--Advertisement--

‘बादलों ने पार्टी को अपनी जागीर बनाया एसजीपीसी को चला रहे अपने हिसाब से’

अकाल तख्त से खारिज पंज प्यारे फिर उतरे बादलों के खिलाफ

Danik Bhaskar | Sep 09, 2018, 04:56 AM IST

अमृतसर. श्री अकाल तख्त साहिब के खारिज पंज प्यारों ने बेअदबी मामले मेें बादल परिवार के साथ-साथ जत्थेदारों पर भी निशाना साधा। तत्कालीन सरकार पर आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि अगर सरकार ठीक तरीके से काम करती तो बेअदबी की घटनाएं रोकी जा सकती थीं।

शनिवार को प्रैस कांफ्रेंस में पंज प्यारे भाई सतनाम सिंह खालसा, भाई सतनाम सिंह खंडेवाला, भाई मंगल सिंह, भाई मेजर सिंह व तरलाेक सिंह ने कहा कि 2015 में उन्हाेंने कहा कि तत्कालीन सरकार की ओर से जिस तरह हालातों से निपटने की कार्रवाई की गई वह पंथ विरोधियों के हक में भुगतने वाली थी। यही नहीं इसके लिए खुद जोरा सिंह कमिशन बनाया और उसे कोई मदद नहीं की। यही नहीं जब जोरा सिंह कमिशन ने रिपोर्ट पेश की तो उसे भी नकार दिया गया।

जागीर के रूप में काम कर रहा है : पंज प्यारों ने कहा कि अकाली दल जो अब बादल दल बनकर एक परिवार की जागीर के रूप में काम कर रहा है उसने निजी स्वार्थ के लिए एसजीपीसी की भी दुरुपयोग किया। इसकी ताजा मिसाल है जस्टिस रणजीत सिंह जांच रिपोर्ट जो बिना देखे एसजीपीसी पर दबाव बनाकर रद्द करवा दी। इसके साथ ही रिपोर्ट पर बहस के दौरान ने भगोड़ा होकर साबित कर दिया कि वह बेअदबी मामले में किसी भी तरह की जांच नहीं चाहते।

कौम से धोखा कर पंथ का विश्वास खो चुके जत्थेदार घर बैठ जाएं : उन्होंने श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी गुरबचन सिंह पर सिख कौम से धोखा करने के आरोप लगाते हुए कहा कि कौम उन्हें नकार चुकी है। अच्छा यही होगा कि ये अपने आप घर बैठ जाएं। ज्ञानी गुरमुख सिंह व उनके भाई हिम्मत सिंह ने बादल परिवार को बचाने को डील के तहत पंथ को गुमराह किया। ये ड्रामेबाज हैं। पंज प्यारों ने कहा कि ज्ञानी गुरमुख सिंह ने गलतियों के लिए लिखित माफी भी मांगी थी।

बरगाड़ी मोर्चे का किया समर्थन : बरगाड़ी मोर्चा की हिमायत करते हुए उन्होेंने कहा कि जिन मुख्य तीन मांगों को लेकर यह संघर्ष चल रहा वह सभी सिखों की हैं। किसी व्यक्ति विशेष की नहीं। इस मोर्चा के प्रबंधकों की ओर से बेअदबी घटनाओं के दोषियों को सजा दिलाने,जेलों में बंद सिखों को रिहा करने और बरगाड़ी कांड के लिए जिम्मेदार व्यक्तियों को सजा दिलवाने की मांग की जा रही है। ज्ञानी गुरमुख सिंह की तरह पंज प्यारों को एसजीपीसी की ओर से वापिस बुलाने संबंधी पूछे सवाल पर उन्होंने कहा कि अगर जत्थेदार ज्ञानी गुरबचन सिंह को बदलने बाद अगर ऐसी प्रक्रिया शुरु होती है तो सोचेंगे।