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9 अप्रैल को जेईई-मेन्स का टेस्ट देने वाले स्टूडेंट ने की खुदकुशी

Bhaskar News Network

Apr 17, 2019, 07:26 AM IST

Amritsar News - बाबा बकाला साहिब/ब्यास| अमृतसर की मोहिंदरा कॉलोनी में रहने वाले 17 साल के रोहन ने रविवार को इंटरनेट पर आंसर-की देखी...

Amritsar News - student giving test of jee mains test on april 9 suicides
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बाबा बकाला साहिब/ब्यास| अमृतसर की मोहिंदरा कॉलोनी में रहने वाले 17 साल के रोहन ने रविवार को इंटरनेट पर आंसर-की देखी थी। इसमें कम नंबर बनते देखकर उसके साथ-साथ परिवार भी थोड़ा निराश हो गया। इसके बावजूद रविवार रात रोहन खुद बाहर से परिवार के लिए खाना लाया। सोमवार सुबह 7:45 बजे वह घर से यह कहते हुए निकला कि ‘मैं सर से मिलने जा रहा हूं, उनसे डिस्कस करता हूं।’ रोहन बेदी कॉलेज ऑफ फिजिक्स के प्रो. रोहित बेदी से ट्यूशन पढ़ता था। प्रो. बेदी ने बताया कि सोमवार को रोहन उनके पास नहीं पहुंचा। सुबह 11:50 बजे उसकी मां ने फोन कर पूछा कि क्या रोहन उनके पास है? तो उन्होंने बताया कि वह तो आज टेस्ट देने आया ही नहीं। इसके बाद प्रो. बेदी और रोहन के पेरेंट्स ने उसकी खोज शुरू की। सोमवार शाम 6 बजे तक सभी जगह ढूंढने पर भी रोहन नहीं मिला। रात 8 बजे तूफान आने के बाद सबकी चिंताएं बढ़ गईं। सोमवार रात 11:30 बजे रोहन की स्कूटी ब्यास दरिया के पास पुलिस को मिल गई। वहां उसका बैग, दवा के खाली पत्ते और खाखी लिफाफे पर लिखा सुसाइड नोट भी था।

मेडिसिन के लिफाफे पर सुसाइड नोट में लिखा... I quit, I am sorry

आखिर हुआ क्या...आंसर-की से मिलान पर कम नंबर बने

रोहन (17 वर्ष) ने 9 अप्रैल को जेईई-मेन्स की परीक्षा दी थी। टारगेट था आईआईटी में दाखिला लेकर इंजीनियर बनना। जनवरी-2019 में पहले फेज की परीक्षा दी थी और उसके 150 प्लस अंक आए थे। 14 अप्रैल काे परीक्षा की आंसर-की इंटरनेट पर अपलोड हुईं तो रोहन ने अपने जवाब से उसका मिलान किया। इस बार उसके 130 प्लस अंक बन रहे थे।

क्यों की आत्महत्या... अच्छा रैंक न आने का अंदेशा ही निराशा की ओर खींच ले गया

आंसर-की से मिलान के बाद रोहन ही नहीं, उसके माता-पिता भी थोड़े निराश हो गए थे। यही निराशा रोहन के सुसाइड नोट में दिखी। उसने लिखा- आई क्विट...आई एम सॉरी (यानी-मैं जा रहा हूं...मुझे माफ करना)। हालांकि जेईई-मेन्स के अंकों के अनुसार रोहन जेईई-एडवांस के लिए क्वालिफाई कर सकता था। रिजल्ट आने में भी 20-25 दिन पड़े थे और पिता ने उसे दूसरे कॉलेज में एडमिशन का विकल्प भी दिया था, मगर अच्छा रैंक न आने के अंदेशे से रोहन टूट गया।

आत्महत्या सबसे निगेटिव विचार है। हमें दुख है कि हमें यह खबर प्रकाशित करनी पड़ रही है। निराशा का वो क्षण जब बच्चे इस रास्ते पर बढ़ते हैं...तब परिवार...दोस्तों...शिक्षकों की जिम्मेदारी है कि बच्चों को समझें और उन्हें उस डर से बाहर निकालें

रोहन...तुम तो इंजीनियर बनकर सपने पूरे करना चाहते थे... सॉरी बोलकर दुनिया से क्यों विदा हो गए

सोमवार सुबह 7.45 बजे घर से ट्यूशन के लिए निकला, मंगलवार सुबह 9 बजे ब्यास में मिली लाश

रोहन का स्टडी रूम।

रोहन के स्टडी रूम में रखी किताबें, कुर्सी और टेबल।

घर से निकलते ही डलवाया पेट्रोल : इलाके में लगे क्लोज सर्किट (सीसी) कैमरों की फुटेज खंगालने पर पता चला कि रोहन ने सुबह घर से निकलकर सबसे पहले कचहरी चौक के पास स्थित पंप से स्कूटी में पेट्रोल डलवाया। पंप के कारिंदों ने बताया कि उसने 200 रुपए का तेल भरवाया था। तेल भरवाने के बाद रोहन ने एलिवेटेड रोड से होते हुए, सुबह 9:07 बजे मानांवाला टोल प्लाजा क्राॅस किया। इसके बाद वह ब्यास दरिया के आसपास ही रहा। ब्यास थाने के एसएचओ अमरीक सिंह ने बताया कि मंगलवार सुबह 9 बजे गोताखोर दरिया में उतरे तो लोहे के पुल से 1 किलोमीटर दूर रोहन की लाश मिल गई।

स्कूल में था टॉपर : डीएवी पब्लिक स्कूल की प्रिंसिपल डॉ. नीरा शर्मा बताती हैं कि रोहन बहुत सिंसियर स्टूडेंट था। उसकी नेचर रिजर्व थी और वह सबसे अच्छा व्यवहार करता था। स्कूल में भी वह पढ़ाई में टॉपर था।

बाबा बकाला अस्पताल में पोस्टमार्टम हाउस के बाहर खड़े रोहन के परिजन।

पैरोसिटामोल के 3 पत्ते खरीदे थे: पुलिस की शुरुआती जांच में सामने आया है कि रोहन ने पैरासिटामोल दवा के 3 पत्ते खरीदे और उनकी सारी टेबलेेट खा गया। इससे पहले उसने दवा के खाली खाखी लिफाफे पर सुसाइड नोट में लिखा... ‘पैरासिटामोल इज इंजरियस टू हेल्थ एंड बी फेट। आई क्विट...आई एम सॉरी।’ इसके बाद वह संभवत: ब्यास में लोहे के पुराने पुल पर गया और वहां से दरिया में छलांग लगा दी।

वो प्रयास...जो बच्चों को निराशा से बचा सकते हैं

मनाेवैज्ञानिक डाॅ. विक्रांत बजाज कहते हैं कि सुसाइड का विचार तनाव के समय आता है। खुद स्टूडेंट, पेरेंट्स और टीचर प्रयास करें तो इससे बचा जा सकता है।

स्टूडेंट ये करें : लगातार बैठकर न पढ़ें। एक-दो घंटे के बाद ब्रेक लें। हल्का खाना खाएं। योगा करें।

पेरेंट्स ये करें: बच्चे से दोस्ताना व्यवहार करें। उसके दिमाग में ये बात डालें कि रिजल्ट जिंदगी का अंत नहीं है। कई और मौके मिलेंगे। हार जिंदगी का एक हिस्साभर है। असफलताओं से सीख मिलती है। बच्चा तनाव में हो तो उसे अकेला न छोड़ें।

टीचर क्या करें : बच्चों पर नजर रखें। कक्षा में कभी-कभार हंसी-मजाक भी करें। स्टूडेंट का हौसला बढ़ाएं बच्चों से इंटरेक्टिव सेशन करें, ताकि वह अपने मन के भाव बता सकें। उनके हौसले को न तो तोड़ें और न ही कभी भेदभाव करें।

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