6 साल से अटके रामगढ़िया बुंगा की मरम्मत शुरू हाेने की उम्मीद

3 वर्ष पहले
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श्री दरबार साहिब के पास ही बने रामगढ़िया बुंगा की मरम्मत का काम जाे लगभग पिछले 6 साल से अटका पड़ा है वह जल्द ही शुरू हाेने की संभावना है। यह बुंगा जस्सा सिंह रामगढ़िया औैर अन्य सिख सरदाराें ने दरबार साहिब की सुरक्षा और यात्रियों के ठहरने लिए बनवाया था। पुरातन हाेने कारण समय के साथ साथ इसे सांभ संभाल की जरूरत महसूस की जा रही थी।

रामगढ़िया भाईचारे के लाेगाें की तरफ से इसकी मरम्मत का जिम्मा लिया गया था। इसके काफी बड़े भाग की साफ-साफाई औैर मरम्मत करवाई गई थी।

पुरातत्व विभाग औैर भवन निर्माण माहिरों की राय मुताबिक ही काम हाेगा, शहर में संगत जान सकेगी ऐतिहासिक विरासत को

पिछले लगभग 6 साल से यह काम रुका हुआ है। इसी को लेकर शिरोमणि कमेटी अधिकारियों और रामगढ़िया बिरादरी के लाेगाें की मीटिंग पिछले दिनाें हुई। रामगढ़िया भाईचारे के सुखविंदर सिंह धंजल ने बताया कि रामगढ़िया समाज की ओर से इसके दाे मीनाराें की मरम्मत करवाने के बाद 18 अप्रैल 2008 को पुरातत्व विभाग के माहिरों की रहनुमाई में इसकी मरम्मत का काम शुरू किया गया था। इसके दाे फेज मुकम्मल हाे चुके हैं। इसकी मरम्मत का काम राेक दिया गया था। उन्होंने बताया कि बुंगे के नवनिर्माण का काम जल्द ही शुरू किया जाएगा। इसके लिए पुरातत्व विभाग और भवन निर्माण माहिरों की राय मुताबिक ही काम हाेगा।

डाॅ. रावल सिंह ने सुझाव दिया था : धंजल के मुताबिक गत दिनाें हुई मीटिंग में गुरु नानकदेव युनिवर्सिटी के डाॅ. रावल सिंह ने सुझाव दिया था कि बुंगे को जाने लिए रास्ता दरबार साहिब की परिक्रमा से दिया जाना चाहिए। इससे संगत को सुविधा हाेगी और वह अपनी विरासत को जान सकेगी।

लालकिले से उखाड़कर अमृतसर लाया गया है तख्त-ए-ताउस

मुगल सल्तनत को जड़ से खत्म करने के प्रतीक के तौर पर लालकिले से उखाड़कर लाया गया तख्त-ए-ताऊस अमृतसर में रखा है। महाराजा रणजीत सिंह से पहले, 11 मार्च 1783 को जस्सा सिंह आहलूवालिया, बघेल सिंह और जस्सा सिंह रामगढ़िया ने मिलकर दिल्ली फतेह करते हुए तख्त-ए-ताऊस की वो सिल, जिस पर बैठकर मुगल बादशाहों की ताजपोशी होती थी, उखाड़ी और उसे अकाल तख्त साहिब के चरणों में रख दिया। इस सिल की लंबाई 6 फीट 3 इंच, चौड़ाई 4 फुट 6 इंच और मोटाई 9 इंच है। इसे दरबार साहिब परिसर में रामगढ़ियां बुंगा में रखा है। इसी पर बैठकर मुगल बादशाहों ने सिखों के नौवें गुरु हिंद की चादर श्री गुरु तेग बहादुर साहिब, भाई मनी सिंह और भाई मतिदास को शहीद करने के फतवे जारी किए थे।

84 से एक ही बुंगा बाकी : बताया जाता है कि श्री दरबार साहिब परिक्रमा के आसपास पास लगभग 84 बुंगे माैजूद थे, लेकिन समय के साथ साथ जैसे-जैसे परिक्रमा को बढ़ाया गया, ताे वहां माैजूद बुंगे हटा दिए गए। मौजूदा समय में केवल रामगढ़िया बुंगा ही बचा हुआ है। जस्सा सिंह रामगढ़िया की ओर से 1755 में दाे लाख 75000 की लागत से बनवाया गया था। इस बुंगे की दाे मंजिल जमीन के ऊपर हैं औैर तीन मंजिल जमीन के नीचे हैं। अब मरम्मत कार्य शुरू हाेने की संभावना जताई जा रही है।

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