ब्रह्मज्ञान के बिना जीव को कर्म बंधन से मुक्ति नहीं मिल सकती : स्वामी विष्णु

Amritsar News - दिव्य ज्योति जागृति संस्थान ने आयोजित धार्मिक समारोह का आयोजन करवाया। इस मौके पर स्वामी विष्णुदेवानंद ने कहा कि...

Oct 22, 2019, 07:30 AM IST
दिव्य ज्योति जागृति संस्थान ने आयोजित धार्मिक समारोह का आयोजन करवाया। इस मौके पर स्वामी विष्णुदेवानंद ने कहा कि हमारे महापुरुषों ने सारी मानव जाति को 3 शब्दों के द्वारा राह दिखाई है। क्षत्रिय ज्ञान की कथा। इसमें बताया है ज्ञान के बिना मुक्ति नहीं। शास्त्र के अनुसार प्रत्येक जीव जन्म-जन्मांतरों के कर्म संस्कारों की जंजीरों में बंधे हुए हैं।

जब तक हम इनसे मुक्त नहीं होते, तब तक ब्रह्म के साथ एक नहीं हो सकते। ब्रह्मज्ञान ही वह अस्त्र-शस्त्र है जिससे हम अपने छोटे-बड़े सभी कर्म संस्कारों को काटकर अपनी मंजिल अर्थात ईश्वर की ओर बढ़ सकते हैं। आज संसार के ज्ञान को विज्ञान कहता है तो कोई केवल बुद्धि शास्त्र वह शब्दों के ज्ञान को ही समझ लेता है। परंतु ज्ञान का अर्थ है ब्रह्म को जानना। अपनी आत्मिक अनुभूति करना है। इसके लिए सच्चे जिज्ञासु बनकर तत्वदर्शी सतगुरु की खोज करनी होगी। क्योंकि यह जन्म-जमांन्तरों का सौदा है। स्वामी ने बताया कि गुरु की पहचान उसका बाहरी भेष के पीछे की संगत की भीड़ या उसके चेहरे का नूर नहीं होता।

सच्चे सतगुरु की पहचान ना होने के कारण आज अधिकतर लोग धोखा खा रहे हैं। अंत में शास्त्र सम्मत कसौटी के अनुसार एक पूर्ण सतगुरु शिष्य के अंतकरण में चारों वेदों के ज्ञान को प्रकट कर देता है। इसके लिए चार वेद इसके प्रतीक हैं। आंतरिक अनुभूतियों की ऋग्वेद में चर्चा है। अथर्वदेव में अमृत की चर्चा की गई है। जब पूर्ण सतगुरु शिष्य के मस्तक पर हाथ रखकर ब्रह्मज्ञान प्रदान करते हैं, तो उसी समय ही दिव्य दृष्टि खुलती है और वह सभी अनुभवों को अपने भीतर करता है। अंत में सच्चे जिज्ञासु बनकर सच्चे गुरु की खोजकर ब्रह्मज्ञान को प्राप्त करके ईश्वर को प्राप्त करने का प्रयास करना चाहिए।

दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान की तरफ से करवाए धार्मिक समारोह के दौरान मौजूद संगत। फोटो : भास्कर

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