पंजाब / पूर्व मंत्री सिद्धू की पत्नी डा. नवजोत कौर ने कांग्रेस छोड़ी, बोलीं- अब किसी पार्टी से कोई संबंध नहीं



अमृतसर की समाजसेवी डॉ. नवजाेत कौर सिद्धू। अमृतसर की समाजसेवी डॉ. नवजाेत कौर सिद्धू।
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अमृतसर की समाजसेवी डॉ. नवजाेत कौर सिद्धू।अमृतसर की समाजसेवी डॉ. नवजाेत कौर सिद्धू।

  • कहा-नवजोत सिंह सिद्धू अपनी मर्जी के मालिक, वह ही बता सकते हैं क्यों नहीं गए चुनाव प्रचार में
  • अकाली-भाजपा गठबंधन सरकार में स्वास्थ्य मंत्री थीं नवजोत कौर, पति सिद्धू के साथ की थी कांग्रेस ज्वाइन

Dainik Bhaskar

Oct 22, 2019, 05:22 PM IST

अमृतसर. पंजाब सरकार के पूर्व मंत्री और पूर्व क्रिकेटर नवजोत सिंह सिद्धू की पत्नी नवजोत कौर ने कांग्रेस पार्टी छोड़ दी है। उन्होंने कहा कि अब उनका किसी भी राजनीतिक दल से कोई संबंध नहीं है। वह बोलीं कि वह अब सिर्फ समाजसेवी हैं और सोशल वर्कर के तौर पर वह पंजाब के लिए लड़ाई जारी रखेंगी। डा. कौर मंगलवार को एक कार्यक्रम में वेरका पहुंची थीं। यहीं उन्होंने यह ऐलान किया। वह अकाली-भाजपा सरकार में स्वास्थ्य मंत्री रही हैं।

 

विधानसभा चुनावों में नवजोत सिंह सिद्धू द्वारा प्रचार न करने पर डा. कौर ने कहा कि सिद्धू अपनी मर्जी के मालिक हैं। वह चुनाव प्रचार करने क्यों नहीं गए इसका जवाब वह खुद ही दे सकते हैं। सिद्धू अपनी कोई पार्टी बनाने की तैयारी में नहीं है। अभी उनका एरिया अमृतसर पूर्वी है। वह उसी पर ध्यान दे रहे हैं। वह अपने हलके की एक-एक सड़क बनवाएंगी, जिसके लिए सिद्धू बैठकें कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि उनके हलके के विकास के लिए पैसा नहीं दिया गया तो वह सरकार के खिलाफ धरना भी देंगी।

 

उन्होंने कहा कि कुछ कांग्रेसियों ने मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के कान भरे हैं, इसलिए सिद्धू का मंत्रालय बदला गया था। सिद्धू कांग्रेस के सिपाही हैं और सेवा करते रहेंगे। पंजाब में आई बाढ़ और बटाला पटाखा फैक्ट्री धमाके पर नवजोत सिंह सिद्धू की ओर से साधी चुप्पी पर पूछे गए सवाल का जवाब देते नवजोत कौर सिद्धू ने कहा कि अब उनका सरकार में कोई कोई मोह नहीं है। लिहाजा यदि वह सरकार के पास कोई मांग करते भी हैं तो वह नहीं मानी जाती, लिहाजा उन्होंने कुछ भी बोलने से गुरेज ही किया।

 

पाक सेना प्रमुख से गले मिलने पर कैप्टन ने विरोध जताया था

  • पूर्व क्रिकेट नवजोत सिंह सिद्धू जनवरी 2017 में भाजपा छोड़कर कांग्रेस में शामिल हुए थे। इसके बाद पंजाब में उन्हें पर्यटन मंत्रालय मिला। मंत्री रहते हुए सिद्धू उस वक्त विवाद में आ गए थे, जब मई 2018 में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान के शपथ ग्रहण में गए। वहां सिद्धू के पाक सेना प्रमुख कमर जावेद बाजवा से गले मिलने पर कैप्टन अमरिंदर ने विरोध जताया था। इसके बाद नवंबर में जब सिद्धू करतारपुर कॉरिडोर के शिलान्यास के दौरान पाकिस्तान गए तो अमरिंदर ने कहा था कि सिद्धू हाईकमान की परमिशन के बिना वहां गए हैं।
  • 2019 के लोकसभा चुनाव में उस वक्त विवाद और गहरा गया, जब लोकसभा चुनाव में टिकट न मिलने पर सिद्धू की पत्नी नवजोत कौर ने अमरिंदर के खिलाफ नाराजगी जताई थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि उन्हें अमरिंदर की वजह से अमृतसर सीट से टिकट नहीं मिला। वहीं, सिद्धू ने भी पत्नी का समर्थन किया था। हालांकि, अमरिंदर ने इन आरोपों से इनकार कर दिया था।
  • जून 2019 में जब सिद्धू एक कैबिनेट मीटिंग में नहीं पहुंचे थे तो उस दौरान 6 जून को कैप्टन अमरिंदर सिंह ने उनका विभाग बदल दिया। सिद्धू से महत्वपूर्ण माना जाने वाला स्थानीय शासन विभाग ले लिया गया और उन्हें बिजली एवं नवीकरणीय ऊर्जा विभाग का प्रभार दिया गया था। हालांकि, सिद्धू ने नए मंत्रालय का प्रभार नहीं संभाला। 10 जून को पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी से दिल्ली में मिले थे। उसी दिन पार्टी के तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी के नाम से संबोधित इस्तीफा दे दिया था, मगर फिर इस बात का खुलासा जुलाई में हुआ, जब उन्होंने त्यागपत्र को सोशल मीडिया पर शेयर किया था। इसके बाद सिद्धू ने मुख्यमंत्री अमरिंदर को जल्द इस्तीफा भेजने की जानकारी सोशल मीडिया पर दी थी।

 

क्रिकेट से राजनीति तक सिद्धू

1983 से 1999 तक सिद्धू क्रिकेट खिलाड़ी रहे। क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद उन्हें भाजपा ने टिकट दिया। 2004 में वह अमृतसर की लोकसभा सीट से सांसद चुने गए। हालांकि, जनवरी 2007 में पुराने गैर-इरादतन हत्या के मामले में कोर्ट का फैसला आते ही उन्होंने लोकसभा की सदस्यता से इस्तीफा देकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगा दी। 2007 के उपचुनाव में भी सिद्धू ने अमृतसर सीट पर दोबारा जीत हासिल की थी। 2009 में उन्होंने अमृतसर सीट पर जीत हासिल की। मई 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने सिद्धू को बरी कर दिया।

 

डॉक्टर की नौकरी छोड़ आई थीं राजनीति में

नवजोत कौर सिद्धू पेशे से चिकित्सक हैं। 2012 में राजनीति में आने के लिए इस्तीफा देकर कांग्रेस में शामिल हो गई। अमृतसर पूर्व से कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में निकटतम प्रतिद्वंद्वी को 6 हजार के करीब वोटों से हराकर विधानसभा पहुंची। उन्हें मुख्य संसदीय सचिव के रूप में नियुक्त किया गया। फिर उनका परिवार भाजपा में शामिल हो गया, लेकिन बाद में भाजपा छोड़ कांग्रेस में आ गए तो 2017 में हुए विधानसभा चुनाव में फिर से विधायक चुनी गई।

 

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