणामयी चीखों ने सभी का कलेजा छलनी कर डाला। मां सरबजीत कौर ने कहा कि उनके बेटे ने बहुत जहाज उड़ाए, जब भी वह गांव से गुजरता था तो मैं हाथ हिलाकर आशीर्वाद देती थी। वहीं, संस्कार के मौके पर पठानकोट एयरफोर्स स्टेशन से विंग कमांडर रिंकू डोगरा के नेतृत्व में एयरफोर्स के जवानों और तिब्बड़ी कैंट से कैप्टन अभिषेक की कमांड में टू-जैक राइफल्स के जवानों ने शस्त्र उल्टे कर हवा में गोलियां दागते हुए बिगुल की मातमी धुन के साथ शहीद को अंतिम सलामी दी। शहीद की चिता को जब बेटे ने मुखाग्नि दी तो सभी ने भारत माता की जय का जयघोष कर शहीद को नमन किया। डीसी मोहम्मद इश्फाक ने परिवार के साथ दुख साझा करते कहा कि चीमा जैसे जांबाज देश के रियल हीरो हैं। पंजाब सरकार और जिला प्रशासन शहीद के परिवार को हर संभव सहायता उपलब्ध कराएगा।

बेटा बोला- मैं बड़ा होकर सेना में ही जाऊंगा

शहीद चीमा के बेटे भवगुरनीत सिंह ने कहा कि उन्हें पापा की शहादत पर गर्व है और वह खुद भी सैनिक बनकर देश की सेवा करेगा। उसने बताया कि दो दिन पहले ही फोन पर पापा से बात हुई थी। उन्होंने कहा था कि एग्जाम ठीक देना। वह हमेशा कहते थे कि जिंदगी में अगर मुझे कुछ हो गया तो कभी भी अपनी आंखों में आंसू मत लाना। बेटे ने कहा कि सरकार को चाहिए कि एनसीसी कैडेट्स को ट्रेनिंग देने वाले विमानों में बदलाव करे ताकि एेसे हादसे न हों।

ओह जनवरी ’च आया ते कोट लै के दे गया...अखे मां नूं ठंड ना लग्गे

शहीद की माता सरबजीत कौर ने नम आंखों से बताया कि उनके बेटे ने बहुत जहाज उड़ाए। कई बार जब वह गांव के ऊपर से गुजरता था तो जहाज को नीचे कर लेता तथा मैं छत्त पर जाकर हाथ हिलाकर उसे आशीर्वाद देती थी। जब वह जनवरी में आया तो मुझे एक कोट लेकर दे गया था ताकि मुझे ठंड न लगे।

कपूरथला सैनिक स्कूल के सहपाठी रोए }अध्यापक बोले- चीमा ने एक बार हेलिकाॅप्टर पर तिरंगा फहरा पूरे स्कूल का चक्कर काटा था

शहीद चीमा की शिक्षा सैनिक स्कूल कपूरथला से हुई थी। आज उनके अंतिम संस्कार पर उनके साथ पढ़े करीब 20 सहपाठी पहुंचे थे, जो फूट-फूट कर रोए। उन्हें पढ़ाने वाले रिटायर टीचर एसएस आहलूवालिया और भूपिंदर सिंह ने बताया कि चीमा होनहार, दिलेर और उच्च कोटि के बाक्सर थे। एक बार वह हेलिकाॅप्टर लेकर स्कूल आए थे और हेलिकाॅप्टर पर उन्होंने तिरंगा फहराते हुए पूरे स्कूल का चक्कर लगाया था। इस अवसर पर शहीद के सहपाठी डाॅ. दलजीत सिंह चौहान, मुनीष रहलान, मलकिंदर सिंह, हरप्रीत सिंह, आरएस राणा आदि मौजूद थे।

साहसी बेटी }श्रद्धांजलि देकर संस्कार के दिन मेडिकल देने दिल्ली पहुंची, नेवी में सिलेक्ट

एक तरफ शहीद चीमा का अंतिम संस्कार किया जा रहा था। वहीं, दूसरी तरफ उनकी 22 वर्षीय बेटी कुंजदीप कौर की नेवी में सिलेक्शन हो गई। बेटी ने मंगलवार को पटियाला पहुंच शहीद पापा को श्रद्धांजलि अर्पित की और अंतिम संस्कार वाले दिन उसका दिल्ली में मेडिकल हुआ। इसमें पास होकर उसकी नेवी में सिलेक्शन हो गई। बेटी ने देशहित को प्राथमिकता देते हुए शहीद पापा के सपनों को साकार किया, क्योंकि उनके पापा हमेशा कहते थे कि तुम्हें सेना में अफसर बनना है।

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