पंजाब / कैप्टन के साथ नहीं दिख रहा नवजोत सिद्धू का समझौता होता, अब फिर राणा गुरजीत होंगे कैबिनेट में

Navjot Sidhu would not see agreement with Captain, now Rana Gurjit will be in cabinet
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Navjot Sidhu would not see agreement with Captain, now Rana Gurjit will be in cabinet

  • जनवरी 2018 में पांच करोड़ के रेत घोटाले में फंसने के बाद इस्तीफा दे दिया था कपूरथला के विधायक गुरजीत ने
  • स्पीकर राणा केपी सिंह और युवा नेता कुलजीत नागरा के भी मंत्री पद की दौड़ में शामिल होने की चर्चाएं

Dainik Bhaskar

Dec 05, 2019, 04:18 PM IST

चंडीगढ़. पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह और पूर्व कैबिनेट मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू के बीच बढ़ी तल्खियां खत्म होने का नाम ही नहीं ले रही। अब लग रहा है कि इन दोनों के बीच की दूरियां कम होने के सारे ऑप्शन खत्म हो चुके हैं और इसी बीच कैप्टन ने अपने कैबिनेट में सिद्धू का खाली स्थान भरने की तैयारी कर ली है। माना जा रहा है कि कपूरथला के विधायक राणा गुरजीत सिंह एक बार फिर कैबिनेट में शामिल हो सकते हैं। हालांकि राणा ने जनवरी 2018 में पांच करोड़ के रेत घोटाले में फंसने के चलते इस्तीफा दे दिया था। मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के करीबी सूत्रों के अनुसार इस रिक्त पद को भरने की एक वजह विभिन्न विधायकों के बगावती सुर भी हैं।

लंबे समय से नाराज चल रही राजनैतिक खींचतान के बीच मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने लोकसभा चुनाव में शहरी सीटों पर हार का ठीकरा नवजोत सिद्धू पर फोड़ते हुए उन्हें स्थानीय विभाग से हटाकर बिजली विभाग में भेज दिया था। सिद्धू ने बिजली विभाग का कार्यभार संभालने से इन्कार कर दिया था। उन्होंने हाईकमान से भी इसकी गुहार लगाई कि उनका महकमा न बदला जाए, लेकिन लोकसभा चुनाव में मिली हार के कारण कांग्रेस हाईकमान भी इतनी कमजोर हो चुकी थी कि किसी ने भी स्टार प्रचारक नवजोत सिद्धू की नहीं सुनी।

इसके बाद जुलाई में नवजोत सिंह सिद्धू ने मंत्री पद से अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। अब जबकि कैप्‍टन अमरिंदर सिंह की सरकार के मात्र दो साल बचे हैं। ऐसे में तमाम विधायकों की नजर इस खाली पद पर है। मंत्री बनने की दौड़ में विधानसभा के स्पीकर राणा केपी सिंह भी शामिल हैं। वह लंबे समय से इस‍के लिए प्रयास कर रहे हैं। युवा नेता कुलजीत नागरा के भी दौड़ में शामिल होने की चर्चा है। वह राहुल गांधी के करीबी नेताओं में माने जाते हैं।

राणा गुरजीत सिंह मार्च 2017 में बनी कैबिनेट का हिस्सा थे। उन्होंने जनवरी 2018 में पांच करोड़ के रेत घोटाले में फंसने के चलते इस्तीफा दे दिया था। राणा गुरजीत के खिलाफ चली जांच में उन्हें क्लीन चिट मिलने से वह फिर से मंत्री बनने की दौड़ में शामिल हो गए थे, लेकिन कोई भी सीट खाली नहीं थी। सिद्धू के इस्तीफे के बाद यह सीट खाली हो गई है।

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