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हर विपदा में भक्तों की रक्षा करते प्रभु : श्रीधराचार्य

भास्कर संवाददाता | आनंदपुर साहिब गांव मींडवां के आश्रम में गत दिनों से चल रही सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा को...

Dainik Bhaskar

Jun 08, 2018, 02:00 AM IST
हर विपदा में भक्तों की रक्षा करते प्रभु : श्रीधराचार्य
भास्कर संवाददाता | आनंदपुर साहिब

गांव मींडवां के आश्रम में गत दिनों से चल रही सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा को वीरवार को विशाल हवन यज्ञ एवं भंडारे के उपरांत विराम दे दिया गया। संगत को प्रसिद्ध कथा वाचक स्वामी श्रीधराचार्य जी महाराज वृन्दावन वालों नें कहा कि पुरुषोत्तम माह में श्रीमद भागवत महापुराण की कथा जहां भी सुनाई जाती है, वहां पर भगवान स्वयं विराजमान होते हैं। इसलिए हमें ऐसे धार्मिक समारोहों में बढ़-चढ़ कर भाग लेना चाहिए क्योंकि संकीर्तन द्वारा ही सभी पापों का नाश संभव है। इस आयोजित सात दिवसीय कथा में संगतों ने जहां अपनी हाजरी लगवाई वहीं पर कथा व मधुर भजनों का आनंद भी प्राप्त किया।

कथा में पौंड्रक, जरासंध तथा शिशुपाल के वध का प्रसंग सुनाते हुए स्वामी जी ने कहा कि भगवान ने हर विपदा की घड़ी में अपने भक्तों की रक्षा की है। श्री कृष्ण सुदामा की मित्रता का प्रसंग सुनाते उन्होंने कहा कि यदि मित्रता हो तो भगवान श्री कृष्ण व सुदामा जैसी भेदभाव व लोभ मुक्त वाली होनी चाहिए। इसके उपरंत नवग्रह पूजन किया गया।

भास्कर संवाददाता | आनंदपुर साहिब

गांव मींडवां के आश्रम में गत दिनों से चल रही सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा को वीरवार को विशाल हवन यज्ञ एवं भंडारे के उपरांत विराम दे दिया गया। संगत को प्रसिद्ध कथा वाचक स्वामी श्रीधराचार्य जी महाराज वृन्दावन वालों नें कहा कि पुरुषोत्तम माह में श्रीमद भागवत महापुराण की कथा जहां भी सुनाई जाती है, वहां पर भगवान स्वयं विराजमान होते हैं। इसलिए हमें ऐसे धार्मिक समारोहों में बढ़-चढ़ कर भाग लेना चाहिए क्योंकि संकीर्तन द्वारा ही सभी पापों का नाश संभव है। इस आयोजित सात दिवसीय कथा में संगतों ने जहां अपनी हाजरी लगवाई वहीं पर कथा व मधुर भजनों का आनंद भी प्राप्त किया।

कथा में पौंड्रक, जरासंध तथा शिशुपाल के वध का प्रसंग सुनाते हुए स्वामी जी ने कहा कि भगवान ने हर विपदा की घड़ी में अपने भक्तों की रक्षा की है। श्री कृष्ण सुदामा की मित्रता का प्रसंग सुनाते उन्होंने कहा कि यदि मित्रता हो तो भगवान श्री कृष्ण व सुदामा जैसी भेदभाव व लोभ मुक्त वाली होनी चाहिए। इसके उपरंत नवग्रह पूजन किया गया।

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