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दशहरा उत्सव के लिए प्रशासन चौकस, लेकिन नहीं मिटा सका पीड़ित परिवारों के दिल की टीस

10 महीने पहले
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अमृतसर धोबीघाट के पास रेलवे ट्रैक पर हुए हादसे की भयावह तस्वीर।
  • 19 अक्टूबर 2018 की शाम पठानकोट से आ रही डीएमयू ट्रेन सभी को रौंदते हुए चली गई थी
  • शासनिक आंकड़ा भले ही 65 का हो, पर लोगों की मानें तो हादसे में मरने वालाें की 200 से अधिक थी
  • इस बार अमृतसर में जोड़ा फाटक समेत 3 जगह को छोड़ होंगे 10 आयोजन में

अमृतसर. आज दशहरा है। जगह-जगह रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतलों का दहन होगा, लेकिन अमृतसर के जोड़ा फाटक इलाके में नहीं होगा। धोबीघाट स्थित यह वही जगह है, जहां दशहरा उत्सव देख रहे लोगों पर ट्रेन चढ़ गई थी। चंद सेकंड्स में 65 जिंदगियां मौत में बदल गई थी। ट्रैक पर मानव अंग यहां-वहां बिखरे पड़े थे और हर तरफ चीख-पुकार मची हुई थी। इससे प्रशासन ने सबक लिया, ताकि बहुमूल्य जीवन फिर से चीत्कार में न बदले। इसी के चलते जोड़ा फाटक इलाके में इस पुतला दहन नहीं होगा। साथ ही दूसरी जगह भी जहां आयोजन हो रहा है, वहीं प्रशासन ने सुरक्षा इंतजाम किए। दूसरी ओर पिछले साल हुए हादसे से पीड़ित परिवारों के दिल की टीस को मिटा पाने में प्रशासन नाकाम भी नजर आ रहा है। इसी के चलते आज फिर हादसे के पीड़ित परिवारों ने ट्रेन रोकने का ऐलान कर रखा है।
 
एक साल बाद भी हरे दिखाई दे रहे जख्मों की वजह की बात करें तो 19 अक्टूबर 2018 की वह शाम, जब रावण जल रहा था। बच्चे, बूढ़े और जवान बदी पर नेकी की विजय का प्रतीक दशहरा के रंग में पूरी तरह रंग चुके थे। अचानक पठानकोट से आ रही डीएमयू ट्रेन सभी को रौंदते हुए चली गई। रेलवे ट्रैक के इर्द-गिर्द लाशें बिखर गईं। प्रशासनिक आंकड़ा भले ही 65 का हो, पर लोगों की मानें तो हादसे में मरने वालाें की 200 से अधिक थी।
 
इस हादसे में अपनों को खो चुकने के बाद लोग दर-दर भटके। जांच-दर-जांच हुई, नेताओं के दौरे हुए और लोगों के जख्‍म पर मरहम लगाने की तमाम घोषणाएं हुई, लेकिन तकरीबन एक वर्ष बाद भी इस हादसे की भेंट चढ़ गए लोगों के परिजनों का दर्द कम नहीं हुआ है। 
 
मंगलवार को एक बार फिर दशहरा उत्सव की तैयारियां हो चुकी हैं। पिछले साल जोड़ा फाटक हादसे से सबक लेते हुए प्रशासन ने रावण दहन की मंजूरी देते समय सुरक्षा का खास ख्याल रखा है, वहीं आयोजन स्थलों पर भी विशेष प्रबंध किए गए हैं। सोमवार को पुलिस कमिश्नर डाॅ. सुखचैन सिंह ने खुद आयोजन स्थलों का जायजा लिया। इतना ही नहीं फायर ब्रिगेड को भी सभी जगहों पर हर सुविधा उपलब्ध करवाने को कहा गया है। जहां भीड़ ज्यादा होने का अनुमान है, वहां मैटल डिटेक्टर भी लगाए जाएंगे। बता दें कि इस बार रणजीत एवेन्यू, जोड़ा फाटक और वेरका में रावण दहन के आयोजन नहीं करवाए जा रहे हैं। प्रशासन ने लोगों की सुरक्षा के मद्देनजर खास प्रबंध किए हैं। 36 घंटे पहले ही सभी जगह पुलिस मुलाजिम तैनात कर दी गई है।
 

पीड़ित रोकेंगे ट्रेन, ट्रैक और मिट्‌ठू के घर के बाहर फोर्स तैनात
जोड़ा फाटक ट्रेन हादसे के पीड़ित परिवार मंगलवार को जोड़ा फाटक पर ट्रेन रोककर रोष जताएंगे और पंजाब सरकार को किए गए वादे पूरे करने के लिए जगाएंगे। दूसरी तरफ इन्हें रोकने के लिए रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स तैनात करके बैरिकेडिंग भी कर दी गई है। उधर, इलाके के पार्षद विजय मदान के पुत्र सौरभ मदान मिट्ठू के भाई की शादी दशहरे वाले दिन है। ऐसे में पुलिस ने उनके घर और वहां तक जाने वाले रास्तों पर भारी फोर्स तैनात कर दी है।
 

इन 10 जगह होगा पुतला दहन

  • राम नगर, महाकाली मंदिर मजीठा-वेरका बाईपास
  • महिंद्रा कालोनी पार्क, सिविल लाइन
  • राम नगर काॅलोनी, नौशहरा नंगली, मजीठा रोड
  • कर्मपुरा ग्राउंड, ट्रिलियम माल
  • डीआर इंक्वलेव, एयरपोर्ट रोड
  • दशहरा ग्राउंड, दुर्ग्याणा तीर्थ के पीछे
  • भद्रकाली मंदिर ग्राउंड
  • न्यू मॉडल टाउन, छेहर्टा
  • दाना मंडी, नारायणगढ़, छेहर्टा
  • राम नगर कॉलोनी, टिब्बा ग्राउंड, इस्लामाबाद

 

कुछ इस तरह बयां किया लोगों ने दर्द

  • हादसे में अपने पिता गुरिंदर कुमार व चाचा पवन कुमार को गंवा चुके दीपक का कहना है कि सरकार ने मुआवजे के नाम पर पांच-पांच लाख रुपए जारी कर दिए। सरकार ने मारे गए लोगों के परिजनों को सरकारी नौकरी देने की बात कही थी, जो आज तक पूरी नहीं हुई। मेरी मां अरुणा सिलाई करके परिवार पाल रही है। सरकार को शर्म क्यों नहीं आती?
  • 20 वर्षीय हर्ष के दिव्यांग पिता राजकुमार कहते हैं, हर्ष इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहा था। सरकार ने सिर्फ दिखावा किया। हादसे के 15 दिन बाद सिद्धू ने मुझसे कहा कि आपके लिए मेरे घर के दरवाजे हमेशा खुले हैं। हालांकि सिद्धू दंपति हादसे के बाद कभी यहां नहीं आए।
  • 16 साल के बॉबी के पिता बिंदु कहते हैं, बॉबी दसवीं में पढ़ता था। अकेला ही दशहरा देखने चला गया, फिर लौटकर नहीं आया। वह हमारा सहारा था। कंजक पूजन व रामनवमी के अवसर पर हम प्रतिवर्ष घर में हवन करते थे। बॉबी ही दौड़-भागकर सारा काम करता था। मेरी आंखें आज भी उसे तलाशती हैं। अब एक दिव्यांग बेटे रोहित का का ही सहारा है।
  • दशहरा उत्सव में \'रावण\' का किरदार निभाने वाले दलबीर सिंह भी दर्दनाक हादसे का शिकार बना। उसकी मां स्वर्ण कौर कहती है कि दशहरा आयोजक व नेताओं के खिलाफ सरकार ने कोई कार्रवाई नहीं की। अगर सरकार हादसे के जिम्मेवार आयोजक व नेताओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई करती तो शायद लोगों के जख्मों पर मरहम लग जाता।
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